नेपाल की बाढ़ चेतावनी के बीच कोसी बराज पर मेंटेनेंस का खेल! उफनती कोसी, बढ़ता जलस्तर और 20 करोड़ के काम पर उठे गंभीर सवाल

  • नेपाल की बाढ़ चेतावनी के बीच कोसी बराज पर मेंटेनेंस का खेल! उफनती कोसी, बढ़ता जलस्तर और 20 करोड़ के काम पर उठे गंभीर सवाल
  • “उफनती कोसी पर 20 करोड़ का प्रयोग! नेपाल की बाढ़ चेतावनी के बीच बराज के फाटकों पर काम, लाखों लोगों की सांसें अटकीं”

वीरपुर (सुपौल)। एक ओर नेपाल सरकार भारी बारिश और फ्लैश फ्लड की चेतावनी जारी कर रही है, दूसरी ओर बिहार की जीवनरेखा मानी जाने वाली कोसी नदी पर बने ऐतिहासिक कोसी बराज के फाटकों पर रंग-रोगन और मेंटेनेंस का काम जारी है। बराज के 56 फाटकों पर चल रहे इस कार्य ने न केवल स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लाखों लोगों के बीच भय और आशंका का माहौल भी पैदा कर दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि जब नेपाल के पहाड़ों में मूसलाधार बारिश की संभावना जताई जा रही है और कोसी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, तब आखिर किस आधार पर पीक मानसून सीजन में बराज के फाटकों पर मेंटेनेंस कराया जा रहा है? कोसी नदी को बिहार का “शोक” कहा जाता है। यह वही नदी है जिसने वर्षों से उत्तर बिहार के कई जिलों को तबाह किया है। सुपौल, सहरसा, मधेपुरा और खगड़िया जैसे जिले हर वर्ष कोसी के रौद्र रूप का सामना करते हैं। ऐसे में नेपाल सरकार के जल एवं मौसम विज्ञान विभाग द्वारा 30 जून और 1 जुलाई को अत्यधिक वर्षा तथा फ्लैश फ्लड की चेतावनी जारी किए जाने के बाद लोगों की चिंताएं स्वाभाविक रूप से बढ़ गई हैं। नेपाल में होने वाली भारी बारिश का सीधा असर बिहार में कोसी के जलस्तर पर पड़ता है, क्योंकि नदी का उद्गम स्थल नेपाल के पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित है। इसी बीच कोसी बराज के फाटकों पर चल रहा रखरखाव कार्य चर्चा का विषय बन गया है। जानकारी के अनुसार बराज के 56 फाटकों के रखरखाव, मरम्मत, सैंड ब्लास्टिंग, रंग-रोगन और अन्य यांत्रिक कार्यों का पांच वर्षीय ठेका लगभग 20 करोड़ 60 लाख रुपये की लागत से दिया गया है। वर्तमान में फाटकों पर सैंड ब्लास्टिंग, प्राइमर कोटिंग और पेंटिंग का कार्य चल रहा है। इस दौरान भारी मात्रा में निर्माण सामग्री, मशीनरी और उपकरण बराज पुल पर रखे गए हैं, जिससे पुल का एक बड़ा हिस्सा प्रभावित हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस समय बराज के सभी फाटकों को चौबीसों घंटे पूरी तरह सतर्क और संचालन योग्य स्थिति में रहना चाहिए, उसी समय उन पर काम कराया जाना समझ से परे है। लोगों का आरोप है कि बराज पर रखी गई सामग्री के कारण पुल की चौड़ाई कम हो गई है और कई बार जाम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। यह पुल केवल एक स्थानीय संपर्क मार्ग नहीं, बल्कि बिहार और नेपाल को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है। राष्ट्रीय राजमार्ग-57 का हिस्सा होने के कारण प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन, मालवाहक ट्रक, बसें और निजी वाहन इसी मार्ग से गुजरते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की बाधा न केवल यातायात को प्रभावित करती है बल्कि आपदा की स्थिति में राहत और बचाव कार्यों में भी परेशानी पैदा कर सकती है। उधर कोसी नदी का जलस्तर लगातार ऊपर जा रहा है। सोमवार सुबह आठ बजे कोसी बराज पर 85 हजार 830 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया, जिसके लिए नौ फाटक खोले गए। इससे पहले 22 जून को नदी का जलप्रवाह बढ़कर 1 लाख 86 हजार 385 क्यूसेक तक पहुंच गया था और तब 22 फाटक खोलने पड़े थे। नेपाल के बराहक्षेत्र में भी इस सीजन में जलप्रवाह 1 लाख 23 हजार क्यूसेक तक पहुंच चुका है। जल