- AI से पुलिस की वर्दी-थाना और हथियार का फर्जी खेल, युवती गिरफ्तार, SP स्वर्ण प्रभात के निर्देश पर साइबर पुलिस का शिकंजा
मोतिहारी: जिला में AI के जरिए पुलिस की वर्दी, थाना, हथियार और पुलिस वाहनों के साथ फर्जी या भ्रामक तस्वीरें और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करने का मामला गंभीर होता जा रहा है। Instagram, Facebook, WhatsApp ग्रुप और YouTube पर पिछले कुछ महीनों से इस तरह की सामग्री तेजी से प्रसारित की जा रही है। बिहार पुलिस ही नहीं, उत्तर प्रदेश पुलिस के थानों, हथियारों और वाहनों को भी ऐसी तस्वीरों और वीडियो में इस्तेमाल किया जा रहा है। पुलिस ने इसे गंभीरता से लेते हुए ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई और दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। मोतिहारी में एक युवती द्वारा हथियार के साथ मुफस्सिल थाना परिसर की AI से तैयार तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के मामले में साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है। एसपी स्वर्ण प्रभात के निर्देश पर साइबर थाना मामले की जांच कर रहा है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि तस्वीर किसने तैयार की, किस तकनीक का इस्तेमाल हुआ, किस उद्देश्य से इसे बनाया गया और इसे सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के बाद किन-किन लोगों ने आगे प्रसारित किया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक सोशल मीडिया पर पुलिस की वर्दी, थाना, हथियार या पुलिस वाहन का इस्तेमाल कर तैयार की गयी ऐसी तस्वीरों और वीडियो को महज मनोरंजन की सामग्री मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। AI के जरिए वास्तविक जैसी दिखने वाली तस्वीरें और वीडियो तैयार कर लोगों के बीच फैलाने से पुलिस की पहचान और संस्थानों के दुरुपयोग का खतरा पैदा हो रहा है। आम लोग कई बार वास्तविक और AI से तैयार सामग्री के बीच अंतर नहीं कर पाते। ऐसे में फर्जी सामग्री तेजी से वायरल होकर भ्रम की स्थिति पैदा कर सकती है। मामला किसी एक पोस्ट या एक-दो प्रोफाइल तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में Instagram, Facebook, WhatsApp और YouTube पर ऐसी कई प्रोफाइल सामने आयी हैं, जहां पुलिस से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो लगातार प्रसारित किये जा रहे हैं। इनमें AI से तैयार या बदली गयी सामग्री भी शामिल है। पुलिस ऐसी प्रोफाइल की गतिविधियों पर नजर रख रही है और संबंधित लोगों की पहचान में जुटी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर सोशल मीडिया पर पुलिस की वर्दी, थाना, हथियार और वाहनों को दिखाकर इस तरह की सामग्री क्यों तैयार की जा रही है। लाइक, व्यू और फॉलोअर बढ़ाने की होड़ में यदि पुलिस की पहचान और सरकारी संस्थानों का इस्तेमाल किया जा रहा है तो इसका असर केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहेगा। ऐसी सामग्री से पुलिस की छवि प्रभावित होने और लोगों के बीच गलत धारणा बनने का खतरा है। चिंता केवल बिहार पुलिस से जुड़ी सामग्री तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश पुलिस के थानों, हथियारों और वाहनों को दिखाकर भी तस्वीरें और वीडियो प्रसारित किये जाने की बात सामने आयी है। AI के बढ़ते इस्तेमाल ने इस खतरे को और गंभीर बना दिया है। अब बिना वास्तविक स्थान पर गये या वास्तविक घटना के बिना भी ऐसी तस्वीर तैयार की जा सकती है, जो देखने में पूरी तरह असली प्रतीत हो। पुलिस की जांच का दायरा केवल AI तस्वीर या वीडियो बनाने वाले तक सीमित नहीं रहेगा। पोस्ट करने वाले और जानबूझकर उसे आगे वायरल करने वालों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि सामग्री का मूल स्रोत क्या है, किसने इसे तैयार किया और किस उद्देश्य से इसे सोशल मीडिया पर डाला गया। जरूरत पड़ने पर डिजिटल माध्यमों से इसके प्रसार की पूरी कड़ी खंगाली जायेगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पुलिस की वर्दी, थाना, हथियार या सरकारी वाहनों को दिखाकर भ्रामक सामग्री तैयार करना और उसे सोशल मीडिया पर फैलाना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। ऐसी सामग्री तेजी से फैलती है तो आम लोगों के बीच पुलिस को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है। साथ ही पुलिस विभाग की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसी को देखते हुए ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई की जरूरत बतायी गयी है। संबंधित प्रोफाइलों की निगरानी बढ़ाने, सामग्री के स्रोत की पहचान करने और दोषी पाये जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की दिशा में कदम उठाये जा रहे हैं। मुफस्सिल थाना परिसर की AI से तैयार तस्वीर और हथियार से जुड़े मामले में साइबर थाने में FIR दर्ज होना पुलिस के सख्त रुख का स्पष्ट संकेत है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि तस्वीर वास्तव में कैसे तैयार की गयी और उसे किस उद्देश्य से सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जायेगी। एसपी स्वर्ण प्रभात ने स्पष्ट किया है कि पुलिस की वर्दी, थाना, हथियार, पुलिस वाहन या पुलिस के नाम का इस्तेमाल कर आपत्तिजनक और भ्रामक AI सामग्री तैयार कर सोशल मीडिया पर फैलाने वालों को बख्शा नहीं जायेगा। पुलिस विभाग की पहचान के साथ खिलवाड़ और लोगों को भ्रमित करने वाली सामग्री को गंभीरता से लिया जायेगा। AI तकनीक जहां एक ओर रचनात्मक संभावनाएं खोल रही है, वहीं उसका दुरुपयोग पुलिस के लिए नई चुनौती बनता जा रहा है। पुलिस से जुड़ी फर्जी तस्वीरों और वीडियो का तेजी से प्रसार इसी खतरे का हिस्सा है। समय रहते ऐसे मामलों पर लगाम नहीं लगी तो सोशल मीडिया पर पुलिस की फर्जी पहचान और नकली पुलिसिया माहौल तैयार करने का चलन और बढ़ सकता है। पुलिस अब ऐसे मामलों में निगरानी से आगे बढ़कर कार्रवाई के मूड में है।