हनक में चल रहा था आदापुर थाना! प्राइवेट मुंशी की दबंगई का हुआ अंत, रिश्वत कांड के बाद थानाध्यक्ष पर SP के जांच की तलवार

  • हनक में चल रहा था थाना! प्राइवेट मुंशी की दबंगई का हुआ अंत, रिश्वत कांड के बाद थानाध्यक्ष पर जांच की तलवार

मोतिहारी: पूर्वी चंपारण के आदापुर थाना में उजागर हुए रिश्वतखोरी और “प्राइवेट मुंशी राज” के मामले ने अब पूरी तरह से तूल पकड़ लिया है और हर गुजरते घंटे के साथ नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, निगरानी विभाग द्वारा प्राइवेट मुंशी इंतखाब आलम को 14 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किए जाने के बाद अब मोतिहारी के पुलिस अधीक्षक (SP) स्वर्ण प्राभात ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए डीएसपी स्तर के अधिकारी को थानाध्यक्ष की भूमिका की विस्तृत जांच का आदेश दे दिया है। यह आदेश ऐसे समय में आया है जब गिरफ्तारी के बाद लगातार यह बात सामने आ रही है कि इंतखाब आलम वर्षों से थाना के अंदर एक समानांतर व्यवस्था चलाता था और उसकी पकड़ इतनी मजबूत थी कि कई मामलों में वह थानाध्यक्ष से भी ज्यादा प्रभावशाली भूमिका में दिखता था। अब जांच का दायरा स्पष्ट रूप से बढ़ा दिया गया है और यह तय माना जा रहा है कि मामला सिर्फ एक प्राइवेट मुंशी तक सीमित नहीं रहेगा।
सूत्रों के अनुसार, डीएसपी को दिए गए जांच आदेश में विशेष रूप से यह बिंदु शामिल किए गए हैं कि आखिर किन परिस्थितियों में एक बाहरी व्यक्ति को थाना परिसर में बैठकर सरकारी कार्यों में हस्तक्षेप करने की अनुमति दी गई। यह भी जांच की जा रही है कि क्या थानाध्यक्ष पप्पू पासवान को इस पूरे खेल की जानकारी थी और अगर थी, तो उन्होंने इसे रोकने के लिए कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया। मामले का एक अहम पहलू यह भी है कि बिहार पुलिस मुख्यालय से लेकर जिला स्तर तक कई बार यह स्पष्ट निर्देश जारी किए जा चुके हैं कि किसी भी थाना में प्राइवेट व्यक्ति को आधिकारिक कार्यों में शामिल नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद आदापुर थाना में लंबे समय से एक प्राइवेट मुंशी का सक्रिय रहना, सिस्टम की गंभीर लापरवाही या संभावित मिलीभगत की ओर इशारा कर रहा है। निगरानी विभाग की टीम द्वारा की गई कार्रवाई के बाद अब इंतखाब आलम से लगातार पूछताछ जारी है। उसके मोबाइल फोन, कॉल डिटेल्स और डिजिटल रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। शुरुआती जांच में कई संदिग्ध संपर्क सामने आने की बात कही जा रही है, जिससे यह आशंका मजबूत हो रही है कि यह एक संगठित “दलाली नेटवर्क” का हिस्सा हो सकता है, जो थाना के अंदर से ही संचालित हो रहा था। स्थानीय स्तर पर मिल रही जानकारी के अनुसार, इंतखाब आलम का थाना में इतना दबदबा था कि वह पुलिसकर्मियों की ड्यूटी तक प्रभावित करता था और कई मामलों में फरियादियों को सीधे उसी के पास भेजा जाता था। केस में राहत दिलाने, धाराएं हल्की करवाने और लाइसेंस जैसे मामलों में उसकी भूमिका को लेकर लगातार चर्चाएं सामने आ रही हैं। एसपी द्वारा डीएसपी को जांच सौंपे जाने के बाद अब पूरे पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। सूत्रों का कहना है कि इस जांच के आधार पर आगे विभागीय कार्रवाई भी तय हो सकती है, जिसमें संबंधित अधिकारियों पर गाज गिरने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
यह मामला अब सिर्फ 14 हजार रुपये की रिश्वत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह थाना के अंदर चल रहे एक समानांतर सिस्टम, प्रशासनिक जवाबदेही और पुलिस व्यवस्था की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल बन चुका है। सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या इतने लंबे समय तक चल रहे इस खेल की जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों को नहीं थी, या फिर यह सब किसी स्तर पर मौन सहमति के साथ संचालित हो रहा था।
फिलहाल पूरे जिले की नजर डीएसपी स्तर की इस जांच पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि जांच की दिशा कितनी निष्पक्ष और गहराई तक जाती है, और क्या इस बार कार्रवाई सिर्फ एक प्राइवेट मुंशी तक सीमित रहती है या फिर थाना के जिम्मेदार पदों तक भी इसकी आंच पहुंचती है।

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