‘वर्दी में वसूली’ का काला खेल बेनकाब: मधेपुरा में दारोगा 7 हजार घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, काम के बदले कैश’ का खुला सौदा

  • वर्दी में वसूली’ का काला खेल बेनकाब: मधेपुरा में दारोगा 7 हजार घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, ‘काम के बदले कैश’ का खुला सौदा

मधेपुरा: भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी और सख्त कार्रवाई में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बिहार के मधेपुरा जिले में पुलिस महकमे की साख पर करारा प्रहार किया है। पुरैनी थाना में तैनात पुलिस अवर निरीक्षक अनिल कुमार सिंह को 7,000 रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया। यह कार्रवाई न सिर्फ एक आरोपी दारोगा की गिरफ्तारी है, बल्कि उस सड़े-गले सिस्टम का खुलासा भी है, जहां “बिना पैसे कोई काम नहीं” एक आम हकीकत बनती जा रही है। सूत्रों के अनुसार, आरोपी दारोगा एक मामले में कार्रवाई करने के नाम पर पीड़ित से लगातार रिश्वत की मांग कर रहा था। पीड़ित जब इस दबाव से परेशान हो गया, तो उसने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो से संपर्क किया। इसके बाद पूरी प्लानिंग के तहत टीम ने जाल बिछाया। जैसे ही तय रकम दारोगा के हाथ में पहुंची, टीम ने मौके पर धावा बोलकर उसे रंगे हाथों दबोच लिया। इस कार्रवाई ने पुलिस विभाग के अंदर चल रहे ‘अंदरखाने के खेल’ को उजागर कर दिया है। सवाल यह उठता है कि आखिर एक दारोगा इतनी बेखौफ होकर रिश्वत कैसे मांग रहा था? क्या उसे सिस्टम का संरक्षण प्राप्त था, या यह अकेले की करतूत है? स्थानीय लोगों के बीच इस घटना के बाद जबरदस्त चर्चा है। लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि लंबे समय से इस तरह की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं होने के कारण भ्रष्टाचारियों के हौसले बुलंद होते गए। गिरफ्तारी के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। निगरानी टीम अब आरोपी से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि कहीं इसके तार किसी बड़े नेटवर्क से तो नहीं जुड़े हैं। यदि जांच में और नाम सामने आते हैं, तो आने वाले दिनों में और बड़ी कार्रवाई संभव है। सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के बीच यह कार्रवाई एक कड़ा संदेश जरूर देती है कि अब भ्रष्टाचारियों के दिन गिनती के रह गए हैं। हालांकि, असली चुनौती इस सिस्टम को जड़ से साफ करने की है, जहां “काम नहीं करने के लिए सैलरी और काम करने के लिए रिश्वत” जैसी मानसिकता गहराई तक बैठ चुकी है।

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