- ADM के ठिकानों पर निगरानी का छापा, नोटों के साथ 48 महंगी घड़ियां मिलीं
पटना/बेगूसराय : आय से अधिक संपत्ति के मामले में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने सोमवार को पटना के एडीएम (आपूर्ति) रविंद्र कुमार दिवाकर और उनकी पत्नी कुमारी स्वीटी, जो दानापुर की जिला अवर निबंधक हैं, से जुड़े पटना और बेगूसराय के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। न्यायालय से तलाशी वारंट के आधार पर की गयी कार्रवाई में नकदी, सोने के आभूषण, जमीन से जुड़े दस्तावेज और बड़ी संख्या में महंगी घड़ियां मिलने की जानकारी सामने आयी है। निगरानी की कार्रवाई का सबसे चौंकाने वाला पहलू बरामद नकदी और घड़ियों का कलेक्शन है। अलग-अलग रिपोर्टों में पटना स्थित आवास से करीब 70 लाख रुपये से अधिक नकद बरामद होने की बात सामने आयी है। बेगूसराय स्थित पैतृक आवास से भी करीब 9 लाख रुपये से अधिक नकदी मिलने की जानकारी दी गयी है। हालांकि तलाशी और मूल्यांकन की प्रक्रिया के दौरान बरामदगी का अंतिम आधिकारिक आंकड़ा बदल सकता है। पटना के रूपसपुर थाना क्षेत्र स्थित कश्यप ग्रीन सिटी के फ्लैट में तलाशी के दौरान नकदी की गिनती के लिए मशीन तक मंगानी पड़ी। निगरानी टीम ने कई महंगी घड़ियां भी बरामद की हैं। शुरुआती रिपोर्टों में करीब 48 घड़ियों का उल्लेख है, जबकि कुछ रिपोर्टों में तीन दर्जन से अधिक ब्रांडेड घड़ियां मिलने की बात कही गयी है। घड़ियों की कीमत के संबंध में शुरुआती अनुमान करीब छह लाख रुपये से लेकर अलग-अलग आकलन तक सामने आए हैं, इसलिए अंतिम मूल्यांकन निगरानी की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। तलाशी के दौरान सोने के आभूषण और जमीन से जुड़े दस्तावेज भी मिलने की जानकारी है। निगरानी अधिकारियों के मुताबिक बरामद संपत्ति, नकदी, आभूषण और दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है। यही जांच अब यह स्पष्ट करेगी कि बरामद संपत्ति का स्रोत क्या है और वह संबंधित अधिकारियों की घोषित एवं ज्ञात आय के अनुरूप है या नहीं। निगरानी विभाग से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले में आय से अधिक संपत्ति का केस संख्या 113/26 दर्ज है। एक रिपोर्ट में कथित तौर पर आय से अधिक संपत्ति का आंकड़ा 1,06,85,900 रुपये बताया गया है। इसी मामले में न्यायालय से वारंट प्राप्त होने के बाद पति-पत्नी से जुड़े कार्यालयों, पटना के आवास और बेगूसराय स्थित पैतृक आवास समेत कुल चार ठिकानों पर तलाशी की गयी। बेगूसराय में निगरानी की टीम ने पोखरिया मोहल्ले स्थित पैतृक आवास पर भी घंटों तलाशी ली। वहां से नकदी के साथ सोने के आभूषण और निवेश एवं संपत्ति से जुड़े कागजात मिलने की सूचना है। निगरानी टीम बरामद दस्तावेजों को खंगाल रही है ताकि संपत्तियों के स्वामित्व, खरीद और निवेश के स्रोत का पता लगाया जा सके। कार्रवाई के दौरान बरामद सामान का मिलान और मूल्यांकन भी किया जा रहा है। इस पूरे मामले में महंगी घड़ियों का कलेक्शन खास तौर पर चर्चा में है। सरकारी पद पर रहते हुए किसी अधिकारी के पास मौजूद निजी संपत्ति अपने आप में अपराध साबित नहीं करती, लेकिन जब उसी अधिकारी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज हो और तलाशी में बड़ी नकदी, आभूषण, संपत्ति के दस्तावेज तथा महंगी वस्तुएं बरामद हों, तो जांच एजेंसी के सामने इन सभी संपत्तियों के स्रोत और आय से संबंध की पड़ताल महत्वपूर्ण हो जाती है। यही वजह है कि अब निगाहें सिर्फ बरामद नोटों या घड़ियों पर नहीं, बल्कि उन सवालों पर हैं जिनका जवाब जांच के बाद सामने आएगा—कितनी संपत्ति घोषित थी, कितनी संपत्ति वास्तव में मिली, संपत्ति खरीदने के लिए रकम कहां से आयी, नकदी का स्रोत क्या था और महंगी घड़ियों समेत बरामद सामान की खरीद किस आय से हुई? रिपोर्टों के मुताबिक रविंद्र कुमार दिवाकर अक्टूबर 2025 से पटना में एडीएम (आपूर्ति) के पद पर कार्यरत हैं। इससे पहले वे अलग-अलग प्रशासनिक पदों पर भी रहे हैं। फिलहाल निगरानी की कार्रवाई को अंतिम निष्कर्ष मानना जल्दबाजी होगी। बरामदगी और जांच के आधार पर आरोपों की पुष्टि या खंडन आगे की कानूनी प्रक्रिया में होगा। निगरानी विभाग द्वारा संपत्तियों के दस्तावेज, नकदी, आभूषण और अन्य सामान का विस्तृत मूल्यांकन तथा आय के स्रोत से मिलान किया जाना बाकी है। लेकिन छापेमारी ने बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था में एक बार फिर यह बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—सरकारी पद, घोषित आय और जमीन-जायदाद से लेकर घर में रखी नकदी और घड़ियों तक के बीच आखिर कितना बड़ा अंतर है? इसका जवाब निगरानी की जांच और अदालत में आगे होने वाली कार्रवाई से ही सामने आएगा।
