आदापुर थाना से 14 हजार लेते प्राइवेट मुंशी रंगे हाथ गिरफ्तार, अब थानाध्यक्ष से लेकर पूरे नेटवर्क संदेह के घेरे में?

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मोतिहारी। परत-दर-परत खुलासा: पूर्वी चंपारण के आदापुर थाना में भ्रष्टाचार का ऐसा खेल उजागर हुआ है जिसने पूरे पुलिस सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। निगरानी विभाग (विजिलेंस) की टीम ने सटीक ट्रैप बिछाकर एक प्राइवेट मुंशी को 14 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। लेकिन यह सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि थाना के अंदर चल रहे संगठित वसूली तंत्र का बड़ा पर्दाफाश माना जा रहा है।
गिरफ्तार आरोपी इंतखाब आलम कोई सरकारी कर्मचारी नहीं है, फिर भी वह वर्षों से थाना के अंदर बैठकर “मुंशी” की भूमिका निभा रहा था। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि वह न सिर्फ फाइलों को आगे बढ़ाता था, बल्कि केस के निपटारे, धाराएं प्रभावित करने और लाइसेंस दिलाने जैसे संवेदनशील मामलों में भी दखल देता था।

आर्म्स लाइसेंस के नाम पर ‘रेट फिक्स’ खेल

मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी ने एक पूर्व सैनिक को टारगेट बनाया। उसे भरोसा दिलाया गया कि “ऊपर तक सेटिंग है” और आर्म्स लाइसेंस पक्का बन जाएगा। इसके एवज में 14 हजार रुपये तय किए गए।
पीड़ित ने जब इसकी शिकायत निगरानी विभाग से की, तो पूरी योजना के तहत ट्रैप बिछाया गया और जैसे ही पैसे का लेन-देन हुआ, टीम ने मौके पर ही आरोपी को दबोच लिया।
थाना परिसर में ‘प्राइवेट राज’ – सिस्टम फेल या मिलीभगत?
सबसे बड़ा सवाल यही है—
जब थाना में सरकारी मुंशी मौजूद है, तो एक प्राइवेट व्यक्ति को अंदर बैठाकर काम क्यों कराया जा रहा था?
क्या यह सब थानाध्यक्ष की जानकारी के बिना संभव है?
अब यह मामला सीधे-सीधे सिस्टम फेलियर नहीं, बल्कि अंदरूनी मिलीभगत की ओर इशारा कर रहा है। थानाध्यक्ष पप्पू पासवान पर बढ़ता दबाव
मौजूदा थानाध्यक्ष पप्पू पासवान की भूमिका पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के अनुसार:
इंतखाब आलम लंबे समय से थाना में सक्रिय था
कई मामलों में उसकी “सिफारिश” के बिना फाइल आगे नहीं बढ़ती थी
थाने में आने वाले फरियादियों को पहले उसी के पास भेजा जाता था
ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह पूरा खेल “साइलेंट अप्रूवल” से चल रहा था?
दलाली का संगठित नेटवर्क, कई नाम रडार पर
निगरानी विभाग की पूछताछ में कई चौंकाने वाले इनपुट मिल रहे हैं।
आरोपी के मोबाइल और कॉल डिटेल्स खंगाले जा रहे हैं
किन-किन पुलिसकर्मियों से उसकी नियमित बातचीत थी, इसकी जांच चल रही है
प्रारंभिक संकेत मिल रहे हैं कि यह नेटवर्क सिर्फ आदापुर थाना तक सीमित नहीं हो सकता
सूत्रों की मानें तो जल्द ही कुछ और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
लंबे समय से चल रहा था ‘रेट कार्ड सिस्टम’
स्थानीय लोगों का दावा है कि थाना में हर काम की एक तय “रेट” थी:
केस में राहत दिलाने का अलग रेट
धाराएं हल्की करवाने का अलग रेट
लाइसेंस बनवाने का अलग रेट
और इस पूरे खेल का “फ्रंटमैन” बना हुआ था इंतखाब आलम।
वरिष्ठ अधिकारियों की एंट्री, बड़ी कार्रवाई के संकेत
मामले की गंभीरता को देखते हुए:
जिले के वरिष्ठ अधिकारियों ने तत्काल रिपोर्ट तलब की है।
विभागीय जांच की तैयारी शुरू हो चुकी है
थाने के कई पुलिसकर्मी भी जांच के घेरे में आ सकते हैं
संकेत साफ हैं—यह कार्रवाई सिर्फ एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहने वाली।

सबसे बड़ा सवाल

क्या यह सिर्फ एक “मुंशी” का खेल था…
या फिर थाना के अंदर बैठे बड़े चेहरों की शह पर चल रहा था पूरा भ्रष्टाचार तंत्र?

निष्कर्ष:

आदापुर थाना में हुई यह कार्रवाई एक बड़ा मैसेज है कि निगरानी विभाग अब सीधे जड़ पर वार कर रहा है। लेकिन असली परीक्षा अब सिस्टम की है—क्या जांच बड़े जिम्मेदारों तक पहुंचेगी या फिर मामला एक प्राइवेट मुंशी पर ही थम जाएगा?
फिलहाल पूरे जिले की नजर इस केस पर टिकी है… अगले खुलासे और भी चौंकाने वाले हो सकते हैं।

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