- सुगौली में पुलिस चेकपोस्ट की दुर्दशा! सड़क किनारे गड्ढे में फेंके मिले सरकारी सामान, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
- तत्कालीन एसपी कांतेय मिश्रा के निर्देश पर बना था चेकपोस्ट, जिला परिषद ने कराया था भवन निर्माण; मेला में पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगने के दौरान सामान को धकेले जाने की थानाध्यक्ष ने कही बात, बोले- कल करा लिया जाएगा दुरुस्त
सुगौली। सरकारी संसाधनों से भवन बना, पुलिस चेकपोस्ट स्थापित हुआ और व्यवस्था को मजबूत करने की उम्मीद जगी, लेकिन आज उसी चेकपोस्ट से जुड़े सामान सड़क किनारे बिखरे पड़े हैं। पूर्वी चंपारण जिले के सुगौली थाना क्षेत्र अंतर्गत छपवा-बेतिया मुख्य मार्ग पर फुलवरिया गांव के समीप की यह स्थिति पुलिस चेकपोस्ट की व्यवस्था, सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। चेकपोस्ट के होर्डिंग, बोर्डिंग, ड्रम सहित अन्य सामान सड़क किनारे फेंके पड़े हैं। जिस जगह पुलिस की मौजूदगी और निगरानी की व्यवस्था होनी चाहिए थी, वहां बिखरे सामान बदहाली की कहानी बयां कर रहे हैं। बताया जाता है कि तत्कालीन एसपी कांतेय कुमार मिश्रा के निर्देश पर फुलवरिया के समीप इस चेकपोस्ट की स्थापना की गयी थी। इसके लिए जिला परिषद की ओर से भवन का निर्माण कराया गया था। चेकपोस्ट बनाने के पीछे मुख्य मार्ग पर पुलिस निगरानी को मजबूत करने और सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने का उद्देश्य था। लेकिन वर्तमान में चेकपोस्ट से जुड़े सामान की स्थिति देखकर यह सवाल उठना लाजिमी है कि सरकारी संसाधनों की सुरक्षा के लिए आखिर क्या व्यवस्था की गयी थी।
- मेला में ड्यूटी, इधर चेकपोस्ट के सामान की सुरक्षा पर सवाल
चेकपोस्ट के सामान सड़क किनारे फेंके जाने के मामले में सुगौली थानाध्यक्ष अनीश कुमार सिंह ने बताया कि चेकपोस्ट पर तैनात पुलिसकर्मियों की ड्यूटी मेला में लगा दी गयी थी। इसी दौरान किसी असामाजिक तत्व द्वारा सामान को सड़क किनारे धकेल दिया गया। थानाध्यक्ष ने आश्वासन दिया कि अगले दिन चेकपोस्ट के सामान को ठीक करा लिया जाएगा। थानाध्यक्ष के बयान के बाद अब सवाल यह है कि जब चेकपोस्ट पर तैनात कर्मियों की ड्यूटी दूसरी जगह लगा दी गयी, तब वहां मौजूद सरकारी सामान की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसके पास थी? क्या कर्मियों की अनुपस्थिति में सामान की निगरानी के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गयी थी? यदि किसी असामाजिक तत्व ने सामान को धकेला, तो इस घटना की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की जरूरत भी है। हालांकि, सामान को असामाजिक तत्वों द्वारा धकेले जाने की बात थानाध्यक्ष ने कही है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
- सरकारी धन से निर्माण, फिर संसाधनों की ऐसी दुर्दशा क्यों?
चेकपोस्ट के लिए जिला परिषद की ओर से भवन का निर्माण कराया गया था। इसके संचालन और व्यवस्था में भी सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल हुआ। ऐसे में चेकपोस्ट से जुड़े सामान का सड़क किनारे गड्ढे में बिखरा मिलना केवल अव्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति के रखरखाव से जुड़ा महत्वपूर्ण सवाल है। सरकारी धन से तैयार भवन और व्यवस्था का लाभ तभी मिल सकता है, जब उनका नियमित उपयोग, निगरानी और रखरखाव सुनिश्चित हो। यदि चेकपोस्ट पर पुलिसकर्मियों की तैनाती अस्थायी रूप से हटायी गयी थी, तो सामान को सुरक्षित रखने की व्यवस्था क्यों नहीं की गयी? यदि चेकपोस्ट फिलहाल नियमित रूप से संचालित नहीं हो रहा है, तो इसकी स्थिति स्पष्ट करते हुए भवन और अन्य संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। आखिर सरकारी संपत्ति को इस तरह असुरक्षित छोड़ने की नौबत क्यों आयी, इसका जवाब संबंधित व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों को देना चाहिए।
- मुख्य मार्ग के किनारे बिखरे सामान, व्यवस्था सुधारने की जरूरत
छपवा-बेतिया मुख्य मार्ग क्षेत्र का महत्वपूर्ण सड़क मार्ग है। ऐसे में फुलवरिया के समीप चेकपोस्ट से जुड़े सामान का सड़क किनारे बिखरा रहना व्यवस्था की बदहाली को उजागर करता है। चेकपोस्ट का उद्देश्य पुलिस निगरानी को मजबूत करना था, लेकिन उसकी मौजूदा स्थिति अब रखरखाव और जवाबदेही पर चर्चा का विषय बन गयी है। थानाध्यक्ष अनीश कुमार सिंह ने सामान को अगले दिन दुरुस्त कराने का आश्वासन दिया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस प्रशासन अपने आश्वासन को कितनी जल्दी पूरा करता है। केवल सामान को व्यवस्थित कर देना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो, इसके लिए निगरानी और सुरक्षा की ठोस व्यवस्था भी जरूरी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस चेकपोस्ट को पुलिस निगरानी मजबूत करने के लिए बनाया गया था, वहां सरकारी सामान की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी थी? अब जरूरत है कि चेकपोस्ट की मौजूदा स्थिति की समीक्षा हो, सामान को सुरक्षित किया जाए और जिम्मेदारी तय कर व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए, ताकि सरकारी संसाधन यूं ही बर्बादी की भेंट न चढ़ें।