मोतिहारी में बाढ़ के बीच राहत शिविर पहुंचे प्रभारी मंत्री श्रवण कुमार, पीड़ितों से पूछा- खाना, दवा और रहने में तो परेशानी नही

  • बाढ़ के बीच राहत शिविर पहुंचे प्रभारी मंत्री श्रवण कुमार, पीड़ितों से पूछा- खाना, दवा और रहने में तो परेशानी नहीं; अधिकारियों को राहत में तेजी का निर्देश

मोतिहारी/संग्रामपुर। गंडक के बढ़े जलस्तर से पूर्वी चंपारण के संग्रामपुर, अरेराज और केसरिया के निचले इलाकों में बनी बाढ़ की स्थिति के बीच बिहार सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री सह जिले के प्रभारी मंत्री श्रवण कुमार शुक्रवार अहले सुबह संग्रामपुर अंचल के बाढ़ प्रभावित डुमरिया पंचायत के बिश्रामपुर वार्ड नंबर-15 पहुंचे। उन्होंने राहत शिविर में रह रहे बाढ़ पीड़ितों से सीधे बातचीत कर वहां मिल रही सुविधाओं का फीडबैक लिया। मंत्री ने लोगों से नाश्ता-भोजन, रहने, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी सुविधाओं की जानकारी ली तथा अधिकारियों को प्रभावित परिवारों को आवश्यक सुविधाएं लगातार उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। नेपाल के तराई क्षेत्रों में बारिश और वाल्मीकिनगर बराज से गंडक में भारी जलस्राव के बाद जिले के कई निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनी है। प्रशासन की ओर से चंपारण तटबंध और अन्य रिंग बांधों की लगातार निगरानी की जा रही है। 30 सितंबर की रात से एक अक्टूबर की सुबह तक वरीय अधिकारियों ने पुलिस, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण विभाग के अभियंताओं के साथ प्रभावित क्षेत्रों में पेट्रोलिंग भी की थी। प्रशासन के अनुसार उस दौरान चंपारण तटबंध समेत अन्य रिंग बांध सुरक्षित थे।

राहत शिविर में पीड़ितों से सीधे लिया फीडबैक

बिश्रामपुर के राहत शिविर में पहुंचे प्रभारी मंत्री ने बाढ़ पीड़ितों से एक-एक कर उनकी समस्याएं जानीं। उन्होंने पूछा कि शिविर में समय पर भोजन और नाश्ता मिल रहा है या नहीं, रहने की व्यवस्था कैसी है और स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध है या नहीं। पीड़ितों से मिली जानकारी के आधार पर उन्होंने अधिकारियों को आवश्यक व्यवस्था को लगातार दुरुस्त रखने को कहा। जिले में बाढ़ राहत के लिए सामुदायिक रसोई, मेडिकल कैंप और नावों का संचालन किया जा रहा है। प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों तक भोजन, चिकित्सा और अन्य जरूरी सहायता पहुंचाने का दावा किया गया है।

स्कूल पहुंचकर पढ़ाई और मेडिकल कैंप का जायजा

इसके बाद श्रवण कुमार उत्क्रमित मध्य विद्यालय बिश्रामपुर पहुंचे। उन्होंने विद्यालय में बच्चों के पठन-पाठन की व्यवस्था देखी। बाढ़ के बीच स्कूल में लगाए गये मेडिकल कैंप का भी निरीक्षण किया। मंत्री ने कैंप में इलाज कराने पहुंची महिलाओं से बातचीत कर स्वास्थ्य सुविधाओं का फीडबैक लिया। उन्होंने चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों से उपलब्ध दवाओं, मरीजों की संख्या और इलाज की व्यवस्था के बारे में जानकारी ली। इसके बाद बच्चों के बीच किट का वितरण किया।

‘आपदा में आरोप-प्रत्यारोप नहीं, साथ खड़े होने का समय’

प्रभारी मंत्री ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जिला प्रशासन की ओर से की गयी व्यवस्था पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि बाढ़ पीड़ितों के लिए यहां अच्छी व्यवस्था की गयी है और इसके लिए जिला प्रशासन धन्यवाद का पात्र है। उन्होंने कहा कि आपदा की स्थिति में जनता, जनप्रतिनिधि और प्रशासन को मिलकर काम करना चाहिए। बाढ़ जैसी आपदा के समय एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने का समय नहीं होता। ऐसे समय में प्रभावित लोगों को तत्काल राहत पहुंचाना प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने अरेराज क्षेत्र में जनप्रतिनिधियों, प्रशासन और आम लोगों की ओर से मिलकर बाढ़ की चुनौती का सामना किये जाने को सामूहिक प्रयास और सहयोग का उदाहरण बताया।

रातभर बांधों की निगरानी, प्रशासन अलर्ट

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन की निगरानी लगातार जारी है। संग्रामपुर, अरेराज और केसरिया के प्रभावित इलाकों में अधिकारियों की तैनाती के साथ तटबंधों और रिंग बांधों की निगरानी की जा रही है। वहीं संग्रामपुर में बाढ़ प्रभावित मवेशियों के लिए भूसा वितरण और प्रभावित परिवारों के बीच पॉलिथीन शीट्स का वितरण भी किया गया है। प्रभारी मंत्री के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव, अपर समाहर्ता मुकेश कुमार सिन्हा, उप विकास आयुक्त डॉ. प्रदीप कुमार, अरेराज के अनुमंडल पदाधिकारी समेत स्थानीय प्रशासन के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। बाढ़ के बीच मंत्री के दौरे से राहत शिविरों में रह रहे लोगों की समस्याओं को प्रशासन के सामने सीधे रखने का मौका मिला। अब चुनौती राहत व्यवस्था को लगातार बनाए रखने और पानी घटने तक प्रभावित परिवारों तक भोजन, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी सुविधाएं पहुंचाते रहने की है।

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