- 25 लाख की कथित पोस्टिंग डील का बड़ा खुलासा! SDM की शिकायत पर STF का ताबड़तोड़ एक्शन, वंदे भारत से गिरफ्तार हुआ आरोपी; मोबाइल से मिले कई IAS-IPS अधिकारियों के नंबर, अब हर कनेक्शन की होगी जांच
मोतिहारी/पटना। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले से सामने आया पोस्टिंग के नाम पर 25 लाख रुपये की कथित मांग का मामला पूरे प्रशासनिक महकमे में चर्चा का विषय बन गया है। नवपदस्थापित सदर एसडीएम अरुण पांडेय की शिकायत पर मोतिहारी साइबर थाना में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पटना एसटीएफ ने तेज कार्रवाई करते हुए आरोपी राजन जायसवाल को मोकामा के पास वंदे भारत एक्सप्रेस से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को मोतिहारी पुलिस के हवाले कर दिया गया, जहां उससे पूछताछ जारी है। शिकायत के अनुसार, सदर एसडीएम के पद पर पदस्थापन से पहले और बाद में आरोपी लगातार संपर्क करता रहा। आरोप है कि 12 जुलाई 2026 को पदस्थापन के बाद उसने मोबाइल नंबर 9708933777 से फोन कर 25 लाख रुपये की मांग की और कहा कि यदि पैसे नहीं दिए गए तो पोस्टिंग स्थगित करा दी जाएगी। शिकायत को गंभीर मानते हुए मोतिहारी साइबर थाना ने प्राथमिकी दर्ज की और तत्काल पटना एसटीएफ को सूचना दी। इसके बाद विशेष अभियान चलाकर आरोपी को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी के मोबाइल फोन, डिजिटल डेटा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में मोबाइल से कई आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के निजी मोबाइल नंबर मिलने की बात सामने आई है। इसके बाद जांच एजेंसियों ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड, चैट हिस्ट्री, संपर्क सूची, बैंक खातों और डिजिटल लेन-देन की पड़ताल शुरू कर दी है। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन संपर्कों की प्रकृति क्या थी और क्या आरोपी प्रभाव का दावा कर लोगों से संपर्क करता था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। यह भी देखा जा रहा है कि क्या आरोपी ने अन्य अधिकारियों या कर्मचारियों से भी इसी प्रकार संपर्क किया था। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके विरुद्ध भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। मामला सामने आने के बाद विभिन्न स्तरों पर चर्चाएं जरूर हो रही हैं, लेकिन अब तक किसी भी आईएएस, आईपीएस अधिकारी या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस का स्पष्ट रुख है कि केवल मोबाइल में किसी का नंबर होना अपने आप में किसी व्यक्ति की भूमिका सिद्ध नहीं करता। जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा। अब पूरे बिहार की नजर इस जांच पर है। यदि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, कॉल रिकॉर्ड और पूछताछ से नई जानकारियां सामने आती हैं, तो यह मामला और भी बड़े खुलासों की ओर बढ़ सकता है। फिलहाल पुलिस साक्ष्य जुटाने और प्रत्येक तथ्य का सत्यापन करने में लगी हुई है।