सुगौली में मनरेगा राशि निकासी के आरोप पर डीएम सख्त, तीन दिन में मांगी जांच रिपोर्ट

  • सुगौली में मनरेगा राशि निकासी के आरोप पर डीएम सख्त, तीन दिन में मांगी जांच रिपोर्ट

 

मोतिहारी। जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव ने गुरुवार को अपने कार्यालय कक्ष में द्वितीय अपील के तहत 10 मामलों की सुनवाई की। इस दौरान परिवादी कार्यालय कक्ष में मौजूद रहे, जबकि संबंधित लोक प्राधिकार ऑनलाइन माध्यम से सुनवाई में जुड़े। डीएम ने सभी मामलों में संबंधित अधिकारियों से स्थिति की जानकारी लेते हुए समय-सीमा के भीतर जांच और कार्रवाई का निर्देश दिया। आदापुर अंचल के सहदेव ठाकुर ने बंदोबस्ती परवाना में पर्चे का खेसरा गलत दर्ज होने की शिकायत की थी। डीएम ने अंचल अधिकारी आदापुर को पांच दिनों के अंदर अनुमंडल पदाधिकारी के कार्यालय जाकर अभिलेख में आवश्यक सुधार कराने और परिवादी को सही पर्चा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। कार्रवाई से संबंधित रिपोर्ट द्वितीय अपील कार्यालय को भेजने को भी कहा गया। रामगढ़वा अंचल के अखिलेश्वर प्रसाद यादव की शिकायत रास्ते पर अतिक्रमण से जुड़ी थी। डीएम ने अंचल अधिकारी को मामले की गंभीरता से जांच कर रास्ते को अतिक्रमणमुक्त कराने और आवागमन योग्य बनाने का निर्देश दिया। सदर अंचल मोतिहारी के सुनील कुमार कुशवाहा ने खटियानी जमीन पर कथित रूप से जबरन सड़क बनाए जाने की शिकायत की। इस मामले में डीएम ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बीडीओ से जानकारी ली। बीडीओ ने बताया कि सड़क पंचायत की योजना से बनी है और जांच भी करायी गयी है। डीएम ने सदर एसडीओ को दोबारा नापी कराकर मामले की जांच कराने का निर्देश दिया। सदर अंचल के नरेश प्रसाद ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर मौजा स्थानांतरण की शिकायत की थी। डीसीएलआर ने बताया कि मामला परिमार्जन से संबंधित है और पूर्व में इसकी जांच करायी जा चुकी है। डीएम ने अपर समाहर्ता, पूर्वी चंपारण को मामले की पुनः जांच कर 10 दिनों में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। घोड़ासहन अंचल के रामाधार राय ने प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिलने की शिकायत की। उन्होंने बताया कि उनके नाम पर किसी दूसरे के घर की तस्वीर लगा दी गयी है, जिससे योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। डीएम ने बीडीओ घोड़ासहन को स्वयं स्थल पर जाकर जांच करने और रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। सुगौली प्रखंड के रामबाबू प्रसाद ने पंचायत में कराये गये कार्य में अनियमितता का आरोप लगाया। उनका कहना था कि श्रमदान से मिट्टी भराई का काम कराया गया था, लेकिन उसे मनरेगा के तहत दिखाकर राशि की निकासी कर ली गयी। डीएम ने बीडीओ सुगौली को तीन दिनों में जांच कर रिपोर्ट देने को कहा। रिपोर्ट में कार्य होने या नहीं होने और निकासी की गयी राशि का स्पष्ट उल्लेख करने का निर्देश दिया गया। संबंधित पंचायत में नल-जल योजना की भी जांच कर रिपोर्ट देने को कहा गया।

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