- ‘रुद्र सेना’ या लूट की फैक्ट्री? 50 लाख की वारदात का मास्टरमाइंड निकला नितेश ठाकुर, सुगौली से पटना तक फैला था गैंग का जाल!
मोतिहारी: पटना के अगमकुआं थाना क्षेत्र में हुई 50 लाख रुपये की हाई-प्रोफाइल लूट अब एक साधारण चोरी नहीं, बल्कि सुनियोजित आपराधिक नेटवर्क की खौफनाक परतें खोल रही है। मोटर, पंखा और तार की इस बड़ी वारदात के पीछे जिस नाम का खुलासा हुआ है, उसने पुलिस ही नहीं, पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। जांच में सामने आया है कि इस लूट का मास्टरमाइंड मोतिहारी जिले के सुगौली थाना क्षेत्र के सुगांव का रहने वाला नितेश ठाकुर है—जो ‘रुद्र सेना’ नाम से एक संगठन चलाता था। लेकिन अब खुलासा हुआ है कि यह संगठन सामाजिक नहीं, बल्कि अपराध की प्लानिंग और उसे अंजाम देने का अड्डा बन चुका था। सूत्रों के मुताबिक, नितेश ठाकुर ने अपने गांव के ही तीन भरोसेमंद गुर्गों के साथ मिलकर इस पूरी लूट की स्क्रिप्ट लिखी। पहले रेकी, फिर प्लानिंग और उसके बाद सटीक टाइमिंग पर वारदात—पूरी घटना किसी फिल्मी स्टाइल ऑपरेशन से कम नहीं थी। यही वजह है कि शुरुआत में पुलिस भी इसे सामान्य चोरी मान रही थी, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, मामला संगठित गिरोह और बड़े नेटवर्क तक जा पहुंचा। मोतिहारी के एसपी स्वर्ण प्रभात के कड़े तेवर और सख्त निर्देश के बाद स्थानीय पुलिस ने पटना पुलिस के साथ मिलकर संयुक्त ऑपरेशन चलाया। सुगौली के माई स्थान इलाके में हुई ताबड़तोड़ छापेमारी ने पूरे गिरोह की जड़ें हिला दीं। इस कार्रवाई में पप्पू सर्राफ के घर से लूट का भारी जखीरा बरामद किया गया—जिसमें मोटर, पंखा और कीमती तार शामिल हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस नेटवर्क में सिर्फ छोटे अपराधी ही नहीं, बल्कि इलाके के कुछ रसूखदार और प्रभावशाली चेहरे भी जुड़े हुए हैं। छापेमारी के दौरान पुलिस ने पप्पू सर्राफ के बेटे को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन मुख्य सरगना नितेश ठाकुर अब भी फरार है। उसके साथ गिरोह के अन्य सदस्य भी भूमिगत हो चुके हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और इस तरह की कई वारदातों को अंजाम दे चुका है। अब पुलिस इस पूरे नेटवर्क की परत-दर-परत जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ‘रुद्र सेना’ के नाम पर और कितने अपराधों को अंजाम दिया गया। इस खुलासे के बाद सुगौली से लेकर पटना तक हड़कंप मचा हुआ है। लोग हैरान हैं कि जिस संगठन को वे सामाजिक मानते थे, वही अंदरखाने अपराध का गढ़ निकला। अब पुलिस की नजर सिर्फ इस केस तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे गिरोह और उससे जुड़े हर चेहरे को बेनकाब करने पर है।
साफ है—यह सिर्फ 50 लाख की लूट नहीं, बल्कि ‘संगठन की आड़ में अपराध’ के उस खतरनाक मॉडल का पर्दाफाश है, जो समाज के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। अब देखना होगा कि पुलिस कब तक इस पूरे गिरोह का सफाया कर पाती है और फरार मास्टरमाइंड नितेश ठाकुर को सलाखों के पीछे पहुंचाती है।