शराब तस्कर के साथ केक, अब पुलिस वालों की कुर्सी गई! पिपरा थानाध्यक्ष समेत दो निलंबित
मोतिहारी। शराबबंदी वाले बिहार में कानून लागू कराने की जिम्मेदारी संभालने वाले पुलिसकर्मी ही अगर शराब तस्करी के आरोपी के साथ केक काटते और खिलाते नजर आएं तो सवाल उठना लाजिमी है। मोतिहारी में वायरल हुई ऐसी ही तस्वीर ने पुलिस महकमे की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला सामने आते ही पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्राभात ने कड़ा रुख अपनाते हुए पिपरा थानाध्यक्ष सतीश कुमार और पुलिस पदाधिकारी विपिन कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया हैम बताया गया है कि सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर एक फोटो वायरल हुई थी। फोटो में पिपरा थानाध्यक्ष पुअनि/684 सतीश कुमार और पुअनि/685 विपिन कुमार शराब तस्करी के आरोपी बिंदु कुमार, पिता दिनेश कुमार मिश्रा, निवासी महरानी, थाना पिपरा के साथ केक खिलाते हुए नजर आ रहे थे। तस्वीर ने पुलिस की कार्रवाई और शराब तस्कर से कथित नजदीकी के बीच बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। मामला तब और गंभीर हो गया जब पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई कि बिंदु कुमार के खिलाफ पहले से शराब तस्करी के मामले दर्ज हैं। उसके विरुद्ध पिपरा थाना कांड संख्या 304/24 तथा गोपालगंज उत्पाद थाना कांड संख्या 167/20 दर्ज होने की बात सामने आई। यानी जिस व्यक्ति के खिलाफ शराब तस्करी से जुड़े मामले दर्ज हैं, उसी के साथ पुलिस पदाधिकारियों की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई। तस्वीर में पुलिस पदाधिकारियों की मौजूदगी और आरोपी के साथ उनकी कथित आत्मीयता ने पुलिस की कार्यशैली पर सवालों की बौछार कर दी।
शराब तस्कर के साथ ऐसी नजदीकी क्यों?
शराबबंदी कानून को लेकर पुलिस लगातार कार्रवाई का दावा करती रही है। शराब की खेप पकड़ी जाती है, तस्करों को गिरफ्तार किया जाता है और पुलिस की ओर से शराब के खिलाफ अभियान चलाने की बातें सामने आती हैं। लेकिन दूसरी तरफ वायरल तस्वीर में शराब तस्करी के आरोपी के साथ पुलिस पदाधिकारियों का इस तरह नजर आना विभाग के लिए असहज करने वाला सवाल बन गया। आखिर पुलिस पदाधिकारी आरोपी के साथ किस परिस्थिति में समारोह में शामिल हुए? क्या उन्हें उसके आपराधिक इतिहास की जानकारी थी? यदि जानकारी थी तो फिर उससे ऐसी नजदीकी क्यों? और यदि जानकारी नहीं थी तो एक थानाध्यक्ष स्तर के अधिकारी की अपने थाना क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति के बारे में जानकारी का सवाल भी उठता है।विभाग ने इस आचरण को गंभीर मानते हुए कार्रवाई की है।
पुलिस की छवि पर पड़ी चोट
पुलिस ने माना है कि इस तरह के कृत्य से शराब तस्करों के मनोबल में वृद्धि हो सकती है। साथ ही आमजन में पुलिस के प्रति अविश्वास और असंतोष पैदा होने की स्थिति बन सकती है। विभाग ने दोनों अधिकारियों के आचरण को पुलिस आचरण एवं विभागीय नियमों के प्रतिकूल माना है। इसके बाद प्रशासनिक दृष्टिकोण से दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीर को विभाग ने महज एक सामान्य फोटो मानकर नजरअंदाज नहीं किया। पुलिस की वर्दी और शराब तस्करी के आरोपी के बीच वायरल हुई यह तस्वीर अब विभागीय कार्रवाई तक पहुंच चुकी है। अब निगाह इस बात पर है कि आगे होने वाली विभागीय जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और इस पूरे प्रकरण की जिम्मेदारी कितनी दूर तक तय होती है। फिलहाल एक तस्वीर ने पिपरा पुलिस की कार्यशैली पर ऐसा सवाल खड़ा किया है, जिसका जवाब निलंबन से आगे की जांच में तलाशा जाना बाकी है।
