फर्जी डिग्री का महाघोटाला! BRABU में 70 असिस्टेंट प्रोफेसरों की नौकरी पर संकट, FIR की तैयारी

  • फर्जी डिग्री का महाघोटाला! BRABU में 70 असिस्टेंट प्रोफेसरों की नौकरी पर संकट, FIR की तैयारी

मुजफ्फरपुर: बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (BRABU) में असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति घोटाले ने शिक्षा व्यवस्था की साख पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। विश्वविद्यालय की विस्तृत जांच में 70 सहायक प्राध्यापकों के अनुभव प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए गए हैं, जिसके बाद पूरे तंत्र में हड़कंप मच गया है। यह मामला सिर्फ कागजी गड़बड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें संगठित तरीके से नियमों की अनदेखी और सिस्टम का दुरुपयोग सामने आया है।
जांच के दौरान कुल 14 बिंदुओं पर प्रमाणपत्रों की पड़ताल की गई, जिसमें बड़े पैमाने पर अनियमितताएं उजागर हुईं। कई अभ्यर्थियों ने ‘रिसोर्स पर्सन’ के नाम पर अनुभव दिखाया, जो नियमानुसार मान्य नहीं है। कुछ ने अवैतनिक सेवा को अनुभव के रूप में प्रस्तुत किया, जबकि कई ऐसे भी मामले सामने आए जहां बिना स्वीकृत पद के ही अनुभव प्रमाणपत्र बना दिए गए। यह भी सामने आया कि कुछ अभ्यर्थी बेहद मामूली मानदेय, यहां तक कि महज 500 रुपये में पढ़ाने का दावा कर अनुभव हासिल दिखा रहे थे, जो पूरे चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
इस पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने तुरंत एक्शन लेते हुए होम साइंस और अंग्रेजी विषय के कई सहायक प्राध्यापकों की पोस्टिंग पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही होम साइंस के कुछ शिक्षकों का वेतन भी स्थगित कर दिया गया है। एक मामले में तो फर्जी प्रमाणपत्र देने के आरोप में एक सहायक प्राध्यापक को बर्खास्त भी किया जा चुका है, जो इस बात का संकेत है कि कार्रवाई अब सिर्फ औपचारिकता नहीं बल्कि सख्ती के साथ की जा रही है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनी जांच रिपोर्ट विश्वविद्यालय सेवा आयोग को भेज दी है, जहां से आगे की कार्रवाई तय की जानी है। आयोग के निर्देश पर दोषी पाए गए सभी अभ्यर्थियों की नियुक्ति रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। साथ ही उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की भी तैयारी है, जिससे यह मामला अब सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कानूनी दायरे में भी जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल विश्वविद्यालय की चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की अनियमितताएं भविष्य में और गंभीर रूप ले सकती हैं। फिलहाल सभी की नजरें विश्वविद्यालय सेवा आयोग के अगले फैसले पर टिकी हैं, जो इस बड़े फर्जीवाड़े में शामिल लोगों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई का रास्ता तय करेगा।

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