वंदे भारत फिर बनी पत्थरबाजों का निशाना! सुगौली में चलती ट्रेन पर हमला, सी-4 कोच का शीशा चकनाचूर; सैकड़ों यात्रियों की जान से खिलवाड़

  • वंदे भारत फिर बनी पत्थरबाजों का निशाना! सुगौली में चलती ट्रेन पर हमला, सी-4 कोच का शीशा चकनाचूर; सैकड़ों यात्रियों की जान से खिलवाड़
  • स्टेशन से निकलते ही उपद्रवियों का दुस्साहस
  • कोच में मची चीख-पुकार, बाल-बाल टला बड़ा रेल हादसा
  • बार-बार हमलों के बावजूद बेअसर साबित हो रही रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था
  • आरपीएफ जांच में जुटी, लेकिन सवाल बरकरार—आखिर कब रुकेगी पत्थरबाजी?

मोतिहारी/सुगौली। देश की सबसे आधुनिक और प्रतिष्ठित ट्रेनों में शामिल पटना (पाटलिपुत्र)-गोरखपुर वंदे भारत एक्सप्रेस एक बार फिर पूर्वी चंपारण के सुगौली में उपद्रवियों के हमले का शिकार बन गई। मंगलवार की शाम स्टेशन से ट्रेन खुलने के कुछ ही क्षण बाद अज्ञात पत्थरबाजों ने चलती ट्रेन पर ताबड़तोड़ पथराव कर दिया। तेज रफ्तार से दौड़ रही ट्रेन के सी-4 कोच पर एक बड़ा पत्थर आकर लगा और खिड़की का शीशा पलभर में चकनाचूर हो गया। अचानक हुए इस हमले से पूरे कोच में दहशत फैल गई। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग यात्री घबरा गए। कोच में चीख-पुकार मच गई और कुछ देर के लिए ऐसा लगा कि कहीं कोई बड़ा रेल हादसा न हो जाए। सबसे बड़ी राहत यह रही कि जिस सीट के पास शीशा टूटा, वह खाली थी। यदि वहां कोई यात्री बैठा होता तो पत्थर सीधे उसके सिर या चेहरे पर लग सकता था और घटना जानलेवा साबित हो सकती थी। यही कारण है कि इस वारदात को केवल पत्थरबाजी नहीं, बल्कि सैकड़ों यात्रियों की जान से खिलवाड़ माना जा रहा है। मंगलवार की शाम गाड़ी संख्या 26501 पाटलिपुत्र-गोरखपुर वंदे भारत एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय पर पाटलिपुत्र से रवाना होकर बापूधाम मोतिहारी के रास्ते गोरखपुर की ओर जा रही थी। शाम करीब 6:15 से 6:30 बजे के बीच ट्रेन जैसे ही सुगौली स्टेशन से आगे बढ़ी, ट्रैक किनारे पहले से घात लगाए बैठे उपद्रवियों ने अचानक पत्थरों की बारिश शुरू कर दी। एक भारी पत्थर सी-4 कोच की खिड़की से टकराया और कांच के टुकड़े पूरे डिब्बे में बिखर गए। तेज धमाके की आवाज से यात्रियों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। कई लोग अपनी सीट छोड़कर दूसरी ओर चले गए, जबकि बच्चों को गोद में लेकर महिलाएं रोने लगीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना इतनी अचानक हुई कि कुछ क्षणों तक किसी को समझ ही नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है। कई यात्रियों को लगा कि ट्रेन पर किसी ने हमला कर दिया है। सौभाग्य से टूटा हुआ कांच किसी यात्री को गंभीर रूप से नहीं लगा, लेकिन यह महज संयोग था। यदि पत्थर का निशाना कुछ इंच भी बदल जाता तो नतीजे भयावह हो सकते थे। ट्रेन अपनी यात्रा जारी रखते हुए नरकटियागंज पहुंची, जहां स्कॉर्ट पार्टी ने क्षतिग्रस्त कोच का निरीक्षण किया और तत्काल रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) को सूचना दी। सूचना मिलते ही आरपीएफ हरकत में आई। अधिकारियों ने घटनास्थल के आसपास जांच शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों से पूछताछ की जा रही है और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पत्थरबाजों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि दोषियों की पहचान होने पर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक? पूर्वी चंपारण रेलखंड पर वंदे भारत एक्सप्रेस पहले भी कई बार पत्थरबाजी का शिकार हो चुकी है। हर घटना के बाद जांच होती है, जागरूकता अभियान चलाया जाता है, सुरक्षा बढ़ाने के दावे किए जाते हैं और दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिया जाता है। इसके बावजूद कुछ दिन बाद फिर वही तस्वीर सामने आ जाती है। इससे साफ है कि अब तक उठाए गए कदम पर्याप्त साबित नहीं हुए हैं। रेलवे वर्षों से ट्रैक किनारे बसे गांवों में लोगों को जागरूक कर रहा है कि ट्रेनों पर पत्थर फेंकना गंभीर अपराध है। आरपीएफ लगातार अभियान चलाती है। स्कूलों और पंचायतों में बैठकें होती हैं। फिर भी यदि देश की सबसे आधुनिक ट्रेन पर खुलेआम हमला हो रहा है, तो यह सुरक्षा तंत्र की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। रेल विशेषज्ञों का कहना है कि 100 से 130 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे अधिक गति से दौड़ती ट्रेन पर फेंका गया पत्थर किसी घातक हथियार की तरह असर करता है। यदि वह किसी यात्री के सिर, आंख या गर्दन पर लगे तो गंभीर चोट या मृत्यु तक हो सकती है। ऐसे में यह केवल सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटना नहीं, बल्कि मानव जीवन को खतरे में डालने वाला आपराधिक कृत्य है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन रेलखंडों पर बार-बार ऐसी घटनाएं हो रही हैं, वहां स्थायी सुरक्षा चौकियां, हाई-रिजॉल्यूशन सीसीटीवी, ड्रोन निगरानी, नियमित गश्ती दल और स्थानीय पुलिस के साथ संयुक्त अभियान अनिवार्य किया जाना चाहिए। केवल अपील और चेतावनी से अब काम नहीं चलेगा। कानून का भय पैदा करना होगा, तभी ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लग सकेगी। यह घटना एक बार फिर चेतावनी दे रही है कि यदि रेलवे और स्थानीय प्रशासन ने संवेदनशील रेलखंडों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता नहीं दी, तो अगला पत्थर किसी शीशे को नहीं, बल्कि किसी यात्री की जिंदगी को भी निशाना बना सकता है। देश की शान मानी जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस पर बार-बार हो रहे हमले अब केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और रेलवे की विश्वसनीयता का भी बड़ा सवाल बन चुके हैं।

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