- लंबित कांडों के निपटारे में तेजी लाएं, दोषी नहीं बचें और निर्दोष पर कार्रवाई न हो : डीएसपी
- एसपी स्वर्ण प्रभात के निर्देश पर सदर डीएसपी-1 दिलीप कुमार ने 22 अनुसंधानकर्ताओं के साथ की समीक्षा, निष्पक्ष जांच और पब्लिक से बेहतर व्यवहार पर जोर
मोतिहारी। जिले में लंबित आपराधिक कांडों के शीघ्र निष्पादन को लेकर पुलिस ने अनुसंधानकर्ताओं पर निगरानी और समीक्षा बढ़ा दी है। एसपी स्वर्ण प्रभात के निर्देश पर सदर डीएसपी-1 दिलीप कुमार ने अनुसंधानकर्ताओं के साथ कार्यशाला आयोजित कर लंबित कांडों की स्थिति की समीक्षा की। कार्यशाला में 22 कांडों के अनुसंधानकर्ता (आईओ) मौजूद रहे। इस दौरान डीएसपी ने स्पष्ट किया कि लंबित मामलों के अनुसंधान में किसी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी मामलों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करना होगा। डीएसपी ने अनुसंधानकर्ताओं को निर्देश दिया कि प्रत्येक लंबित कांड को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाए और जांच को अनावश्यक रूप से लंबा न खींचा जाए। कांड की प्रकृति और उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार अनुसंधान को आगे बढ़ाते हुए निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई पूरी की जाए। उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई का आधार केवल आरोप नहीं, बल्कि ठोस साक्ष्य और निष्पक्ष अनुसंधान होना चाहिए।
दोषी पर सख्ती, निर्दोष को राहत
कार्यशाला में डीएसपी दिलीप कुमार ने अनुसंधानकर्ताओं को स्पष्ट संदेश दिया कि अपराध में शामिल दोषी किसी भी हाल में नहीं बचना चाहिए, लेकिन निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई भी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस अनुसंधान की विश्वसनीयता निष्पक्षता से ही कायम होती है। इसलिए प्रत्येक कांड के सभी पहलुओं की जांच करने के बाद ही किसी व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने अनुसंधानकर्ताओं को मामले से जुड़े तथ्यों, गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों का गंभीरता से परीक्षण करने को कहा। किसी एक पक्ष की बात के आधार पर कार्रवाई करने के बजाय मामले के सभी पहलुओं को जांच के दायरे में रखने का निर्देश दिया गया।
लंबित मामलों को निपटाना प्राथमिकता
कार्यशाला का मुख्य फोकस लंबित कांडों के शीघ्र निष्पादन पर रहा। डीएसपी ने अनुसंधानकर्ताओं से उनके जिम्मे लंबित मामलों की प्रगति की जानकारी ली और समय पर अनुसंधान पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि लंबित मामलों की संख्या कम करने के लिए नियमित रूप से केस की समीक्षा जरूरी है। अनुसंधान में जहां किसी स्तर पर समस्या आ रही हो, उसकी जानकारी वरीय अधिकारियों को देकर उसका समाधान कराया जाए। पुलिस अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि कांडों के अनुसंधान के दौरान कानूनी प्रक्रिया और निर्धारित मानकों का पूरी तरह पालन किया जाए, ताकि जांच मजबूत रहे और दोषियों के खिलाफ अदालत में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
पब्लिक से बेहतर व्यवहार पर भी जोर
डीएसपी ने अनुसंधानकर्ताओं को आम लोगों के साथ बेहतर व्यवहार रखने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस और पब्लिक के बीच भरोसा मजबूत होने से अपराध नियंत्रण और अनुसंधान दोनों में मदद मिलती है। किसी कांड से संबंधित जानकारी जुटाने के दौरान स्थानीय लोगों, पीड़ित पक्ष और गवाहों से सम्मानजनक तरीके से बातचीत की जाए। उन्होंने कहा कि पुलिस को मिलने वाली कई महत्वपूर्ण सूचनाएं आम लोगों के माध्यम से सामने आती हैं। ऐसे में जनता के साथ संवाद और समन्वय बनाए रखना अनुसंधान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लोगों की शिकायतों को गंभीरता से सुनने और आवश्यकतानुसार उनकी मदद करने पर भी जोर दिया गया।
अनुसंधान में लापरवाही पर नजर
कार्यशाला के दौरान अनुसंधानकर्ताओं को अपने-अपने मामलों की नियमित समीक्षा करने की हिदायत दी गई। कांड दर्ज होने के बाद अनुसंधान की प्रत्येक महत्वपूर्ण कार्रवाई को समयबद्ध तरीके से पूरा करने तथा अनावश्यक देरी से बचने को कहा गया। पुलिस का जोर ऐसे मामलों को प्राथमिकता से निपटाने पर है, जिनमें अनुसंधान लंबे समय से लंबित है। एसपी स्वर्ण प्रभात के निर्देश पर जिले के विभिन्न अनुमंडलों में संबंधित डीएसपी द्वारा थानों के अधिकारियों और अनुसंधानकर्ताओं के साथ इस तरह की समीक्षा बैठक और कार्यशाला आयोजित की जा रही है। इसका उद्देश्य न केवल लंबित कांडों की संख्या कम करना है, बल्कि अनुसंधान की गुणवत्ता में सुधार लाकर दोषियों के खिलाफ मजबूत कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना भी है।
नगर थानाध्यक्ष समेत 22 आईओ रहे मौजूद
सदर डीएसपी-1 दिलीप कुमार की कार्यशाला में मुख्य रूप से नगर थानाध्यक्ष राजीव कुमार मौजूद रहे। उनके साथ विभिन्न कांडों के 22 अनुसंधानकर्ता भी कार्यशाला में शामिल हुए। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे अपने जिम्मे के लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन करें और अनुसंधान के दौरान निष्पक्षता, पारदर्शिता तथा पब्लिक के साथ बेहतर व्यवहार को प्राथमिकता दें। पुलिस महकमे की इस पहल से लंबित कांडों के अनुसंधान में तेजी लाने के साथ दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई और निर्दोष लोगों को अनावश्यक कार्रवाई से बचाने पर जोर दिया जा रहा है।