बिहार में सत्ता का महाभूकंप! नीतीश कुमार के दिल्ली कूच की चर्चा से हिली कुर्सियां, नई सरकार में ‘कौन रहेगा, कौन जाएगा’ पर सस्पेंस चरम पर

  • बिहार में सत्ता का महाभूकंप! नीतीश कुमार के दिल्ली कूच की चर्चा से हिली कुर्सियां, नई सरकार में ‘कौन रहेगा, कौन जाएगा’ पर सस्पेंस चरम पर

पटना, बिहार। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संभावित राज्यसभा जाने की अटकलों ने बिहार की सियासत में जबरदस्त भूचाल ला दिया है। सत्ता के गलियारों में तेज हुई हलचल अब खुलकर सामने आने लगी है और राजनीतिक से लेकर प्रशासनिक महकमे तक हर स्तर पर अस्थिरता और बेचैनी साफ दिख रही है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार के भीतर बड़े पैमाने पर फेरबदल लगभग तय माना जा रहा है। नई कैबिनेट के गठन की चर्चाओं ने मौजूदा मंत्रियों की नींद उड़ा दी है। खासकर भाजपा, जदयू और लोजपा कोटे के कई मंत्रियों की कुर्सी खतरे में बताई जा रही है। कई ऐसे चेहरे हैं जिनका पत्ता कटना लगभग तय माना जा रहा है, जबकि कुछ नए चेहरों की एंट्री को लेकर जोरदार लॉबिंग शुरू हो गई है। सबसे बड़ी चर्चा नीतीश कुमार के दिल्ली शिफ्ट होने और राज्यसभा जाने को लेकर है। अगर ऐसा होता है तो बिहार की सत्ता में बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है। सत्ता के शीर्ष नेतृत्व में बदलाव के साथ ही पूरे सत्ता समीकरण के बदलने के संकेत मिल रहे हैं। राजनीतिक हलचल का सीधा असर प्रशासनिक मशीनरी पर भी पड़ा है। जिलों में तैनात डीएम-एसपी से लेकर सचिवालय के बड़े अफसर तक “वेट एंड वॉच” की स्थिति में हैं। कई आईएएस-आईपीएस अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की जुगाड़ में लग गए हैं, जबकि कुछ अधिकारी पहले से लंबित आवेदन को आगे बढ़ाने में जुटे हैं। सूत्रों के मुताबिक, सरकार के भीतर विभागों के पुनर्वितरण की रूपरेखा पर भी मंथन तेज हो गया है। कई मंत्रियों से अहम विभाग छीने जा सकते हैं, वहीं कुछ को हल्के विभाग देकर संतुलन साधने की तैयारी चल रही है। साथ ही, केंद्र से कुछ प्रभावशाली अधिकारियों की वापसी और बाहरी कैडर के अफसरों की एंट्री की भी चर्चा जोर पकड़ रही है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच नीति-निर्माण की रफ्तार धीमी पड़ गई है। बड़े फैसलों को फिलहाल टाला जा रहा है। अधिकारी और मंत्री दोनों ही किसी भी जोखिम से बचने की कोशिश में हैं, जिससे शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर असर पड़ रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर सत्ता परिवर्तन होता है तो सरकार की प्राथमिकताएं पूरी तरह बदल सकती हैं। औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और राजस्व बढ़ाने जैसे मुद्दे नई सरकार के एजेंडे में शीर्ष पर होंगे। कुल मिलाकर, बिहार में सियासी हलचल अपने चरम पर है। सत्ता परिवर्तन की आहट ने न सिर्फ सरकार बल्कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि सत्ता का चेहरा कौन होगा और किसकी कुर्सी बचेगी—लेकिन फिलहाल पूरे राज्य में सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा है—“कौन रहेगा, कौन जाएगा?”

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