- गंडक का दोहरा दबाव: फुलियाखांड़ में 5 मीटर तटबंध क्षतिग्रस्त, बगहा में भी टूटा चंपारण तटबंध
- बैरिया के फुलियाखांड़ में ओवरटॉपिंग-पाइपिंग से क्षति, खेतों में फैल रहा पानी,
- बगहा के खैरटवा में करीब 10 मीटर तटबंध टूटा, तीन गांवों के निचले हिस्सों पर खतरा
बैरिया/बेतिया। गंडक नदी के बढ़े दबाव के बीच पश्चिम चंपारण में तटबंधों की चुनौती लगातार गंभीर होती जा रही है। बैरिया प्रखंड के फुलियाखांड़ गांव के समीप गंडक नदी के बाएं चंपारण तटबंध के 59.60 किलोमीटर पर ओवरटॉपिंग और अचानक पाइपिंग के कारण करीब पांच मीटर चौड़ाई में तटबंध क्षतिग्रस्त हो गया है। तटबंध में क्षति के बाद पानी खेतों में फैल रहा है। प्रशासन ने फुलियाखांड़, शामपुर और शीरोजपुर के निचले इलाकों में पानी फैलने तथा आवागमन और संपर्कता प्रभावित होने की आशंका जतायी है। इधर, जिले के बगहा क्षेत्र में भी चंपारण तटबंध को नुकसान पहुंचा है। 28 सितंबर की शाम खैरटवा गांव के पास करीब 10 मीटर हिस्सा टूटने की सूचना जल संसाधन विभाग ने दी। वहां गंडक का जलस्तर खतरे के निशान 90.90 मीटर से करीब 35 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया था। विभाग के अनुसार इससे अगस्तिया, खैरटवा और चंद्रपुर के निचले इलाकों में पानी फैलने और संपर्कता प्रभावित होने की आशंका है।
एक तरफ मरम्मत, दूसरी तरफ बढ़ता दबाव
बैरिया के फुलियाखांड़ में जल संसाधन विभाग की टीम मौके पर मौजूद है। क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत का काम युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। जिला प्रशासन भी लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए 30 सदस्यीय एनडीआरएफ टीम को भी मौके पर तैनात किया गया है। लेकिन तटबंधों पर लगातार बन रहे दबाव ने विभाग और प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। सोमवार को वाल्मीकिनगर गंडक बराज से इस मानसून में अब तक का सर्वाधिक करीब 5.43 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने की सूचना सामने आयी थी। इसके बाद पश्चिम चंपारण के कई हिस्सों में बाढ़ का असर तेज हुआ। हालांकि बाद में बराज से डिस्चार्ज में कमी आने की खबर भी सामने आयी है।
बगहा में सड़क और शहर तक पहुंचा पानी
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक बगहा शहर के कई वार्डों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। बगहा-बेतिया और बगहा-वाल्मीकिनगर मार्ग पर भी पानी चढ़ने से आवागमन प्रभावित हुआ है। कुछ सरकारी परिसरों के जलमग्न होने की भी सूचना है। वहीं, बेतिया-गोरखपुर एनएच-727 पर भी पानी पहुंचने की खबर सामने आयी है। एक रिपोर्ट के अनुसार सड़क पर करीब दो फीट तक पानी चढ़ गया था और बाद में गंडक के डिस्चार्ज में कमी दर्ज की गयी।
तटबंधों की मजबूती पर उठेंगे सवाल
फुलियाखांड़ में तटबंध का क्षतिग्रस्त होना केवल तत्काल राहत और मरम्मत का मामला नहीं है। ओवरटॉपिंग और पाइपिंग से तटबंध को नुकसान पहुंचना इस बात को सामने लाता है कि संवेदनशील हिस्सों की निगरानी कितनी प्रभावी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मरम्मत के बाद कमजोर हिस्से को स्थायी रूप से मजबूत करने के लिए विभाग क्या कदम उठाता है और भविष्य में ऐसी स्थिति रोकने के लिए क्या व्यवस्था की जाती है। बगहा में जिस हिस्से के टूटने की खबर सामने आयी है, वहां भी स्थानीय लोगों ने पहले तटबंध पर दबाव की बात कही थी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक उस क्षेत्र में पूर्व में भी तटबंध को नुकसान पहुंच चुका था।
निचले इलाकों में रहने वालों को सतर्क रहने की अपील
प्रशासन ने संभावित प्रभावित क्षेत्रों के लोगों से तत्काल सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की है। लोगों को बिना पुष्टि जलभराव वाले मार्गों पर जाने से बचने, बच्चों और बुजुर्गों की विशेष सुरक्षा करने तथा अफवाहों पर ध्यान नहीं देने को कहा गया है। आपात स्थिति में पश्चिम चंपारण जिला नियंत्रण कक्ष के 06254-247002 और 06254-247003 नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है। फिलहाल नजर तटबंध की मरम्मत, पानी के फैलाव और गंडक के जलस्तर पर टिकी है। एक ही जिले में अलग-अलग स्थानों पर तटबंधों पर दबाव और क्षति की घटनाओं ने प्रशासन के सामने चुनौती बढ़ा दी है। आने वाले घंटों में पानी का रुख और मरम्मत की गति ही तय करेगी कि प्रभावित इलाकों में स्थिति कितनी नियंत्रित रह पाती है।
