फर्जी IAS’ का खौफनाक खेल: पत्नी बनी अफसर, पति बना गार्ड—धार्मिक मंच से रची 35 लाख की ठगी

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मधेपुरा: बिहार के मधेपुरा में ठगी का ऐसा खतरनाक और सुनियोजित खेल उजागर हुआ है, जिसने “सिस्टम” के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े की परतें उधेड़ दी हैं। सन्नी कुमार राय (पिता– दिलीप राय), निवासी ग्राम– अगिया, थाना– पीरो, जिला– भोजपुर ने अपनी पत्नी श्रद्धांजलि देवी को फर्जी IAS अधिकारी बनाकर ऐसा जाल बुना कि लोग असली-नकली में फर्क ही नहीं कर पाए। साजिश की शुरुआत भी ऐसी जगह से हुई, जहां लोग सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं—सिंहेश्वर धाम में आयोजित शिव महापुराण कथा। वहीं से इस हाई-प्रोफाइल ठगी का खेल शुरू हुआ। लग्जरी गाड़ी पर ‘प्रधान सचिव-सह-मिशन निदेशक, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार सरकार’ का फर्जी बोर्ड, खाकी वर्दी में बॉडीगार्ड बना पति और अंदर बैठी ‘IAS’ पत्नी—पूरा सेटअप ऐसा कि सामने वाला बिना जांचे-परखे विश्वास कर ले। इसी फर्जी रसूख के दम पर सन्नी कुमार राय ने मधेपुरा के वार्ड संख्या– 9, वेस्ट बाईपास रोड निवासी ठेकेदार नारायण यादव को अपने जाल में फंसाया। बड़े-बड़े सरकारी ठेके दिलाने का सपना दिखाया गया और धीरे-धीरे 34 लाख 74 हजार रुपये उसकी जेब से निकलवा लिए गए। भरोसे का खेल तब टूटा जब महीनों बाद भी एक भी ठेका जमीन पर नहीं उतरा।
जब नारायण यादव ने अपने पैसे वापस मांगे, तो ‘अफसरशाही’ का मुखौटा उतर गया और असली चेहरा सामने आ गया। आरोपी ने गाली-गलौज करते हुए न सिर्फ मारपीट की, बल्कि पीड़ित का आईफोन छीनकर फरार हो गया। यानी ठगी के बाद दबंगई का खुला खेल। मामला थाने पहुंचा, 8 फरवरी को केस दर्ज हुआ और फिर पुलिस हरकत में आई। एसपी के निर्देश पर बनी टीम ने तकनीकी जांच के जरिए पटना के बिहटा थाना क्षेत्र के दौलतपुर बिलपटोला में दबिश देकर दोनों आरोपियों को दबोच लिया। मौके से फर्जी बोर्ड लगी कार और लूटा गया मोबाइल बरामद हुआ।
जांच में साफ हुआ कि सन्नी कुमार राय कोई नौसिखिया नहीं, बल्कि पेशेवर ठग है, जो पहले भी कई मामलों में शामिल रहा है। पत्नी को IAS बनाकर और खुद बॉडीगार्ड बनकर लोगों पर रौब झाड़ना, भरोसा जीतना और फिर ठगी करना—यही इनका ‘मॉडल’ था।
यह मामला सिर्फ 34.74 लाख की ठगी नहीं, बल्कि उस खतरनाक हकीकत का आईना है, जहां फर्जी पहचान, सरकारी नाम और धार्मिक मंच का इस्तेमाल कर आम लोगों को बेवकूफ बनाया जा रहा है। फिलहाल दोनों जेल भेजे जा चुके हैं, लेकिन सवाल अभी भी खड़ा है—आखिर ऐसे ‘फर्जी अफसर’ कितने और घूम रहे हैं?

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