- ₹1.73 लाख की लूट का ‘महाझूठ’! हथियारबंद बदमाशों की कहानी गढ़कर हड़पनी थी वसूली की रकम, बेतिया पुलिस की जांच में खुला फर्जीवाड़े का पूरा साम्राज्य
बेतिया: पश्चिम चंपारण में कथित लूट की एक सनसनीखेज घटना ने उस समय अप्रत्याशित मोड़ ले लिया जब बेतिया पुलिस की गहन जांच में पूरा मामला फर्जी निकला। जिस घटना को आठ हथियारबंद अपराधियों द्वारा दिनदहाड़े अंजाम दी गई बड़ी लूट बताया जा रहा था, वह वास्तव में वसूली की रकम को हड़पने के लिए रची गई एक सोची-समझी साजिश साबित हुई। पुलिस ने अपनी त्वरित और तकनीकी जांच के बल पर न केवल कथित लूट की कहानी का पर्दाफाश किया, बल्कि शिकायतकर्ता को ही आरोपी बना दिया। 13 जून 2026 को गुरवलिया बाबू टोला निवासी राजकिशोर ठाकुर ने पुलिस को सूचना दी कि मैनाटांड थाना क्षेत्र के लिपनी-मथुरा चौक के समीप दो मोटरसाइकिलों पर सवार आठ अपराधियों ने उसे घेर लिया। उसने दावा किया कि बदमाश हथियार से लैस थे और उन्होंने भय दिखाकर उससे ₹1 लाख 73 हजार रुपये लूट लिए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हो गई। इलाके में हड़कंप मच गया और लोगों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई कि सीमावर्ती इलाके में अपराधियों का मनोबल फिर बढ़ गया है। लेकिन पुलिस अधिकारियों को शुरुआत से ही घटना के कई पहलू संदिग्ध लगे। कथित लूट के समय, स्थान, परिस्थितियों और शिकायतकर्ता के बयानों में कई विसंगतियां सामने आईं। इसके बाद पुलिस ने मामले की गहराई से जांच शुरू की। वसूली से जुड़े दस्तावेज, बैंकिंग रिकॉर्ड, ग्राहकों के बयान और आर्थिक लेन-देन का बारीकी से विश्लेषण किया गया। जांच में सामने आया कि राजकिशोर ठाकुर विभिन्न ग्राहकों से वसूली की गई राशि का हिसाब देने के बजाय उसे अपने कब्जे में रखना चाहता था। पुलिस को ऐसे साक्ष्य मिले जिनसे पता चला कि लगभग ₹86 हजार रुपये ग्राहकों से उसके बैंक खाते में जमा करवाए गए थे, जबकि दूसरी ओर नकद वसूली की पावती भी तैयार की गई थी। यानी कागजों में राशि की स्थिति कुछ और थी और वास्तविक लेन-देन कुछ और। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कथित लूट की कहानी कमजोर पड़ती गई। घटनास्थल से लेकर बयान तक कहीं भी ऐसी परिस्थितियां नहीं मिलीं जो बड़े लूटकांड की पुष्टि करतीं। अंततः पुलिस इस निष्कर्ष पर पहुंची कि पूरी घटना मनगढ़ंत थी और इसका मकसद वसूली की राशि को गबन करना था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, लूट की झूठी कहानी बनाकर रकम के हिसाब-किताब से बचने और अपने ऊपर उठने वाले सवालों को दबाने की कोशिश की गई थी। मामले के खुलासे के बाद राय ट्रेडर्स के प्रोपराइटर अभय कुमार राय ने लिखित शिकायत दर्ज कराई। उनके आवेदन के आधार पर मैनाटांड थाना कांड संख्या 131/26 दर्ज किया गया। अब राजकिशोर ठाकुर के खिलाफ गबन, धोखाधड़ी और पुलिस को झूठी सूचना देकर गुमराह करने के आरोप में कानूनी कार्रवाई की जा रही है। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अक्सर झूठी घटनाओं की वजह से पुलिस बल और संसाधनों का बड़ा हिस्सा व्यर्थ खर्च होता है। यदि पुलिस शुरुआती सूचना पर ही भरोसा कर लेती, तो निर्दोष लोगों पर संदेह जाता और पूरे क्षेत्र में भय का माहौल बन जाता। लेकिन बेतिया पुलिस ने तथ्यों, दस्तावेजों और तकनीकी जांच के आधार पर सच्चाई को सामने लाकर यह साबित कर दिया कि कानून के हाथ केवल अपराधियों तक ही नहीं, बल्कि झूठी कहानी गढ़ने वालों तक भी पहुंचते हैं। इस खुलासे के बाद इलाके में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग पुलिस की जांच क्षमता की सराहना कर रहे हैं, वहीं यह घटना उन लोगों के लिए भी चेतावनी बन गई है जो आर्थिक गड़बड़ी छिपाने के लिए अपराध की झूठी पटकथा लिखने की कोशिश करते हैं।