- पटना में ‘कोचिंग राज’ बेलगाम! खान सर का संस्थान एनओसी के इंतजार में, रौशन सर ने नहीं किया आवेदन; शिक्षा विभाग की बड़ी पोल खुली
पटना। बिहार की राजधानी पटना में शिक्षा के नाम पर चल रहे कोचिंग कारोबार की हकीकत अब खुलकर सामने आने लगी है। करोड़ों रुपये के इस विशाल उद्योग पर निगरानी रखने वाला शिक्षा विभाग खुद अव्यवस्था का शिकार है। हालत यह है कि शहर के कई चर्चित कोचिंग संस्थान बिना पूर्ण पंजीकरण के संचालित हो रहे हैं, जबकि कुछ संस्थानों ने तो अब तक आवेदन तक नहीं किया है। सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले खान सर के कोचिंग संस्थान को भी अब तक अंतिम एनओसी नहीं मिल सकी है। इस खुलासे ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला शिक्षा कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार फरवरी 2025 में कोचिंग संस्थानों के पंजीकरण के लिए ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया गया था। इसके बाद ऑफलाइन आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह बंद कर दी गई। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से एक साल भी पूरा नहीं हुआ कि फरवरी 2026 में पोर्टल बंद हो गया। पिछले पांच महीनों से पोर्टल ठप पड़ा है और उसे दोबारा शुरू करने के लिए जिला प्रशासन को कई बार पत्र भेजे जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पोर्टल बंद होने के कारण नए कोचिंग संचालकों और नवीनीकरण कराने वालों की परेशानी बढ़ गई है। रोजाना बड़ी संख्या में लोग जिला शिक्षा कार्यालय पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा। इस बीच राजधानी के विभिन्न इलाकों में कोचिंग संस्थान धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि पटना सदर प्रखंड, जिसे बिहार की कोचिंग राजधानी माना जाता है, वहां सैकड़ों कोचिंग संस्थान चल रहे हैं लेकिन केवल चार संस्थानों को ही आधिकारिक एनओसी प्राप्त है। मुसल्लहपुर हाट, भिखना पहाड़ी, अशोक राजपथ, महेंद्रू और बाजार समिति जैसे इलाकों में हजारों छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन अधिकांश संस्थानों की वैधानिक स्थिति स्पष्ट नहीं है। जिला शिक्षा कार्यालय के मुताबिक मुसल्लहपुर हाट स्थित खान सर कोचिंग ने पंजीकरण के लिए आवेदन दिया है और उसकी स्थल जांच भी पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद अभी तक एनओसी जारी नहीं की गई है। वहीं चर्चित ज्ञान बिंदु कोचिंग, जिसे रौशन सर से जोड़ा जाता है, ने अब तक पंजीकरण के लिए आवेदन ही नहीं किया है। इसके अलावा बोरिंग रोड स्थित खान सर के एक अन्य संस्थान के लिए भी कोई आवेदन उपलब्ध नहीं है। प्रशासनिक व्यवस्था की धीमी गति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पोर्टल शुरू होने के बाद मात्र 38 आवेदन प्राप्त हुए थे। इन सभी की जांच पूरी कर ली गई और उन्हें सही पाया गया। वर्तमान में केवल 12 संस्थानों की जांच प्रक्रिया चल रही है। जबकि राजधानी में कोचिंग संस्थानों की वास्तविक संख्या सैकड़ों में है। कोचिंग संस्थानों की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति बनाई गई है, जिसमें जिला पदाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, वरीय पुलिस अधीक्षक और मगध महिला कॉलेज के प्राचार्य शामिल हैं। समिति की रिपोर्ट के बाद एसडीओ अंतिम रिपोर्ट तैयार कर जिला शिक्षा कार्यालय को सौंपते हैं। लेकिन प्रक्रिया इतनी धीमी है कि आवेदकों को महीनों इंतजार करना पड़ रहा है। नियमों के अनुसार बिना पंजीकरण कोचिंग चलाने पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और संबंधित संचालक के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की जा सकती है। नए पंजीकरण के लिए 15 हजार रुपये और नवीनीकरण के लिए पांच हजार रुपये शुल्क निर्धारित है। भवन का न्यूनतम क्षेत्रफल 500 वर्गफुट होना चाहिए, फायर सेफ्टी की व्यवस्था अनिवार्य है तथा छात्र-छात्राओं के लिए पर्याप्त शौचालय और बैठने की जगह उपलब्ध होनी चाहिए। बावजूद इसके, राजधानी में बड़ी संख्या में संस्थान इन नियमों की परवाह किए बिना संचालित हो रहे हैं। सवाल यह है कि जब कानून मौजूद है, दंड का प्रावधान भी है, तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या प्रशासन केवल कागजों पर नियम लागू कर रहा है? पांच महीने से बंद पोर्टल और सैकड़ों अपंजीकृत कोचिंग संस्थानों की मौजूदगी ने बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।