- बिहार के किसानों के लिए बड़ी पहल: विशेष कृषि पैकेज की मांग, MSP खरीद पर जोर
- कृषि मंत्री राम कृपाल यादव की केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात, दलहन-तिलहन में बिहार को प्राथमिक राज्य बनाने का प्रस्ताव
पटना, संवाददाता:बिहार में कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने केंद्र के सामने बड़ा प्रस्ताव रखा है। इसी कड़ी में राज्य के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर बिहार के लिए विशेष कृषि पैकेज की मांग की है। इस दौरान उन्होंने कृषि विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करते हुए एक मांग पत्र भी सौंपा।
बैठक में कृषि मंत्री ने चना, सरसों सहित अन्य प्रमुख फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद जल्द शुरू करने की जरूरत पर बल दिया। उनका कहना था कि MSP पर प्रभावी खरीद व्यवस्था लागू होने से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सकेगा और बिचौलियों की भूमिका कम होगी।
इसके साथ ही, उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि बिहार को दलहन और तिलहन उत्पादन के लिए प्राथमिक राज्य घोषित किया जाए। उनका तर्क था कि राज्य की जलवायु और मिट्टी इन फसलों के लिए अनुकूल है, जिससे देश में दाल और तेलहन की कमी को दूर करने में बिहार महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
केंद्र सरकार की ओर से इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख दिखाया गया है। केंद्रीय मंत्री ने बिहार को विशेष कृषि पैकेज देने का आश्वासन दिया, जिससे राज्य में कृषि अवसंरचना, सिंचाई, भंडारण और विपणन व्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। इधर, राज्य सरकार ने अपनी उपलब्धियों का जिक्र करते हुए बताया कि बिहार में अब तक 47 लाख से अधिक किसानों का Farmer ID तैयार किया जा चुका है। इससे किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से मिल सकेगा। इसके अलावा, रबी सीजन को देखते हुए खाद की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने का भी दावा किया गया है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि केंद्र द्वारा प्रस्तावित विशेष पैकेज को मंजूरी मिलती है, तो इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि राज्य की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी। MSP पर खरीद, दलहन-तिलहन को बढ़ावा और बेहतर संसाधनों की उपलब्धता से बिहार कृषि उत्पादन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकता है।
- संभावित प्रभाव:
किसानों को फसलों का उचित मूल्य मिलने की संभावना
दलहन-तिलहन उत्पादन में वृद्धि
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती
कृषि क्षेत्र में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
कुल मिलाकर, यह पहल बिहार के कृषि क्षेत्र के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है, बशर्ते केंद्र सरकार जल्द ठोस कदम उठाए।