- लूटकांड के अभियुक्त को जमानत, थानाध्यक्ष पर विभागीय कार्रवाई
- छौड़ादानो से प्रभात कुमार लाइन क्लोज, राजीव कुमार को मिली थाने की कमान
छौड़ादानो। लूटकांड के एक अभियुक्त को कानूनी प्रावधान के तहत मिले जमानत लाभ के मामले ने छौड़ादानो थाने की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में विभाग ने कार्रवाई करते हुए थानाध्यक्ष प्रभात कुमार को पद से हटा दिया है। उन्हें तत्काल पुलिस केंद्र में योगदान करने का आदेश दिया गया है। उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही संख्या-123/2026 भी शुरू की गयी है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय से जारी आदेश के मुताबिक, बिहार पुलिस मुख्यालय, पटना से प्राप्त पत्र के आलोक में प्रभात कुमार को छौड़ादानो थानाध्यक्ष के पद से वंचित करते हुए पुलिस केंद्र वापस किया गया है। विभागीय कार्रवाई के पीछे लूटकांड के एक अभियुक्त को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 187 के तहत जमानत का लाभ मिलने से जुड़ा मामला बताया जा रहा है। पुराने प्रावधान में यही स्थिति धारा 167(2) से संबंधित थी। मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है कि किसी आपराधिक कांड में अभियुक्त को कानूनी समय-सीमा के भीतर जमानत का लाभ मिलने के पीछे पुलिस अनुसंधान और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े कई सवाल उठते हैं। हालांकि, इन सवालों का अंतिम जवाब विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही सामने आयेगा। अभी यह मान लेना उचित नहीं होगा कि प्रभात कुमार दोषी हैं। विभागीय कार्यवाही का निष्कर्ष ही उनकी जिम्मेदारी और भूमिका की अंतिम स्थिति स्पष्ट करेगा।
थाने की कमान अब राजीव कुमार के हाथ
प्रभात कुमार के हटने के बाद राजीव कुमार को छौड़ादानो थाना का नया थानाध्यक्ष बनाया गया है। राजीव कुमार इससे पहले पश्चिम चंपारण के गौनाहा थाना और पूर्वी चंपारण के कल्याणपुर थाना की कमान संभाल चुके हैं। नये थानाध्यक्ष के सामने सिर्फ कुर्सी संभालने की चुनौती नहीं है। थाना क्षेत्र में अपराध नियंत्रण, लंबित कांडों का निष्पादन, फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और आम लोगों में पुलिस के प्रति भरोसा कायम रखना भी उनकी प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल होगा।
जमानत प्रकरण ने खड़े किये कई सवाल
प्रभात कुमार को थानाध्यक्ष पद से हटाये जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि लूटकांड के अभियुक्त को जमानत का लाभ किस परिस्थितियों में मिला और पुलिस अनुसंधान की प्रक्रिया में कहां चूक हुई। क्या मामला केवल कानूनी समय-सीमा से जुड़ा था या अनुसंधान की प्रक्रिया में भी कोई विभागीय कमी सामने आयी? इन सवालों का जवाब फिलहाल जांच के दायरे में है। विभागीय कार्रवाई शुरू होने से इतना स्पष्ट है कि पुलिस मुख्यालय ने मामले को गंभीरता से लिया है। अब निगाह विभागीय जांच के निष्कर्ष पर है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही तय होगा कि पूरे प्रकरण में किस स्तर पर जिम्मेदारी बनती है।
