बिहार में सरकारी गाड़ी में ‘दारू का खेल’, नशे में ड्राइवर का सरेआम तांडव, पुलिस 500 मीटर पर भी बेखबर

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भागलपुर: शराबबंदी कानून की जमीनी हकीकत को उजागर करने वाली एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नाथनगर थाना क्षेत्र के मदनीनगर चौक पर उत्पाद विभाग (मद्य निषेध) की जिस सरकारी गाड़ी को शराब पकड़ने के लिए लगाया गया था, उसी गाड़ी से शराब बरामद हुई और उसका चालक नशे में धुत होकर सड़क पर हंगामा करता मिला।
घटना शुक्रवार देर रात की बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रेड-ब्लू लाइट लगी सरकारी गाड़ी, जिस पर “अधीक्षक मद्य निषेध ग्रुप सेंटर 3, भागलपुर” लिखा था, मदनीनगर गोलंबर के पास अचानक रुक गई। गाड़ी चला रहा चालक, जिसकी पहचान विभागीय सूत्रों के अनुसार संजय कुमार (स्थानीय निवासी) के रूप में हुई है, नशे में बुरी तरह धुत था। उसने सड़क किनारे एक शादी समारोह में मौजूद महिलाओं पर फब्तियां कसनी शुरू कर दीं। जब लोगों ने इसका विरोध किया तो उसने माफी मांगने के बजाय खुद को एक्साइज अधिकारी बताते हुए सरकारी रौब झाड़ा और लोगों को झूठे केस में फंसाने की धमकी देने लगा।
स्थिति तब बिगड़ गई जब स्थानीय युवाओं ने चालक को घेर लिया। गाड़ी की तलाशी लेने पर गियर के पास से अंग्रेजी शराब की बोतल बरामद हुई। इस खुलासे ने वहां मौजूद लोगों को स्तब्ध कर दिया, क्योंकि यह वही विभाग है जो राज्य में शराबबंदी लागू कराने के लिए जिम्मेदार है। यानी शराब पकड़ने निकली सरकारी गाड़ी खुद ही शराब लेकर घूमती मिली।
घटना के दौरान स्थानीय लोगों ने डायल 112 पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि घटनास्थल से महज 500 मीटर दूर थाना होने के बावजूद पुलिस मौके पर समय पर नहीं पहुंची। काफी देर तक आम लोग ही स्थिति को संभालते रहे और आरोपी चालक वहीं हंगामा करता रहा। पुलिस की इस लापरवाही को लेकर लोगों में आक्रोश देखा गया और सवाल उठने लगे कि जब इतनी नजदीक थाना है, तो फिर कार्रवाई में इतनी देरी क्यों हुई।
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसमें चालक की हरकतें, लोगों से बहस और गाड़ी से शराब मिलने का दृश्य साफ देखा जा सकता है। वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया और मामले को दबाने के बजाय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ी।
लेटेस्ट अपडेट के मुताबिक, उत्पाद विभाग ने आरोपी चालक संजय कुमार को तत्काल प्रभाव से ड्यूटी से हटा दिया है और उसके खिलाफ विभागीय जांच बैठा दी गई है। पूरे मामले की रिपोर्ट वरीय अधिकारियों को भेज दी गई है और जांच के आधार पर कड़ी कार्रवाई की बात कही जा रही है। वहीं बिहार पुलिस ने भी नाथनगर थाना से स्पष्टीकरण मांगा है और यह जांच शुरू की गई है कि सूचना मिलने के बावजूद पुलिस समय पर मौके पर क्यों नहीं पहुंची।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर पुलिस समय पर पहुंचती तो आरोपी को मौके पर ही गिरफ्तार किया जा सकता था, लेकिन यहां आम लोगों को ही कानून व्यवस्था संभालनी पड़ी। इस घटना ने न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को उजागर किया है, बल्कि यह भी दिखा दिया है कि जमीन पर कानून का कितना असर है।
पूरे मामले ने बिहार शराबबंदी कानून की प्रभावशीलता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। एक तरफ सरकार शराबबंदी को लेकर सख्ती के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर उसी कानून को लागू कराने वाले विभाग की गाड़ी से शराब मिलना और चालक का नशे में हंगामा करना यह साबित करता है कि सिस्टम के अंदर ही गंभीर खामियां मौजूद हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच के बाद दोषियों पर कितनी सख्त कार्रवाई होती है और क्या इस तरह की घटनाओं पर वास्तव में लगाम लग पाएगी।

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