मैनेजर का प्रभार देने के नाम पर दो साल से टालमटोल, 28 हजार रिश्वत लेते बीसीओ गिरफ्तार

  • मैनेजर का प्रभार देने के नाम पर दो साल से टालमटोल, 28 हजार रिश्वत लेते बीसीओ गिरफ्तार
  • नालंदा में निगरानी विभाग की कार्रवाई, शिकायत के सत्यापन के बाद बिछाया गया था जाल

नालंदा। सहकारी समिति में मैनेजर का प्रभार देने के नाम पर कथित रूप से रिश्वत मांगना एक प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी (बीसीओ) को महंगा पड़ गया। निगरानी विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए बीसीओ को 28 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। कार्रवाई के बाद विभागीय महकमे में हड़कंप मच गया। आरोप है कि मैनेजर का प्रभार दिए जाने के मामले को करीब दो वर्षों से टाला जा रहा था और इसके लिए रिश्वत की मांग की जा रही थी। मिली जानकारी के अनुसार, संबंधित व्यक्ति मैनेजर का प्रभार हासिल करने के लिए लंबे समय से कार्यालय का चक्कर लगा रहा था। आरोप है कि करीब दो साल तक मामले को अलग-अलग कारणों से टालने के बाद प्रभार देने के एवज में रुपये की मांग की गई। लगातार टालमटोल और कथित रिश्वत की मांग से परेशान होकर शिकायत निगरानी विभाग तक पहुंची। शिकायत मिलने के बाद निगरानी टीम ने मामले को गंभीरता से लिया और पहले आरोपों का सत्यापन कराया। सत्यापन के दौरान रिश्वत मांगने की बात सामने आने के बाद निगरानी विभाग ने कार्रवाई की रणनीति तैयार की। इसके लिए धावा दल का गठन किया गया। शिकायतकर्ता को तय रकम के साथ संबंधित अधिकारी के पास भेजा गया। जैसे ही बीसीओ ने 28 हजार रुपये की रिश्वत स्वीकार की, पहले से मुस्तैद निगरानी टीम ने उन्हें दबोच लिया। टीम ने मौके पर कार्रवाई पूरी करने के बाद आरोपी बीसीओ को अपने साथ ले गई। निगरानी की कार्रवाई ने सरकारी कार्यालयों में काम कराने के नाम पर कथित लेन-देन के आरोपों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। खासकर किसी पद का प्रभार देने जैसे प्रशासनिक काम के लिए कथित तौर पर रिश्वत की मांग किए जाने का मामला सामने आने से व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हैं। हालांकि, रिश्वत लेने और मांगने से जुड़े आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। कार्रवाई के बाद निगरानी विभाग आरोपी अधिकारी से पूछताछ और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रहा है। यह भी देखा जा रहा है कि कथित रिश्वत की मांग केवल इसी मामले तक सीमित थी या कार्यालय के स्तर पर इस तरह की कोई अन्य शिकायत भी सामने आई है। गिरफ्तारी के बाद अब निगरानी विभाग की आगे की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर नजर रहेगी।

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