- सीजफायर के बीच धमाकों की बरसात, मिडिल ईस्ट में महायुद्ध की आहट
ईरान: मिडिल ईस्ट में हालात हर घंटे बदल रहे हैं और अमेरिका–ईरान के बीच हुआ सीजफायर अब खुलकर टूटने की कगार पर पहुंच गया है। सूत्रों के मुताबिक, जमीनी स्तर पर युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं और समझौता लगातार कमजोर पड़ता जा रहा है। सीजफायर के कुछ ही घंटों बाद इज़रायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत समेत कई इलाकों पर अब तक का सबसे बड़ा हमला कर दिया, जिसमें 180 से ज्यादा लोगों की मौत और सैकड़ों घायल हो गए। यह हमला ऐसे वक्त हुआ जब अमेरिका और ईरान युद्ध विराम की घोषणा कर चुके थे, लेकिन इज़रायल ने साफ कर दिया कि उसका ऑपरेशन लेबनान में जारी रहेगा। स्थिति और बिगड़ गई जब ईरान ने जवाब में होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण कड़ा कर दिया और कई जहाजों की आवाजाही रोक दी। इससे वैश्विक तेल सप्लाई पर सीधा खतरा पैदा हो गया है। वहीं खबर यह भी है कि ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर लेबनान पर हमले नहीं रुके तो वह सीजफायर से बाहर निकल जाएगा। इसी बीच जमीनी लड़ाई और तेज हो गई है। हिज़्बुल्लाह ने उत्तरी इज़रायल पर रॉकेट दागे हैं, जिसे उसने “सीजफायर उल्लंघन” का जवाब बताया। लगातार हमलों और जवाबी कार्रवाई से पूरा क्षेत्र युद्ध की आग में धकेला जा रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने भी सख्त लहजा अपनाते हुए कहा है कि अगर ईरान ने शर्तें नहीं मानीं तो अमेरिका फिर से कार्रवाई कर सकता है, जबकि बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कहा है कि “उंगली ट्रिगर पर है” और जरूरत पड़ते ही युद्ध फिर शुरू होगा। दूसरी तरफ, पाकिस्तान की मध्यस्थता से जो 2 हफ्ते का सीजफायर हुआ था, वह अब “कागजी समझौता” बनता दिख रहा है। अलग-अलग देशों के बीच शर्तों को लेकर भ्रम है—खासतौर पर इस बात पर कि क्या लेबनान इसमें शामिल था या नहीं। यूरोप के कई बड़े देशों ने हालात को लेकर चिंता जताई है और चेतावनी दी है कि अगर यह टकराव नहीं रुका तो वैश्विक ऊर्जा संकट और बड़ी मानवीय त्रासदी सामने आ सकती है। कुल मिलाकर, ताजा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि सीजफायर सिर्फ नाम का रह गया है, जमीनी स्तर पर जंग जारी है और किसी भी वक्त यह टकराव पूरे मिडिल ईस्ट को बड़े युद्ध में झोंक सकता है।