- मोतिहारी में उर्वरक कारोबारियों पर सख्त हुआ प्रशासन, कालाबाजारी पर होगी सीधी कार्रवाई
मोतिहारी: खरीफ 2026 सीजन की तैयारी को लेकर मोतिहारी में कृषि विभाग अब पूरी तरह सख्त और आक्रामक रुख में दिखाई दे रहा है। हर साल खाद की किल्लत, कालाबाजारी, अधिक कीमत वसूली और किसानों की परेशानियों को लेकर उठने वाले सवालों के बीच इस बार प्रशासन पहले से ही एक्शन मोड में नजर आ रहा है। किसानों को समय पर और सही मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से गुरुवार को जिला कृषि पदाधिकारी मनीष कुमार सिंह की अध्यक्षता में जिले के सभी थोक उर्वरक विक्रेताओं के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में साफ और कड़े शब्दों में चेतावनी दी गई कि सरकार की “जीरो टॉलरेंस नीति” का अक्षरशः पालन नहीं करने वालों पर कठोर कार्रवाई तय है। बैठक के दौरान जिला कृषि पदाधिकारी ने कहा कि खरीफ सीजन किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है और इसी समय उर्वरकों की मांग सबसे ज्यादा बढ़ जाती है। ऐसे समय में यदि किसी स्तर पर लापरवाही, कालाबाजारी या मुनाफाखोरी होती है तो उसका सीधा असर किसानों की खेती और उत्पादन पर पड़ता है। उन्होंने सभी थोक उर्वरक विक्रेताओं को स्पष्ट निर्देश दिया कि निर्धारित सरकारी दर पर ही खुदरा दुकानदारों को उर्वरक उपलब्ध कराया जाए ताकि किसानों तक खाद आसानी से और उचित मूल्य पर पहुंच सके। उन्होंने कहा कि यदि कहीं भी मनमानी कीमत वसूली या खाद रोककर रखने की शिकायत मिली तो संबंधित विक्रेता के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में सबसे गंभीर विषय उर्वरक के साथ अन्य उत्पादों की जबरन बिक्री का भी उठा। जिला कृषि पदाधिकारी ने कड़े शब्दों में कहा कि कई जगहों पर शिकायत मिलती है कि खाद लेने के लिए खुदरा दुकानदारों और किसानों पर दूसरे उत्पाद खरीदने का दबाव बनाया जाता है। इसे पूरी तरह गैरकानूनी बताते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी भी थोक विक्रेता द्वारा ऐसा किया गया तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। विभाग ने साफ कर दिया कि किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर अतिरिक्त मुनाफा कमाने वालों पर इस बार सीधी कार्रवाई होगी। कृषि विभाग ने अवैध भंडारण, उर्वरक विचलन, मुनाफाखोरी और कालाबाजारी को लेकर भी बेहद सख्त रुख अपनाया है। बैठक में कहा गया कि कई बार खाद की कृत्रिम कमी पैदा कर बाजार में अफरा-तफरी फैलाने की कोशिश की जाती है, जिससे किसानों को अधिक कीमत पर खाद खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इस बार विभाग ऐसी किसी भी गतिविधि पर पैनी नजर रखेगा। जिला कृषि पदाधिकारी ने साफ चेतावनी दी कि यदि किसी थोक विक्रेता के खिलाफ अवैध भंडारण, खाद छिपाने, कालाबाजारी या विचलन की शिकायत मिलती है तो संबंधित कारोबारी को चिन्हित कर उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर लाइसेंस रद्द करने और एफआईआर दर्ज करने से भी विभाग पीछे नहीं हटेगा।
बैठक के दौरान यह भी कहा गया कि किसानों को खाद के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए पूरी सप्लाई व्यवस्था को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया जाएगा। विभाग लगातार बाजार की निगरानी करेगा और जरूरत पड़ने पर औचक जांच अभियान भी चलाया जाएगा। कृषि विभाग का साफ मानना है कि यदि शुरुआत से ही सख्ती बरती जाए तो कालाबाजारी और कृत्रिम संकट जैसी समस्याओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है। हर साल खरीफ सीजन में खाद को लेकर जिले के कई हिस्सों से शिकायतें सामने आती रही हैं। कहीं किसानों को घंटों लाइन में लगना पड़ता है, तो कहीं अधिक कीमत वसूली जाती है। कई बार जरूरतमंद किसानों को समय पर खाद नहीं मिल पाती, जिससे उनकी खेती प्रभावित होती है। इसी पृष्ठभूमि में इस बार कृषि विभाग पहले से ही अलर्ट मोड में दिखाई दे रहा है और स्पष्ट संदेश दे रहा है कि किसानों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
बैठक के जरिए जिला प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि अब केवल चेतावनी देकर छोड़ने का दौर खत्म हो चुका है। विभाग जमीन पर निगरानी बढ़ाने के साथ-साथ कार्रवाई के मूड में भी है। किसानों के हितों की रक्षा और बाजार व्यवस्था को नियंत्रित रखने के लिए प्रशासन की यह सख्ती आने वाले दिनों में काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विभाग की इस कार्रवाई से जहां ईमानदार उर्वरक कारोबारियों में भरोसा बढ़ा है, वहीं गड़बड़ी करने वाले कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ है।