- बिहार में बाढ़ का कहर, घर-रास्ते डूबे तो नाव पर पहुंची पढ़ाई; आज केंद्रीय टीम करेगी जायजा
पटना: बिहार में बाढ़ का संकट लगातार गहराता जा रहा है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में नदियों के बढ़ते जलस्तर और बारिश के कारण बड़ी आबादी बाढ़ की चपेट में है। करीब 50 लाख लोगों के प्रभावित होने की बात सामने आ रही है। कई गांवों और बस्तियों में पानी घुसने से लोगों की सामान्य जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई है। कहीं सड़कें डूब गई हैं तो कहीं आवागमन के लिए नाव ही एकमात्र सहारा बनी हुई है। बाढ़ के कारण लोगों को घर, बाजार, अस्पताल और स्कूल तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। कटिहार में बाढ़ की भयावह स्थिति के बीच बच्चों की पढ़ाई का एक अलग ही दृश्य सामने आया है। पानी से घिरे इलाके में बच्चे नाव पर बैठकर पढ़ाई करते नजर आए। जिन रास्तों से होकर बच्चे सामान्य दिनों में स्कूल पहुंचते थे, वहां अब पानी का कब्जा है। ऐसे में नाव ही बच्चों के लिए आवागमन का साधन और पढ़ाई की राह बन गई है। यह तस्वीर बाढ़ के बीच ग्रामीण इलाकों में शिक्षा व्यवस्था के सामने पैदा हुई चुनौती को भी सामने ला रही है। बाढ़ की गंभीर स्थिति के बीच केंद्र सरकार की टीम आज बिहार पहुंचकर प्रभावित इलाकों का जायजा लेगी। केंद्रीय टीम बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में जाकर हालात, नुकसान और राहत-बचाव व्यवस्था की जानकारी ले सकती है। बाढ़ से हुए नुकसान के आकलन के साथ प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने और जरूरी सहायता को लेकर भी स्थिति की समीक्षा की जाएगी। इधर, मौसम विभाग ने राज्य के 26 जिलों में बारिश को लेकर यलो अलर्ट जारी किया है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में अगर आगे भी बारिश होती है तो लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। लगातार बारिश और नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के कारण निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ी हुई है। बाढ़ का पानी कई इलाकों में खेतों और रिहायशी क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। इससे खेती-किसानी पर भी असर पड़ने की आशंका है। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं के चारे, पीने के पानी, आवागमन और जरूरी सामान की उपलब्धता बड़ी चुनौती बनती जा रही है। प्रशासन और बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। सबसे बड़ी चिंता उन परिवारों की है जो बाढ़ के बीच अपने घरों में फंसे हुए हैं। लगातार बढ़ते पानी के बीच सुरक्षित स्थानों तक पहुंचना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। ऐसे में राहत शिविर, भोजन, पेयजल, दवा और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। आने वाले दिनों में मौसम और नदियों के जलस्तर की स्थिति यह तय करेगी कि बाढ़ का संकट और कितना बढ़ता है।
