- मोतिहारी में ‘स्वर्ण तूफान’ एसपी स्वर्ण प्रभात के एक्शन से अपराधियों का सफाया, माफिया ने जोड़ी जान बचाने की दौड़!
पूर्वी चंपारण: मोतिहारी की धरती पर कानून का राज स्थापित करने की जो मिसाल इन दिनों देखने को मिल रही है, उसके केंद्र में खड़े हैं तेजतर्रार पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात। सितंबर 2024 में जिले की कमान संभालने के साथ ही उन्होंने यह साफ कर दिया था कि अब पुलिसिंग का चेहरा बदलेगा—और बदला भी ऐसा कि अपराधियों के लिए यह जिला अब सुरक्षित ठिकाना नहीं, बल्कि खतरे की जमीन बन गया।
स्वर्ण प्रभात ने आते ही सिस्टम की जड़ पर प्रहार किया। थानों में वर्षों से चली आ रही ढिलाई, दबाव और गलत पैरवी की संस्कृति को खत्म कर सख्त अनुशासन लागू किया। उन्होंने पुलिस को यह संदेश दिया कि अब काम सिर्फ कानून के हिसाब से होगा, किसी सिफारिश या दबाव से नहीं। नतीजा यह हुआ कि जहां पहले अपराधी बेखौफ घूमते थे, वहीं अब वे या तो सलाखों के पीछे हैं या जिला छोड़कर भागने को मजबूर।
जिले के हर थाना क्षेत्र में लगातार चलाए गए अभियान ने अपराध की कमर तोड़ दी है। भू-माफियाओं, हथियार तस्करों और नशे के कारोबारियों के खिलाफ ऐसी सर्जिकल कार्रवाई हुई कि उनके पूरे नेटवर्क ध्वस्त हो गए। अवैध हथियारों की रिकॉर्ड बरामदगी ने यह साबित कर दिया कि पुलिस अब सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर निर्णायक एक्शन ले रही है।

कुख्यात अपराधी कमरुद्दीन उर्फ ढोलकवा की गिरफ्तारी इस बदले हुए सिस्टम की सबसे बड़ी तस्वीर बनकर सामने आई। उसके ठिकाने से भारी मात्रा में हथियारों की बरामदगी ने पूरे अपराध जगत को हिला कर रख दिया। यह सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं थी, बल्कि अपराध के खिलाफ खुली चेतावनी थी—कि अब कोई भी कितना बड़ा क्यों न हो, कानून से ऊपर नहीं।
सीमावर्ती इलाकों में भी पुलिस की पैनी नजर बनी रही। रक्सौल समेत कई क्षेत्रों में नशे और शराब के अवैध कारोबार पर जबरदस्त चोट करते हुए तस्करों की कमर तोड़ दी गई। हरैया, हरसिद्धि जैसे थानों की पुलिस ने भी उनके नेतृत्व में लगातार बड़ी सफलताएं हासिल कीं, जिससे यह साफ हुआ कि यह बदलाव किसी एक जगह नहीं, बल्कि पूरे जिले में एक साथ हुआ है।
आज मोतिहारी की फिजा बदल चुकी है। जहां कभी अपराध का साया गहराता था, वहां अब कानून का खौफ और सुरक्षा का भरोसा महसूस होता है। आम जनता खुलकर कह रही है कि पुलिस अब उनकी ढाल है, जबकि अपराधियों के लिए यह नाम ही काल बन चुका है।
स्वर्ण प्रभात ने यह साबित कर दिया है कि मजबूत इरादे, साफ नीयत और सख्त नेतृत्व के दम पर किसी भी व्यवस्था को बदला जा सकता है। मोतिहारी में उनकी पुलिसिंग सिर्फ कानून-व्यवस्था संभालने तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह एक मिसाल बन गई है—ऐसी मिसाल, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा।