बंद कमरे में फंदे पर लटकी मिली कृषि पदाधिकारी,‘मम्मी माफ करना’ नोट से सिवान में सनसनी, आत्महत्या या साजिश?

  • मम्मी माफ करन, हैंडल नहीं कर पाई, फंदे से झूलती मिली कृषि पदाधिकारी, सुसाइड नोट ने खोले दर्द के दरवाजे या छिपा है बड़ा खेल?

सिवान: जिला के सिसवन ढाला स्थित लक्ष्मीपुर मोहल्ले में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने न सिर्फ प्रशासन बल्कि पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। कृषि विभाग में तैनात सहायक तकनीकी प्रबंधक सृष्टि कुमारी अपने ही कमरे में फंदे से झूलती मिलीं—और पीछे छोड़ गईं एक ऐसा सुसाइड नोट, जो जितना दर्दनाक है, उतना ही रहस्यमय भी।
“मैं करना नहीं चाहती थी… हैंडल नहीं कर पाई… मम्मी माफ करना, तुझे परेशान किया…”
ये आखिरी शब्द क्या सिर्फ एक टूटे मन की पुकार हैं या किसी गहरे दबाव और अनकहे सच की तरफ इशारा? यही सवाल अब पूरे मामले का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। वैशाली जिले के स्वर्गीय अर्जुन सिंह की पुत्री सृष्टि कुमारी मार्च 2023 से सिवान के हसनपुरा प्रखंड के सहुली चट्टी स्थित प्रखंड कृषि पदाधिकारी कार्यालय में पदस्थापित थीं। एक जिम्मेदार सरकारी पद, उज्ज्वल भविष्य और परिवार की उम्मीदें—फिर आखिर ऐसा क्या हुआ कि जिंदगी से हार माननी पड़ी?
घटना से एक दिन पहले ही सृष्टि ‘मौर्या एक्सप्रेस’ से हाजीपुर से सिवान लौटी थीं। रात 9 बजे भाई आशुतोष कुमार से उनकी आखिरी बातचीत हुई। सबकुछ सामान्य बताया जा रहा है—लेकिन इसके कुछ ही घंटों बाद मोबाइल बंद हो जाता है… और फिर सुबह दरवाजा नहीं खुलता। मंगलवार को जब दरवाजा तोड़ा गया, तो अंदर का दृश्य दिल दहला देने वाला था—कमरे में फंदे से लटकता शव, और पास ही पड़ा वह नोट, जिसने इस मौत को सीधा मामला नहीं रहने दिया। पुलिस ने नोट को जब्त कर लिया है, लेकिन उसकी सच्चाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब सवालों का अंबार है—
क्या यह सच में आत्महत्या है या किसी साजिश का हिस्सा?
क्या सृष्टि किसी मानसिक दबाव में थीं या उन पर कोई बाहरी दबाव बनाया गया?
क्या सुसाइड नोट असली है या कहानी को मोड़ने की कोशिश?
नगर थाना पुलिस हर पहलू पर जांच की बात कर रही है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर यह कड़वा सच सामने ला दिया है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे युवा भी अंदर ही अंदर कितने बड़े दबाव से जूझ रहे हैं—और सिस्टम अक्सर उनकी खामोशी नहीं सुन पाता।
फिलहाल सृष्टि की मौत एक पहेली बन गई है—जिसका हर टुकड़ा दर्द, शक और सवालों से भरा है… अब देखना है कि जांच सच्चाई तक पहुंचती है या यह मामला भी फाइलों में दफन होकर रह जाएगा।

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