- नाला निर्माण में ‘घटिया खेल’ का आरोप, महादलित बस्ती में फूटा गुस्सा! काम रोककर ग्रामीणों का हंगामा, पानी में खड़ी कर दी गईं सरिया पर उठे सवाल
छौड़ादानो/राजेश कुमार सिंह। छौड़ादानो मेन रोड में नहर चौक से कस्टम ऑफिस तक चल रहे नाला निर्माण को लेकर मंगलवार को महादलित बस्ती के लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। निर्माण कार्य में कथित अनियमितता और गुणवत्ता की अनदेखी का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने काम रोक दिया और निर्माण एजेंसी के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि नाला निर्माण की नींव तैयार करने में ही मानकों की अनदेखी की जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब नींव ही कमजोर होगी तो लाखों की लागत से बनने वाला नाला आखिर कितने दिनों तक टिक पाएगा?बस्ती के सामने ग्रामीणों ने निर्माण कार्य रुकवाकर मौके पर मौजूद निर्माण एजेंसी के कर्मियों से जवाब मांगा। ग्रामीणों का कहना था कि सरकारी राशि से कराए जा रहे इस काम में गुणवत्ता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन मौके की स्थिति देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि निर्माण में जल्दबाजी की जा रही है।
पानी के बीच सरिया खड़ा कर शुरू किया निर्माण, ग्रामीणों ने घेरा
विरोध कर रहे अर्जुन मली, नगीना मली, सुरेश मली, करण मली, हिरमुन्नी देवी, राधिका देवी, गुड्डी देवी और गौरी देवी समेत अन्य ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बस्ती के सामने नाला निर्माण के लिए पहले पीसीसी बेस तैयार किया जाना चाहिए था। लेकिन आरोप है कि बिना पीसीसी किए ही सरिया खड़ा कर निर्माण शुरू कर दिया गया। ग्रामीणों के मुताबिक जिस जगह नाला बनाया जा रहा है, वहां नीचे पानी जमा था। इसी पानी के बीच सरिया खड़ा कर निर्माण शुरू करने का आरोप लगाते हुए लोगों ने सवाल किया कि क्या ऐसी नींव पर बनने वाला नाला टिकाऊ हो सकता है? ग्रामीणों ने कहा कि निर्माण की शुरुआत ही यदि तकनीकी मानकों की अनदेखी से होगी तो भविष्य में नाला टूटने, धंसने या जलनिकासी व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बनी रहेगी।
सरकारी पैसे से निर्माण, फिर गुणवत्ता पर सवाल क्यों?
ग्रामीणों का आक्रोश सिर्फ निर्माण एजेंसी तक सीमित नहीं रहा। लोगों ने संबंधित विभाग के अधिकारियों से भी पूरे मामले की जांच की मांग की। उनका कहना था कि सरकारी राशि से होने वाले किसी भी निर्माण कार्य में गुणवत्ता की निगरानी विभाग की जिम्मेदारी है। लोगों ने मांग की कि मौके पर इस्तेमाल की जा रही सामग्री, निर्माण की गहराई, नींव की मजबूती और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच कराई जाए। साथ ही यह भी देखा जाए कि निर्माण कार्य स्वीकृत प्राक्कलन और तकनीकी मानकों के अनुरूप कराया जा रहा है या नहीं।
पहली बारिश में खुल जाएगी गुणवत्ता की पोल?
ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि नाले की नींव मजबूत नहीं रही तो पहली ही बारिश में निर्माण की वास्तविक गुणवत्ता सामने आ सकती है। लोगों का कहना है कि नाला बनने के बाद यदि वह टूट गया या धंस गया तो दोबारा मरम्मत के नाम पर सरकारी राशि खर्च होगी और नुकसान अंततः जनता का ही होगा। ग्रामीणों ने साफ कहा कि विकास के नाम पर सिर्फ निर्माण पूरा कर देना पर्याप्त नहीं है। निर्माण मजबूत, टिकाऊ और मानक के अनुरूप होना चाहिए।
विरोध के बाद एजेंसी ने दिया पीसीसी कराने का आश्वासन
ग्रामीणों के विरोध और काम रोकने के बाद निर्माण एजेंसी के कर्मियों ने लोगों को पीसीसी कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद काफी देर तक चले विरोध के बाद ग्रामीणों का आक्रोश शांत हुआ। हालांकि, ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि आश्वासन के बावजूद निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया तो वे फिर से विरोध करने को मजबूर होंगे।
जांच की मांग, अब अधिकारियों की परीक्षा
महादलित बस्ती के लोगों ने संबंधित विभाग के अधिकारियों से पूरे नाला निर्माण की स्थलीय जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल मौके पर पीसीसी करा देने से मामला खत्म नहीं होना चाहिए, बल्कि पूरे निर्माण की तकनीकी जांच होनी चाहिए। लोगों ने मांग की कि निर्माण की शुरुआत से लेकर वर्तमान स्थिति तक काम की गुणवत्ता की जांच की जाए और यदि कहीं प्राक्कलन या तकनीकी मानकों की अनदेखी सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए। फिलहाल ग्रामीणों के विरोध के बाद निर्माण एजेंसी की ओर से पीसीसी कराने का आश्वासन दिया गया है। अब निगाहें संबंधित विभाग के अधिकारियों पर हैं कि वे ग्रामीणों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराते हैं या मामला आश्वासन तक ही सिमटकर रह जाता है।