खाद लेने के लिए अब कई स्तरों की जांच, मोतिहारी में किसान पंजीकरण, आधार, घोषणा पत्र और सत्यापन अनिवार्य

  • खाद लेने के लिए अब कई स्तरों की जांच, मोतिहारी में किसान पंजीकरण, आधार, घोषणा पत्र और सत्यापन अनिवार्य
  • उर्वरक वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव, जमीन का पूरा ब्योरा देने के बाद ही किसानों को मिलेगा खाद

मोतिहारी/छौड़ादानो/राजेश कुमार सिंह। खरीफ फसल की बुआई के बीच पूर्वी चंपारण जिले में उर्वरकों की बिक्री को लेकर कृषि विभाग ने नई और सख्त व्यवस्था लागू कर दी है। अब किसानों को खाद खरीदने के लिए सिर्फ आधार कार्ड या किसान पंजीकरण दिखाना पर्याप्त नहीं होगा। किसानों को किसान पंजीकरण, आधार कार्ड, स्व-घोषणा पत्र तथा किसान सलाहकार या कृषि समन्वयक से सत्यापित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। इसके बाद ही उन्हें निर्धारित मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा। कृषि विभाग के इस फैसले के बाद जिले के हजारों किसानों के बीच इसकी चर्चा शुरू हो गई है। विभाग का दावा है कि नई व्यवस्था से वास्तविक किसानों तक खाद की उपलब्धता सुनिश्चित होगी और कालाबाजारी, जमाखोरी तथा फर्जी खरीद पर प्रभावी रोक लगेगी। वहीं कई किसानों का मानना है कि प्रक्रिया जटिल होने से उन्हें अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

घोषणा पत्र में देनी होगी खेती और जमीन की पूरी जानकारी

नई व्यवस्था के तहत खाद लेने वाले प्रत्येक किसान को एक घोषणा पत्र भरना होगा। इस घोषणा पत्र में किसान को अपनी खेती योग्य भूमि, कुल रकबा, खाता-खेसरा संख्या, फसल का प्रकार तथा आवश्यक उर्वरक की मात्रा का उल्लेख करना होगा। किसान द्वारा दी गई जानकारी की पुष्टि स्थानीय स्तर पर की जाएगी। कृषि विभाग का मानना है कि इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित किसान वास्तव में खेती कर रहा है या नहीं और उसे कितनी मात्रा में उर्वरक की आवश्यकता है। इससे जरूरत से अधिक खाद खरीदकर भंडारण करने वालों पर भी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।

किसान सलाहकार और कृषि समन्वयक की भूमिका बढ़ी

नई व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका किसान सलाहकार और कृषि समन्वयक की होगी। किसान द्वारा भरे गए घोषणा पत्र और भूमि संबंधी विवरण का सत्यापन इन्हीं अधिकारियों द्वारा किया जाएगा। सत्यापन के बाद ही दस्तावेज वैध माने जाएंगे और किसान खाद खरीद सकेंगे। विभागीय सूत्रों के अनुसार सत्यापन प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उर्वरक का लाभ वास्तविक किसानों को मिले और किसी प्रकार की फर्जीवाड़े की संभावना समाप्त हो। पंचायत स्तर पर कार्यरत कृषि कर्मियों को इसके लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

उर्वरक दुकानदारों को भी दिए गए सख्त निर्देश

कृषि विभाग ने जिले के सभी लाइसेंसधारी उर्वरक विक्रेताओं को स्पष्ट निर्देश दिया है कि बिना सत्यापित दस्तावेजों के किसी भी किसान को खाद की बिक्री नहीं की जाए। प्रत्येक बिक्री का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और विभागीय पोर्टल पर अद्यतन करने को कहा गया है। यदि कोई दुकानदार बिना निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए खाद बेचता है या रिकॉर्ड में गड़बड़ी पाई जाती है तो उसके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर लाइसेंस निलंबन जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।

कालाबाजारी और जमाखोरी रोकना है मुख्य उद्देश्य

हर वर्ष खरीफ और रबी सीजन के दौरान खाद की मांग बढ़ने के साथ कालाबाजारी और कृत्रिम संकट की शिकायतें सामने आती रही हैं। कई बार ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जहां किसानों के नाम पर खाद खरीदकर उसे ऊंचे दामों पर बेचा गया। कृषि विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था ऐसे तत्वों पर अंकुश लगाने के लिए लागू की गई है। अधिकारियों का दावा है कि जिले में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध है और किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है। विभाग लगातार खाद की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था पर नजर बनाए हुए है।

किसानों में मिली-जुली प्रतिक्रिया

नई व्यवस्था को लेकर किसानों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। कुछ किसानों का कहना है कि इससे वास्तविक किसानों को लाभ मिलेगा और खाद की कालाबाजारी पर रोक लगेगी। वहीं कई किसानों का कहना है कि किसान सलाहकार और कृषि समन्वयक से सत्यापन कराने में समय लग सकता है, जिससे जरूरत के समय खाद प्राप्त करने में देरी हो सकती है। हालांकि कृषि विभाग का कहना है कि सत्यापन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जा रहा है ताकि किसानों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

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