- मोतिहारी में प्रमुख पति का सामने आया शस्त्र लाइसेंस के नाम पर थानाध्यक्ष का फर्जी रिपोर्ट, SP के जांच में हुआ खुलासा, चौकीदार गिरफ्तार, प्रमुख पति के गिरफ्तारी के लिए 20 हजार का इनाम
मोतिहारी में शस्त्र लाइसेंस (Arms Licence) लेने के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. जहां अपराधिक इतिहास रहने पर केसरिया प्रखंड के प्रमुख पति केसरिया थाना क्षेत्र के बैरिया गांव निवासी मनीर अहमद का पुत्र नाज अहमद खान उर्फ पप्पू ने दूसरे आर्म्स लाइसेंस लेने के जुगत में थानाध्यक्ष का फर्जी प्रतिवेदन बनाकर इस्पेक्टर का फर्जी अनुशंसा कर अग्रसारित कर दिया गया.

जबकि प्रमुख पति पर आर्म्स एक्ट के कई मामलों समेत करीब दो दर्जन संगीत आपराधिक मामले दर्ज है. फर्जीवाड़े के इस खेल में केसरिया थाना का एक चौकीदार भी शामिल है. इस सनसनीखेज फर्जीवाड़े के बाद पुलिस महकमा में हड़कंप मच गया है. इधर, मामले में पुलिस ने कार्यवाई करते हुए इस फर्जीवाड़े के खेल में शामिल चौकीदार मनोज सिंह को गिरफ्तार कर लिया है उसके खिलाफ फर्जीवाड़ा, जलसाजी और आपराधिक षडयंत्र की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है. वही आपराधिक छवि का प्रमुख पति नाज अहमद खान उर्फ पप्पू की गिरफ्तारी के लिए SIT का गठन किया गया है. मामले को गंभीरता से लेते हुए मोतीहारी एसपी स्वर्ण प्रभात ने 48 घंटे के भीतर आत्म समर्पण करने को कहा है यदि तय सीमा के भीतर आत्म समर्पण नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाई की जाएगी. मामला सामने आने के बाद फर्जीवाड़े करने वाले प्रमुख पति पर 20 हजार रुपये इनाम की घोषणा की गई है. पुलिस ने बताया है की सूचना देने वाले को इनाम की राशि दी जाएगी साथ ही उसकी पहचान गुप्त रखी जाएगी.

बताया जाता है कि आर्म्स लाइसेंस जैसे संवेदनशील नियमों के बीच कुख्यात अपराधी को शस्त्र लाइसेंस दिलाने की साजिश रचना एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. हालांकि, आरोपी चौकीदार मनोज सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, नाज अहमद खान एक कुख्यात अपराधी है और उस पर पूर्व से करीब दो दर्जन संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं. आर्म्स लाइसेंस प्राप्त करने के लिए आरोपी ने चौकीदार मनोज सिंह के साथ मिलीभगत की. चौकीदार ने पद का दुरुपयोग करते हुए थानाध्यक्ष और इंस्पेक्टर के फर्जी हस्ताक्षर किए और रिपोर्ट में नाज अहमद खान का आपराधिक इतिहास ‘शून्य’ दिखाते हुए फाइल जिला मुख्यालय भेज दी. फर्जीवाड़े की इस गंभीर शिकायत पर जिलाधिकारी के निर्देश पर प्रतिवेदन की गहन जांच कराई गई. जांच के दौरान जब अधिकारियों के हस्ताक्षर का मिलान किया गया, तो पूरी साजिश बेनकाब हो गई. रिपोर्ट में फर्जीवाड़ा साबित होने के बाद पदाधिकारी रामशरण पासवान के लिखित आवेदन पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चौकीदार मनोज सिंह को दबोच लिया. इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और सत्यापन प्रक्रिया में सेंध लगाने की कोशिश करने वाले तत्वों के बीच खौफ पैदा कर दिया है. वही मोतिहारी एसपी स्वर्ण प्रभात ने स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह सरकारी कर्मचारी हो या कोई प्रभावशाली व्यक्ति.इस खुलासे के बाद मोतिहारी के आम लोगों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है. लोग प्रशासनिक मुस्तैदी की सराहना कर रहे हैं, जिससे एक अपराधी को कानूनी हथियार मिलने से पहले ही रोक दिया गया. फिलहाल, पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस रैकेट में अन्य लोग भी शामिल हैं या पहले भी इस तरह के फर्जी हस्ताक्षर कर लाइसेंस निर्गत कराए गए हैं. बताया जाता है कि प्रमुख पति पूर्व विधानसभा प्रत्याशी भी रह चुका है. इसके बाद केसरिया सहित पूरे जिले में राजनीतिक चर्चाओं का विषय गर्म है.