- “दिल्ली में ‘मैडम’, बिहार में ‘हाजिरी’! 10 साल तक बिना पढ़ाए उठाती रही सैलरी, शिक्षा विभाग बेखबर”
सहरसा: बिहार के सहरसा से सामने आया यह मामला सिर्फ एक शिक्षिका की लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा सिस्टम पर करारा तमाचा है। यहां एक शिक्षिका ने ‘घोस्ट टीचर’ बनकर पूरे 10 वर्षों तक सरकारी खजाने को चूना लगाया—वो भी बिना स्कूल की चौखट पार किए। सौर बाजार प्रखंड के नव सृजित प्राथमिक विद्यालय कांप गोठ उत्तर बाड़ी टोला में तैनात इस शिक्षिका की हकीकत चौंकाने वाली है। कागजों में वह रोज स्कूल में मौजूद दिखती रही, लेकिन असल में वह दिल्ली में अपने पति के साथ आराम की जिंदगी जी रही थी। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक-दो महीने नहीं, बल्कि पूरे 10 साल तक यह फर्जीवाड़ा कैसे चलता रहा? क्या शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है, या फिर इस खेल में अंदर तक मिलीभगत है? शिकायत के बाद जब जांच हुई तो कई चौंकाने वाले राज सामने आए। जांच रिपोर्ट में साफ तौर पर पाया गया कि विद्यालय की उपस्थिति पंजी में भारी हेराफेरी की गई। यानी कागजों पर रोज हाजिरी, जबकि जमीन पर पूरी गैरहाजिरी—एक सुनियोजित फर्जीवाड़ा। इस खुलासे के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। अब विभाग बिहार पंचायत प्रारंभिक विद्यालय सेवा नियमावली 2020 के तहत सख्त कार्रवाई की तैयारी में जुट गया है। माना जा रहा है कि इस मामले में सिर्फ शिक्षिका ही नहीं, बल्कि उपस्थिति दर्ज करने वाले और निगरानी करने वाले जिम्मेदार लोगों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक सकती है।
यह मामला कई बड़े सवाल खड़े करता है—
क्या बिहार के सरकारी स्कूलों में ‘घोस्ट टीचर्स’ का जाल फैला हुआ है?
क्या बच्चों की पढ़ाई सिर्फ कागजों और फाइलों तक सीमित हो चुकी है?
और सबसे अहम—क्या दोषियों पर इस बार वाकई कड़ी कार्रवाई होगी, या फिर मामला कुछ दिन शोर मचाकर ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
फिलहाल, इस खुलासे ने शिक्षा विभाग की कार्यशैली की पोल खोल दी है और यह साफ कर दिया है कि अगर समय रहते सख्ती नहीं बरती गई, तो शिक्षा व्यवस्था का भरोसा पूरी तरह डगमगा सकता है।