- मोतिहारी में जमीन पर प्रशासनिक घमासान! 21 डिसमिल जमीन को ADM ने बताया रैयती, CO ने आधी रात कार्रवाई कर कहा—बेतिया राज की सरकारी भूमि; दो आदेशों के टकराव से उठे कई सवाल
मोतिहारी: जिले में जमीन विवाद का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और अधिकारियों के आदेशों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ही जमीन को लेकर प्रशासन के दो अलग-अलग रुख सामने आने के बाद पूरे जिले में चर्चा तेज हो गई है। मामला मोतिहारी सदर अंचल क्षेत्र के बरियारपुर मौजा स्थित 21 डिसमिल जमीन का है, जहां एक ओर प्रशासनिक समिति के आदेश में जमीन को रैयती यानी निजी भूमि माना गया, वहीं दूसरी ओर अंचल प्रशासन ने इसे बेतिया राज की सरकारी जमीन बताते हुए कार्रवाई कर दी। जानकारी के अनुसार, बरियारपुर मौजा के खाता संख्या 313, खेसरा संख्या 1382 की 21 डिसमिल जमीन को लेकर विवाद शुरू हुआ। बताया जाता है कि जनवरी 2026 में तत्कालीन एडीएम मुकेश सिन्हा की अध्यक्षता में गठित कमेटी के आदेश के आधार पर इस जमीन को रैयती भूमि मानते हुए रोक सूची से बाहर कर दिया गया था। इसके बाद जिला अवर निबंधक कार्यालय को पत्र भेजकर जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी रोक हटाने की जानकारी दी गई थी। कमेटी के निर्णय के बाद जमीन के दावेदारों ने हवाई अड्डे के समीप स्थित उक्त जमीन पर मिट्टी भराई और कब्जे की प्रक्रिया शुरू कर दी। लेकिन जब इसकी जानकारी जिला प्रशासन को मिली तो मामले ने नया मोड़ ले लिया।
- आधी रात पहुंची CO की टीम, जब्त किए वाहन
जिलाधिकारी सुमन सौरभ यादव के निर्देश पर मोतिहारी सदर अंचल अधिकारी (CO) पुलिस बल के साथ देर रात मौके पर पहुंचे। कार्रवाई के दौरान एक हाइवा ट्रक, एक कार और एक स्कूटी को जब्त किया गया। मौके से एक युवक को हिरासत में लेकर छतौनी थाना भेजा गया। अंचल अधिकारी की ओर से छतौनी थाना में दिए गए आवेदन में दावा किया गया कि बरियारपुर मौजा की यह जमीन बेतिया राज की सरकारी भूमि है और इस पर अवैध कब्जे का प्रयास किया जा रहा था। मामले में पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
- दो आदेशों के बीच फंसा बड़ा सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि अगर जमीन वास्तव में बेतिया राज की सरकारी भूमि है तो फिर ADM कार्यालय की कमेटी ने इसे रैयती मानते हुए रोक सूची से बाहर कैसे कर दिया? वहीं अगर जमीन रैयती थी तो फिर CO ने सरकारी जमीन बताते हुए कार्रवाई किस आधार पर की? जमीन के दस्तावेज, पुराने रिकॉर्ड और प्रशासनिक आदेशों की जांच अब इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी। इस विवाद ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
- DM ने दिए जांच के आदेश, दोषियों पर होगी कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी सुमन सौरभ यादव ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की बात कही है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- भू-माफिया से लेकर अधिकारियों तक जांच का दायरा!
एफआईआर दर्ज होने के बाद अब अनुसंधान में यह भी देखा जाएगा कि जमीन के मामले में किन लोगों की भूमिका रही। यदि किसी व्यक्ति ने गलत तरीके से जमीन की स्थिति बदलने, कब्जा कराने या प्रशासनिक प्रक्रिया को प्रभावित करने में मदद की है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। मोतिहारी का यह मामला अब सिर्फ जमीन विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक निर्णयों में तालमेल, राजस्व रिकॉर्ड की स्थिति और सरकारी जमीनों की सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल बन गया है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट से ही साफ होगा कि 21 डिसमिल जमीन आखिर रैयती है या बेतिया राज की सरकारी संपत्ति।