मोतिहारी में गरीब युवक को बनाया फर्जी पुलिस जवान, स्टेशन पर दो दिन की ड्यूटी के बाद खुला राज

  • गरीब युवक को बनाया फर्जी पुलिस जवान, स्टेशन पर दो दिन की ड्यूटी के बाद खुला राज

 

मोतिहारी। पूर्वी चंपारण में बिहार पुलिस की फर्जी नियुक्ति का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। नौकरी की तलाश में भटक रहे एक गरीब युवक को कथित दलालों ने ऐसा झांसा दिया कि वह खुद को बिहार पुलिस का वास्तविक जवान समझ बैठा। उसे फर्जी नियुक्ति पत्र, फर्जी पहचान पत्र (आईडी कार्ड) और पुलिस की वर्दी उपलब्ध कराकर मोतिहारी रेलवे स्टेशन पर ड्यूटी के लिए भेज दिया गया। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि युवक लगातार दो दिनों तक स्टेशन परिसर में पुलिसकर्मी बनकर ड्यूटी करता रहा, लेकिन किसी को इसकी भनक नहीं लगी। मामला तब खुला जब स्टेशन पर मौजूद लोगों को उसके कामकाज और व्यवहार पर संदेह हुआ। गिरफ्तार युवक की पहचान पूर्वी चंपारण जिले के राजेपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत इस्माइला गांव निवासी शंभू राम के पुत्र पवन कुमार के रूप में हुई है। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि पवन कुमार रोजगार की तलाश में भटक रहा था। इसी दौरान कुछ लोगों ने उसे बिहार पुलिस में नौकरी दिलाने का भरोसा दिलाया। कथित दलालों ने उससे संपर्क कर फर्जी नियुक्ति पत्र और पहचान पत्र तैयार कर दिया तथा उसे पुलिस की वर्दी पहनाकर मोतिहारी रेलवे स्टेशन पर ड्यूटी करने भेज दिया। युवक को यह विश्वास दिलाया गया कि उसकी नियुक्ति पूरी तरह वैध है। स्टेशन पर ड्यूटी के दौरान लोगों को उसकी कार्यशैली, बातचीत और पुलिस प्रक्रिया की जानकारी को लेकर संदेह हुआ। इसके बाद स्थानीय लोगों ने नगर थाना पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही नगर थानाध्यक्ष राजीव रंजन के निर्देश पर अपर थानाध्यक्ष सौरभ कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पूछताछ के दौरान युवक संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। उसके पास मौजूद नियुक्ति पत्र और पहचान पत्र की जांच की गई तो दस्तावेज संदिग्ध पाए गए। इसके बाद उसे हिरासत में लेकर नगर थाना लाया गया। पूछताछ में पुलिस को फर्जी भर्ती गिरोह के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। युवक के बयान के आधार पर पुलिस अब उन लोगों की तलाश में जुट गई है जिन्होंने फर्जी नियुक्ति का पूरा खेल रचा। मामले की सूचना वरीय अधिकारियों को दी गई, जिसके बाद जांच का दायरा और बढ़ा दिया गया। पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने बताया कि मामला अत्यंत गंभीर है। प्रथम दृष्टया यह फर्जी नियुक्ति, जालसाजी, कूटरचना और पुलिस विभाग के नाम पर धोखाधड़ी का मामला प्रतीत होता है। उन्होंने अधिकारियों को पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने का निर्देश दिया है। एसपी ने कहा कि यह पता लगाया जा रहा है कि फर्जी नियुक्ति पत्र, आईडी कार्ड और वर्दी की व्यवस्था किसने की, इस गिरोह में कितने लोग शामिल हैं तथा अब तक कितने बेरोजगार युवकों को इसी तरह ठगी का शिकार बनाया गया है। गिरफ्तार युवक की निशानदेही पर पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि कहीं यह गिरोह बिहार के अन्य जिलों में भी फर्जी बहाली के नाम पर युवाओं से लाखों रुपये की ठगी तो नहीं कर रहा था। पुलिस का कहना है कि गिरोह से जुड़े सभी लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर बेरोजगारी का फायदा उठाकर युवाओं को सरकारी नौकरी का झांसा देने वाले संगठित गिरोहों की सक्रियता को उजागर कर दिया है। पुलिस लोगों से अपील कर रही है कि किसी भी सरकारी नौकरी के नाम पर दलालों के झांसे में न आएं और केवल आधिकारिक प्रक्रिया के माध्यम से ही नियुक्ति पर भरोसा करें। साथ ही, यदि किसी को इस तरह के गिरोह की जानकारी मिले तो तत्काल पुलिस को सूचना दें।

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