- बाढ़ पीड़ितों के सामने पिस्टल, वीडियो वायरल होते ही मकेर थानाध्यक्ष निलंबित
- राहत लेने पहुंचे लोगों के बीच हथियार लहराने का वीडियो वायरल, सारण एसएसपी ने लिया संज्ञान; विभागीय कार्रवाई शुरू
सारण/मकेर। बाढ़ की विभीषिका झेल रहे लोगों को राहत और सुरक्षा देने की जिम्मेदारी जिस पुलिस पर है, उसी पुलिस के एक अधिकारी का बाढ़ पीड़ितों के सामने पिस्टल निकालने का वीडियो सामने आने से सारण पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मकेर थाना क्षेत्र में राहत सामग्री वितरण के दौरान मकेर थानाध्यक्ष पुलिस अवर निरीक्षक संग्राम कुमार सिंह का कथित तौर पर लोगों की ओर पिस्टल तानने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। मामला सामने आते ही सारण के वरीय पुलिस अधीक्षक रौशन कुमार ने गंभीरता से संज्ञान लेते हुए थानाध्यक्ष को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। घटना मकेर थाना क्षेत्र के पुरुषोत्तमपुर गांव से जुड़ी बतायी जा रही है। यहां बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच राहत सामग्री का वितरण किया जा रहा था। राहत पाने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे थे। इसी दौरान भीड़ और पुलिस के बीच किसी बात को लेकर स्थिति तनावपूर्ण होने की बात सामने आयी है। इसी दौरान बनाए गये वीडियो में थानाध्यक्ष संग्राम कुमार सिंह पिस्टल निकालते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो में उनका हथियार भीड़ की दिशा में दिखाई देता है। हालांकि, घटनास्थल की पूरी परिस्थिति और विवाद की शुरुआत किस वजह से हुई, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
वीडियो ने खड़े किये कई गंभीर सवाल
बाढ़ जैसी आपदा में राहत सामग्री के लिए परेशान लोगों के बीच पुलिस अधिकारी के हाथ में पिस्टल का वीडियो सामने आने से कई सवाल खड़े हो गये हैं। राहत केंद्र पर पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी भीड़ को नियंत्रित करना, लोगों को सुरक्षित रखना और राहत वितरण की व्यवस्था बनाए रखना होती है। ऐसे में किसी पुलिस अधिकारी द्वारा हथियार निकालने की स्थिति क्यों बनी, यह जांच का महत्वपूर्ण बिंदु होगा। वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले घटनाक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर भी तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आयीं। वीडियो के आधार पर लोग पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाने लगे। मामला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा, जिसके बाद विभाग ने तत्काल कार्रवाई की।
प्रथमदृष्टया आचरण को माना गया गंभीर
पुलिस विभाग की ओर से की गयी कार्रवाई में वायरल वीडियो के प्रथमदृष्टया अवलोकन को आधार बनाया गया। विभाग ने थानाध्यक्ष के आचरण को कर्तव्य के प्रति लापरवाही, अनुशासनहीनता और मनमानेपन से जुड़ा माना। इसके बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय पुलिस केंद्र निर्धारित किया गया है और उन्हें विभागीय नियमों के तहत निर्धारित भत्ता मिलेगा। हालांकि, निलंबन के बाद भी मामले की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही सामने आयेगी। यह भी जांच का विषय होगा कि राहत वितरण के दौरान मौके पर वास्तविक स्थिति क्या थी, भीड़ का व्यवहार कैसा था और थानाध्यक्ष ने किन परिस्थितियों में पिस्टल निकाली।
बाढ़ पीड़ितों के बीच पुलिस के रवैये पर बहस
आपदा के समय प्रशासन और पुलिस से लोगों को सबसे अधिक सहयोग और संवेदनशीलता की अपेक्षा होती है। बाढ़ प्रभावित परिवार पहले ही घर, रोजमर्रा की जरूरतों और सुरक्षित ठिकाने को लेकर परेशान हैं। ऐसे समय में राहत वितरण स्थल पर तनाव की स्थिति उत्पन्न होना प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती है। भीड़ को नियंत्रित करना जरूरी है, लेकिन पुलिस की कार्रवाई किस तरीके से हो, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है। मकेर की घटना ने इसी सवाल को फिर सामने ला दिया है कि आपदा राहत के दौरान पुलिस और प्रशासन किस तरह लोगों के साथ समन्वय बनाकर काम कर रहे हैं। यदि राहत वितरण में अव्यवस्था या भीड़ के कारण तनाव की स्थिति बनी थी, तो उसे नियंत्रित करने के लिए अपनायी गयी प्रक्रिया की भी समीक्षा जरूरी है।
अब जांच पर टिकी नजर
फिलहाल वायरल वीडियो के आधार पर विभागीय कार्रवाई हो चुकी है और मकेर थानाध्यक्ष संग्राम कुमार सिंह निलंबित हैं। अब विभागीय जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि घटनास्थल पर पूरा घटनाक्रम क्या था और पिस्टल निकालने की वास्तविक वजह क्या रही। जांच में मौके पर मौजूद लोगों और पुलिसकर्मियों के बयान तथा वीडियो फुटेज अहम साक्ष्य साबित हो सकते हैं। बाढ़ के संकट के बीच सामने आये इस मामले ने पुलिस की जवाबदेही और आपदा के दौरान संवेदनशील पुलिसिंग को लेकर बड़ा सवाल खड़ा किया है। राहत लेने पहुंचे लोगों के बीच पिस्टल क्यों निकली—इसका जवाब अब विभागीय जांच से सामने आने की उम्मीद है।
