किसानों की फसल पर डाका डालने की साजिश बेनकाब! ढाका में नकली खाद के अड्डे पर बड़ा छापा, 20 टन नमक समेत भारी जखीरा बरामद

  • “किसानों की फसल पर डाका डालने की साजिश बेनकाब! ढाका में नकली खाद के अड्डे पर बड़ा छापा, 20 टन नमक समेत भारी जखीरा बरामद”

मोतिहारी: पूर्वी चंपारण जिले के सिकरहना अनुमंडल अंतर्गत ढाका थाना क्षेत्र में कृषि विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई ने नकली उर्वरक के कथित कारोबार का बड़ा पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। शुरुआती जांच में जिस तरह की सामग्री बरामद हुई है, उससे प्रथम दृष्टया यह आशंका जताई जा रही है कि गोदाम में नकली उर्वरक तैयार कर उसे असली ब्रांड के नाम पर बाजार में खपाने की तैयारी की जा रही थी। यदि यह आरोप जांच में सही साबित होता है तो यह किसानों की मेहनत, उनकी फसल और कृषि व्यवस्था के साथ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का मामला होगा। मामले में उर्वरक निरीक्षक उमेश कुमार वर्मा के लिखित आवेदन पर शुक्रवार को ढाका थाने में मेसर्स अंश ट्रेडर्स के प्रोपराइटर खलीकुर्रहमान के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने पूरे मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि इस कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जानकारी के अनुसार, कृषि विभाग को काफी दिनों से इस गोदाम में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिल रही थी। इसके बाद कृषि विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने योजनाबद्ध तरीके से चंदनबारा मदनी चौक के समीप स्थित गोदाम पर छापेमारी की। टीम जब गोदाम के अंदर पहुंची तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। छापेमारी के दौरान गोदाम से बड़ी मात्रा में नकली डीएपी और एमओपी उर्वरक, सफेद रंग के खाली बोरे, उर्वरक की सिलाई के लिए स्टिचिंग मशीन, लगभग 20 टन नमक, ऑक्सीजन सिलेंडर तथा उर्वरक तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली अन्य कई सामग्रियां बरामद की गईं। बरामद सामग्री को जब्त कर लिया गया है और उसकी सूची तैयार की जा रही है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि यहां नमक और अन्य रसायनों की मदद से नकली उर्वरक तैयार कर उसे प्रसिद्ध कंपनियों के नाम वाले बोरों में भरकर बाजार में बेचा जाता था। हालांकि इस आशंका की अंतिम पुष्टि प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट आने के बाद ही होगी। प्रखंड कृषि पदाधिकारी इंद्रजीत कुमार ने बताया कि गोदाम से बरामद कच्चे माल, संदिग्ध उर्वरक तथा अन्य सामग्रियों के नमूनों को विधिवत सीलबंद कर प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। वैज्ञानिक जांच के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि बरामद सामग्री की वास्तविक गुणवत्ता क्या है और उसका उपयोग किस प्रकार का उर्वरक तैयार करने में किया जा रहा था। रिपोर्ट मिलने के बाद संबंधित आरोपित के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश तथा अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में नकली उर्वरक बनाने और उसकी बिक्री की पुष्टि होती है तो यह केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि किसानों की आजीविका पर सीधा हमला माना जाएगा। नकली खाद के उपयोग से फसलों की पैदावार प्रभावित होती है, मिट्टी की उर्वरता को नुकसान पहुंचता है और किसानों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ती है। पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस गोदाम से तैयार या पैक की गई सामग्री किन-किन बाजारों और दुकानों तक पहुंचाई जाती थी। इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं, इसकी भी जांच की जा रही है। जरूरत पड़ने पर अन्य स्थानों पर भी छापेमारी की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। कृषि विभाग और पुलिस दोनों का कहना है कि प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने के बाद मामले में कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। यदि नकली उर्वरक बनाने की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी, ताकि किसानों के हितों से खिलवाड़ करने वालों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

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