- बगहा में 32 साल पुराने एनकाउंटर केस में पुलिस पर कोर्ट सख्त, 11 जवानों के खिलाफ वारंट जारी
बगहा: बिहार के बगहा में 1994 के चर्चित मुठभेड़ मामले में अब अदालत ने कड़ा रुख अपना लिया है। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश (चतुर्थ) मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने एक साथ 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ वारंट जारी कर दिया है। वजह साफ है—इतने अहम केस में बार-बार तारीख पड़ने के बावजूद कोई भी पुलिसकर्मी गवाही देने कोर्ट नहीं पहुंच रहा था।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस लापरवाही पर गहरी नाराजगी जताई। अदालत ने टिप्पणी की कि जिस मामले में खुद पुलिस पर हमला हुआ था, उसी केस में पुलिसकर्मियों का गवाही देने नहीं आना बेहद गंभीर है। कोर्ट ने सभी 11 पुलिसकर्मियों को अगली तारीख पर हर हाल में उपस्थित होने का सख्त आदेश दिया है।
अपर लोक अभियोजक जितेंद्र भारती के मुताबिक, यह मामला साल 1994 का है। उस समय गोवर्धना थाना क्षेत्र में पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। टास्क फोर्स की टीम जंगल इलाके में छापेमारी के लिए निकली थी, तभी रामचंद्र चौधरी गैंग के सदस्यों ने अचानक पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी।
गैंग में केदार महतो, बिका महतो, कनैया साह, बसंत मुंडा और रामनंद महतो समेत कई अपराधी शामिल थे। जवाब में पुलिस ने भी गोलीबारी की, जिससे कुछ देर तक दोनों ओर से फायरिंग होती रही। हालांकि, बाद में सभी अपराधी मौके से फरार हो गए। घटना के बाद पुलिस ने इलाके में व्यापक तलाशी अभियान चलाया, लेकिन किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। घटनास्थल से कुछ सामान जरूर बरामद किए गए थे। अब 32 साल बाद भी केस की सुनवाई जारी है, लेकिन गवाहों के बार-बार कोर्ट में अनुपस्थित रहने से प्रक्रिया बेहद धीमी हो गई है। इसी कारण अदालत को सख्त कदम उठाते हुए वारंट जारी करना पड़ा।