बिहार के सभी थानों पर अब सीधे बड़े अफसरों की नजर, 32 IPS बने जिला प्रभारी

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पटना: बिहार में पुलिसिंग व्यवस्था को पूरी तरह से बदलने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया गया है। राज्य के पुलिस महानिदेशक विनय कुमार ने 32 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को जिलों का प्रभारी और नोडल अधिकारी नियुक्त करते हुए नई मॉनिटरिंग प्रणाली लागू कर दी है। इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया है और सभी जिलों के लिए अधिकारियों की सूची भी सार्वजनिक कर दी गई है।
नई व्यवस्था के तहत अब इन वरिष्ठ अधिकारियों को मंत्रियों की तरह जिले का प्रभार दिया गया है, जिससे उनकी जवाबदेही सीधे तौर पर तय होगी। उन्हें अपने-अपने जिलों में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर नजर रखने, थानों के कामकाज की समीक्षा करने, लंबित मामलों की जांच में तेजी लाने और गंभीर मामलों में स्पीडी ट्रायल सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी दी गई है। यह कदम पुलिसिंग में पारदर्शिता लाने और मुख्यालय व जिलों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
राजधानी पटना की सुरक्षा और मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी एडीजी नैय्यर हसनैन खां को सौंपी गई है। वह पहले पटना के एसएसपी और जोनल आईजी रह चुके हैं, इसलिए उन्हें जिले की भौगोलिक और सामाजिक संरचना की गहरी समझ है। माना जा रहा है कि उनके अनुभव का सीधा फायदा राजधानी की पुलिसिंग व्यवस्था को मिलेगा।
राज्य के अन्य जिलों में भी बड़े स्तर पर अनुभवी अधिकारियों की तैनाती की गई है। गया के लिए एस रवीन्द्रण, मुजफ्फरपुर के लिए संजय कुमार, सारण और बक्सर के लिए अमित कुमार जैन, नालंदा के लिए आर मलार विजी, भोजपुर के लिए पंकज कुमार दराद, दरभंगा के लिए सुधांशु कुमार और भागलपुर के लिए एस प्रेमलता को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा एडीजी अमित लोढ़ा को लखीसराय और शेखपुरा, एडीजी संजय सिंह को सिवान और पूर्णिया, एडीजी अजिताभ कुमार को गोपालगंज और खगड़िया, डीआईजी मानवजीत सिंह ढिल्लो को रोहतास और डीआईजी हरप्रीत कौर को भभुआ का प्रभार दिया गया है। वहीं वैशाली में आईजी मनोज कुमार, मोतिहारी में डीआईजी आनंद कुमार, बेगूसराय में डीआईजी मीनू कुमारी, समस्तीपुर में एडीजी कमल किशोर सिंह, मुंगेर में एडीजी पारसनाथ और जहानाबाद-अरवल में एडीजी सुनील कुमार को तैनात किया गया है।
पुलिस मुख्यालय के अनुसार, इस नई व्यवस्था के बाद वरिष्ठ अधिकारियों की सीधी नजर थानों की कार्यशैली पर रहेगी। थानों में लंबित मामलों की समीक्षा नियमित रूप से की जाएगी और जांच प्रक्रिया को तेज किया जाएगा। खास तौर पर गंभीर आपराधिक मामलों में स्पीडी ट्रायल सुनिश्चित करने पर जोर रहेगा, ताकि पीड़ितों को जल्द न्याय मिल सके। इसके साथ ही पुलिस बल के भीतर अनुशासन को कड़ाई से लागू करने की योजना बनाई गई है। निरीक्षण के दौरान लापरवाह या बदनाम पुलिसकर्मियों की पहचान कर उन्हें तुरंत फील्ड ड्यूटी से हटाकर मुख्यालय भेजा जाएगा। सीमावर्ती जिलों में घुसपैठ, संगठित अपराध और नक्सली गतिविधियों पर भी विशेष निगरानी रखी जाएगी।
यह भी बताया जा रहा है कि डीजीपी स्तर पर यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि लंबे समय से जिलों में निरीक्षण की प्रक्रिया धीमी पड़ गई थी। अब नोडल और प्रभारी अधिकारियों की नियुक्ति के बाद नियमित निरीक्षण सुनिश्चित होगा और हर जिले की रिपोर्ट सीधे मुख्यालय तक पहुंचेगी।
नई व्यवस्था को बिहार पुलिस के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है। इससे न केवल अपराध नियंत्रण में तेजी आने की उम्मीद है, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली अधिक जवाबदेह और आम लोगों के प्रति संवेदनशील भी बनने की संभावना जताई जा रही है। आने वाले दिनों में इसका असर जमीनी स्तर पर साफ देखने को मिल सकता है।

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