नेपाल मे गिरफ्तार पूर्व PM केपी शर्मा ओली व पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को सुप्रीम कोर्ट ने दी बड़ी राहत, 9 दिन में ही टूटा केस का दम

  • नेपाल में सियासी भूकंप: गिरफ्तार पूर्व PM केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को सुप्रीम कोर्ट ने दी बड़ी राहत, 9 दिन में ही टूटा केस का दम

काठमांडू: नेपाल की राजनीति में बड़ा भूचाल तब आया जब नेपाल सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और नेपाली कांग्रेस नेता व पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को राहत देते हुए उनकी रिहाई का आदेश दे दिया। दोनों नेताओं को 28 मार्च 2026 को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन महज कुछ दिनों में ही अदालत के इस फैसले ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है। यह मामला सितंबर 2025 (भाद्र 23-24) में हुए चर्चित Gen Z प्रदर्शनों से जुड़ा है, जिसने नेपाल को झकझोर कर रख दिया था। इन प्रदर्शनों के दौरान हिंसा इतनी भयानक हो गई थी कि 77 लोगों की मौत हो गई और अरबों की संपत्ति बर्बाद हो गई। आरोप था कि हालात बिगड़ने की पहले से आशंका होने के बावजूद प्रशासन ने समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए। मामले की जांच गौरी बहादुर कार्की की अध्यक्षता वाले आयोग ने की थी। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा कि स्थिति को संभालने में गंभीर लापरवाही बरती गई और कई शीर्ष अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध रही। रिपोर्ट के आधार पर ही केपी शर्मा ओली, रमेश लेखक समेत अन्य अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की सिफारिश की गई, जिसके बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई हुई। इसी बीच, बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विनोद शर्मा और सुनिल कुमार पोखरेल की संयुक्त पीठ ने सरकार को निर्देश दिया कि दोनों नेताओं को हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है और उन्हें रिहा कर बाहर रहकर जांच में सहयोग करने दिया जाए। अदालत ने अपने आदेश में चार प्रमुख आधार गिनाए। पहला, दोनों नेता अपने माता-पिता के निधन के बाद ‘आशौच’ (शोक अवधि) में हैं, जिसे मानवीय आधार पर महत्वपूर्ण माना गया। दूसरा, केपी शर्मा ओली की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति—वे त्रिवि शिक्षण अस्पताल में विशेष चिकित्सकीय निगरानी में भर्ती हैं। तीसरा, समान प्रकृति के मामलों में अन्य आरोपियों को राहत मिल चुकी है, ऐसे में केवल इन्हें हिरासत में रखना न्यायसंगत नहीं होगा। चौथा, अदालत के अनुसार जांच के प्रमुख चरण—विशेषकर बयान—पूरे हो चुके हैं और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका भी नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी को अवैध नहीं माना गया है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में निरंतर हिरासत उचित नहीं है। साथ ही निर्देश दिया गया कि काठमांडू जिला अदालत द्वारा दी गई रिमांड अवधि, जो 7 अप्रैल 2026 (चैत्र 25, 2082) को समाप्त हो रही है, उसके बाद या उससे पहले ही आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर दोनों नेताओं को तत्काल रिहा किया जाए। गौरतलब है कि 27 मार्च 2026 (चैत्र 14, 2082) को हुई गिरफ्तारी के खिलाफ केपी शर्मा ओली की पत्नी राधिका शाक्य और रमेश लेखक की पत्नी यशोदा लेखक ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई के बाद यह अहम फैसला सामने आया। फिलहाल दोनों नेताओं को बड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। जांच जारी है और कानूनी प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी। ऐसे में यह स्पष्ट है कि नेपाल की राजनीति में यह प्रकरण आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है।

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