बिहार में “बंदिशों के बीच मौत का कारोबार: मोतीहारी में जहरीली शराब ने ली जान, सिस्टम कटघरे में”

  • “बंदिशों के बीच मौत का कारोबार
  • मोतीहारी में जहरीली शराब ने ली जान, सिस्टम कटघरे में
  • जहरीली शराब का कहर, मौत का सिलसिला कब थमेगा?

बिहार में पूर्ण शराबबंदी के दावों की एक बार फिर सरेआम धज्जियां उड़ गई हैं। पूर्वी चंपारण के मोतीहारी में जहरीली शराब के साए ने ऐसा तांडव मचाया है कि एक घर का चिराग बुझ गया, जबकि दो लोग अभी भी जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। सवाल सीधा है—जब शराबबंदी है, तो यह मौत बेचने वाला कारोबार आखिर फल-फूल कैसे रहा है? रघुनाथपुर थाना क्षेत्र के बलगंगा और तुरकौलिया इलाकों से आई इस खौफनाक घटना ने पूरे जिले को हिलाकर रख दिया है। चंदू नामक व्यक्ति की मौत हो चुकी है, जबकि लोहा ठाकुर और लड्डू साह उर्फ जितेंद्र शाह अस्पताल में भर्ती हैं। पीड़ितों की हालत देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि जहर किस कदर शरीर में फैल चुका था—एक पीड़ित ने तो यहां तक बताया कि स्प्रिट पीने के बाद उसकी आंखों की रोशनी तक चली गई। यह कोई पहली घटना नहीं है। तीन साल पहले भी इन्हीं इलाकों—तुरकौलिया, हरसिद्धि, रघुनाथपुर और सुगौली—में जहरीली शराब ने आधा दर्जन से ज्यादा लोगों की जान ले ली थी। हर बार मौतें होती हैं, हंगामा होता है, जांच बैठती है, लेकिन नतीजा? वही ढाक के तीन पात।
प्रशासन हर बार की तरह इस बार भी हरकत में आया है। पुलिस अधीक्षक ने दावा किया है कि शराब बेचने वाले की पहचान कर ली गई है और गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। ALTF और FSL की टीमें मौके पर डटी हैं, अधिकारी कैंप कर रहे हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि ये सारी सक्रियता आखिर हादसे के बाद ही क्यों नजर आती है? जमीनी हकीकत यह है कि शराबबंदी के नाम पर कागजी सख्ती जरूर है, लेकिन धरातल पर अवैध शराब का नेटवर्क बेखौफ चल रहा है। गांव-गांव में स्प्रिट और जहरीली शराब आसानी से उपलब्ध है। गरीब और अनजान लोग इसकी चपेट में आकर अपनी जान गंवा रहे हैं। अब वक्त आ गया है कि सरकार और प्रशासन सिर्फ बयानबाजी से आगे बढ़ें। जब तक अवैध शराब के पूरे सिंडिकेट को जड़ से खत्म नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसी मौतें यूं ही होती रहेंगी और हर बार कुछ परिवार हमेशा के लिए उजड़ते रहेंगे।
यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि सिस्टम पर लगा एक करारा तमाचा है—जिसका जवाब अब देना ही होगा।

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