सुगौली में अंगूठा लगवाकर गरीबों का राशन गायब, वायरल वीडियो के बाद SDM का बड़ा एक्शन, लाइसेंस रद्द सहित एफआईआर की तैयारी

  • सुगौली में अंगूठा लगवाकर गरीबों का राशन गायब, वायरल वीडियो के बाद SDM का बड़ा एक्शन, लाइसेंस रद्द सहित एफआईआर की तैयारी

सुगौली: प्रखंड अंतर्गत दक्षिणी छपरा बहास पंचायत में जन वितरण प्रणाली से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है. सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो ने पीडीएस व्यवस्था की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए है.वायरल वीडियो में कथित तौर पर लाभुकों का फिंगरप्रिंट लगवाने के बाद उन्हें सरकारी राशन देने के बजाय नकद राशि दी जाती दिखाई दे रही है. जानकारी के अनुसार लाभुकों को दूसरे जगह उत्तरी छपरा बहास पंचायत के मेहवा गांव में बुलाया गया था. वहां ई-पॉश मशीन पर लाभुकों का अंगूठा लगवाया गया और इसके बाद निर्धारित खाद्यान्न उपलब्ध कराने के बजाय नकद रुपये थमा दिए गए. वीडियो वायरल होते ही ग्रामीणों और लाभुकों में भारी आक्रोश फैल गया. लोगों का कहना है कि सरकार गरीबों तक मुफ्त और सस्ता अनाज पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन यदि बीच रास्ते में ही राशन की जगह पैसे देकर सरकारी अनाज का खेल किया जा रहा है, तो यह गरीबों के अधिकारों के साथ सीधा खिलवाड़ है. मामले में चिक्नॉटा गांव के पीडीएस दुकानदार आमोद सिंह का नाम सामने आने के बाद प्रशासन भी हरकत में आ गया. वायरल वीडियो की चर्चा पूरे इलाके में होने लगी और स्थानीय लोगों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग शुरू कर दी. ग्रामीणों का कहना है कि यदि लाभुकों के अंगूठे के आधार पर सरकारी रिकॉर्ड में राशन वितरण दिखा दिया गया और वास्तविक अनाज कहीं और खपाया गया, तो यह केवल अनियमितता नहीं बल्कि बड़े स्तर पर सरकारी व्यवस्था के दुरुपयोग का मामला है. इधर, सदर एसडीएम निशांत सिहारा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए। उन्होंने प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी से पूरे मामले की जांच कराई. जांच में व्यापक अनियमितता सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। एसडीएम निशांत सिहारा ने बताया कि संबंधित पीडीएस दुकानदार के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि गरीबों के हक के साथ किसी प्रकार की लापरवाही या गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. एसडीएम ने बताया कि जांच रिपोर्ट में गंभीर गड़बड़ियां पाई गई हैं, जिसके आधार पर संबंधित दुकानदार की अनुज्ञप्ति निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही प्राथमिकी दर्ज कराने की कार्रवाई भी की जा रही है. प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के बाद इलाके में यह संदेश गया है कि सरकार और प्रशासन गरीबों के अधिकारों को लेकर गंभीर है तथा शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी. स्थानीय लोगों ने एसडीएम निशांत सिहारा की सक्रियता और त्वरित कार्रवाई की सराहना की है. लोगों का कहना है कि अक्सर ऐसे मामलों में शिकायतें दब जाती हैं या कार्रवाई लंबी खिंचती है, लेकिन इस मामले में प्रशासन ने तेजी दिखाते हुए तत्काल जांच और कार्रवाई शुरू कर दी. ग्रामीणों का मानना है कि यदि अधिकारी इसी तरह सख्ती दिखाएं तो पीडीएस व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है. यह मामला अब केवल एक पंचायत तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि पूरे जिले में पीडीएस व्यवस्था की निगरानी और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रहा है. ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि जिले के अन्य पंचायतों में भी पीडीएस दुकानों की जांच कराई जाए, ताकि गरीबों के हक पर डाका डालने वाले लोगों की पहचान हो सके.
फिलहाल वायरल वीडियो और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में इस मामले की चर्चा जोरों पर है. अब लोगों की नजर आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है कि जांच में और क्या तथ्य सामने आते हैं तथा दोषियों पर कितना कड़ा कदम उठाया जाता है.

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