10 दिन में चौथी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, जनता पर महंगाई का बड़ा हमला; तेल कंपनियां अब भी रोज़ 750 करोड़ घाटे में

  • 10 दिन में चौथी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, जनता पर महंगाई का बड़ा हमला; तेल कंपनियां अब भी रोज़ 750 करोड़ घाटे में

दिल्ली: देशभर में पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। पिछले 10 दिनों के भीतर चौथी बार ईंधन के दाम बढ़ाए जाने से लोगों में नाराजगी और चिंता दोनों बढ़ती जा रही है। इस बार पेट्रोल 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा किया गया है। नई दरें लागू होने के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। वहीं मुंबई, कोलकाता और चेन्नई समेत देश के बड़े शहरों में भी पेट्रोल-डीजल के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुके हैं। लगातार हो रही बढ़ोतरी का असर अब सीधे आम लोगों की जेब पर दिखाई देने लगा है। निजी वाहन चलाने वाले लोग जहां हर दिन अतिरिक्त खर्च झेल रहे हैं, वहीं माल ढुलाई महंगी होने से बाजार में जरूरी वस्तुओं की कीमतों में भी तेजी आने लगी है। सब्जियां, फल, दूध, खाद्यान्न, निर्माण सामग्री और रोजमर्रा के सामानों के दाम बढ़ने की आशंका गहराने लगी है। ग्रामीण इलाकों में खेती-किसानी से जुड़े कामों पर भी इसका असर पड़ रहा है, क्योंकि डीजल महंगा होने से सिंचाई और ट्रैक्टर संचालन की लागत बढ़ गई है। जानकारों के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल बाजार को हिला दिया है। अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर कार्रवाई के बाद शुरू हुए संघर्ष का असर अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति पर पड़ा है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावित होने से कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हुई है। इसका नतीजा यह हुआ कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से ज्यादा का उछाल दर्ज किया गया। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ोतरी का सीधा असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ रहा है। सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि लंबे समय तक कीमतों को नियंत्रित रखने के कारण उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ा। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार हालिया बढ़ोतरी के बाद भी सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां प्रतिदिन लगभग 750 करोड़ रुपये का घाटा उठा रही हैं। मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि दाम बढ़ने से नुकसान में करीब एक चौथाई की कमी जरूर आई है, लेकिन कंपनियों की आर्थिक स्थिति अब भी दबाव में है। वहीं विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। विपक्ष का आरोप है कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव समाप्त होने के बाद जनता पर महंगाई का बोझ डाला गया। विपक्ष का कहना है कि चुनाव के दौरान कीमतों को जानबूझकर स्थिर रखा गया और अब धीरे-धीरे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए जा रहे हैं। दूसरी ओर सरकार का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी और रुपये की कमजोरी के कारण कीमतें बढ़ाना मजबूरी बन गया है। गौरतलब है कि इससे पहले 23 मई को भी पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा किया गया था। इसके अलावा सीएनजी की कीमतों में भी लगातार इजाफा हुआ है। हाल के दिनों में सीएनजी कुल 4 रुपये प्रति किलोग्राम तक महंगी हो चुकी है। इसका असर ऑटो, टैक्सी और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। कई शहरों में किराया बढ़ाने की मांग उठने लगी है। मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी। उस समय इसे जनता को राहत देने वाला बड़ा कदम बताया गया था। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। मई 2022 के बाद पहली बार पेट्रोल और डीजल की कीमतें इतनी ऊंचाई पर पहुंची हैं। लगातार बढ़ती महंगाई और ईंधन के बढ़ते दामों ने मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों की चिंता और बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल के दाम में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, जिससे महंगाई का संकट और गहरा सकता है।

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