संसाधन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि कोसी नदी का स्वभाव अत्यंत अनिश्चित है और पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक होने वाली बारिश के कारण कुछ घंटों के भीतर जलस्तर कई गुना तक बढ़ सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले वर्षों का रिकॉर्ड यह साबित करता है कि कोसी कभी भी विकराल रूप धारण कर सकती है। वर्ष 2024 में कोसी का अधिकतम डिस्चार्ज 6.61 लाख क्यूसेक तक पहुंचा था, जबकि वर्ष 2025 में यह आंकड़ा 5.34 लाख क्यूसेक तक दर्ज किया गया। ऐसे में यदि अचानक भारी बारिश होती है और नदी में पानी का दबाव तेजी से बढ़ता है, तो बराज के सभी फाटकों का पूरी तरह कार्यशील होना बेहद आवश्यक हो जाता है। तटबंध के भीतर रहने वाले ग्रामीणों का कहना है कि बराज के फाटकों का रखरखाव कार्य अक्टूबर से मार्च के बीच कराया जाना चाहिए था, जब नदी अपेक्षाकृत शांत रहती है और जलस्तर सामान्य होता है। उनका तर्क है कि जून से सितंबर तक का समय बाढ़ और मानसून का चरम काल माना जाता है। ऐसे समय में किसी भी प्रकार का तकनीकी कार्य जोखिम बढ़ा सकता है। लोगों को आशंका है कि यदि बाढ़ के दौरान किसी फाटक में तकनीकी खराबी आ गई, संचालन में बाधा उत्पन्न हुई या समय पर फाटक नहीं खुल पाया, तो इसका खामियाजा लाखों लोगों को भुगतना पड़ सकता है। ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया है कि जब नेपाल से लगातार बाढ़ की चेतावनी जारी हो रही है, तब क्या विभाग ने किसी विशेष आपदा प्रबंधन योजना के तहत यह कार्य शुरू किया है? यदि अचानक नदी का जलप्रवाह कई लाख क्यूसेक तक पहुंच जाता है, तो क्या चल रहे मेंटेनेंस कार्य का फाटकों के संचालन पर कोई असर नहीं पड़ेगा? इन सवालों का जवाब जानने के लिए लोग प्रशासन और जल संसाधन विभाग की ओर देख रहे हैं। हालांकि विभाग इस पूरे मामले में खुद को पूरी तरह तैयार बता रहा है। यांत्रिक प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता अंकित कुमार का कहना है कि निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार कुछ कार्य बाढ़ अवधि में भी किए जा सकते हैं। उनके अनुसार यदि नहरों का संचालन नहीं हो रहा हो तो सैंड ब्लास्टिंग और अन्य यांत्रिक कार्य किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि लगातार बारिश होने की स्थिति में पेंटिंग कार्य रोक दिया जाता है तथा सुरक्षा मानकों का पूरा पालन किया जाता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बाढ़ के दौरान पूरी पेंटिंग प्रक्रिया को पूरा करना आसान नहीं होता और एक फाटक पर काम पूरा करने में लगभग दस दिनों का समय लगता है। लेकिन विभाग की सफाई के बावजूद लोगों की चिंता कम नहीं हुई है। कोसी क्षेत्र के लोग वर्ष 2008 की उस विभीषिका को आज भी नहीं भूले हैं जब नदी ने अपना रास्ता बदल लिया था और लाखों लोग प्रभावित हुए थे। कोसी के इतिहास को देखते हुए लोग किसी भी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहते। यही कारण है कि बराज पर चल रहे मेंटेनेंस कार्य को लेकर बहस तेज हो गई है। फिलहाल नेपाल की चेतावनी, लगातार बढ़ते जलस्तर, बराज पर जारी काम और बाढ़ की आशंकाओं के बीच पूरा कोसी क्षेत्र स्थिति पर नजर बनाए हुए है। आने वाले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। यदि नेपाल में भारी बारिश होती है और कोसी का जलस्तर तेजी से बढ़ता है, तो बराज की कार्यक्षमता और प्रशासनिक तैयारियों की असली परीक्षा भी शुरू हो जाएगी। ऐसे में यह सवाल और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि क्या पीक मानसून के बीच कोसी बराज पर चल रहा मेंटेनेंस कार्य एक सामान्य प्रक्रिया है, या फिर यह ऐसा जोखिम है जिसकी कीमत लाखों लोगों को चुकानी पड़ सकती है।

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