बाढ़ के पानी में मगरमच्छ की दस्तक या अफवाह? छौड़ादानो में वायरल तस्वीर से दहशत, वन विभाग को दी गई सूचना

बाढ़ के पानी में मगरमच्छ की दस्तक या अफवाह? छौड़ादानो में वायरल तस्वीर से दहशत, वन विभाग को बुलाया गया

छौड़ादानो (पूर्वी चंपारण)/राजेश कुमार सिंह। नेपाल से आई बाढ़ के बीच पूर्वी चंपारण के सीमावर्ती प्रखंड छौड़ादानो में मगरमच्छ दिखने की खबर ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। भतनहिया पंचायत के परसा पैठानपट्टी गांव में सोमवार को कई ग्रामीणों ने दावा किया कि पसाह नदी के बाढ़ के पानी के साथ एक मगरमच्छ गांव के दक्षिण स्थित सरेह में दिखाई दिया। इसके बाद ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया और लोग खेतों तथा जलमग्न इलाकों की ओर जाने से बचने लगे। मामले ने तब और तूल पकड़ लिया, जब सरेह के पानी में मगरमच्छ दिखाई देने का दावा करती एक तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगी। तस्वीर को लेकर गांव और आसपास के क्षेत्रों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि, अब तक किसी भी सरकारी एजेंसी ने इस तस्वीर की सत्यता की पुष्टि नहीं की है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हो रही बारिश और नेपाल क्षेत्र में जलस्तर बढ़ने के कारण पसाह नदी उफान पर है। नदी का पानी गांवों और खेतों में फैल गया है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि बाढ़ के तेज बहाव के साथ कोई जंगली जीव गांव के सरेह तक पहुंच गया हो। भतनहिया पंचायत के मुखियापति नबी अहमद खान ने बताया कि ग्रामीणों से सूचना मिलने के बाद उन्होंने तत्काल स्थानीय प्रशासन, वन विभाग और दरपा थाना पुलिस को इसकी जानकारी दी तथा संभावित मगरमच्छ के रेस्क्यू की मांग की। उन्होंने कहा कि वे स्वयं मगरमच्छ देखे जाने की पुष्टि नहीं कर सकते, लेकिन लगातार मिल रही सूचनाओं को देखते हुए प्रशासन को सतर्क करना आवश्यक था। दूसरी ओर, गांव के कुछ लोग वायरल तस्वीर को लेकर संदेह भी जता रहे हैं। उनका कहना है कि आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिए इस तरह की तस्वीरें आसानी से तैयार की जा सकती हैं। इसलिए बिना आधिकारिक पुष्टि के वायरल फोटो पर भरोसा करना उचित नहीं होगा। दरपा थानाध्यक्ष अनीश कुमार ने बताया कि मगरमच्छ दिखने की सूचना प्राप्त हुई है। सूचना मिलते ही वन विभाग को अवगत करा दिया गया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि जांच पूरी होने तक बाढ़ के पानी में अनावश्यक रूप से न जाएं तथा किसी भी संदिग्ध वन्यजीव के दिखने पर तुरंत पुलिस या वन विभाग को सूचित करें। समाचार लिखे जाने तक वन विभाग की टीम घटनास्थल पर नहीं पहुंची थी और मगरमच्छ की मौजूदगी की आधिकारिक पुष्टि भी नहीं हो सकी थी। अब सभी की निगाहें वन विभाग की जांच पर टिकी हैं कि वायरल तस्वीर और ग्रामीणों का दावा सच साबित होता है या महज अफवाह।

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