रक्सौल में खाद कारोबारियों पर कसा शिकंजा, संयुक्त छापेमारी में दो प्रतिष्ठान सील, केस दर्ज

  • रक्सौल में खाद कारोबारियों पर कसा शिकंजा, संयुक्त छापेमारी में दो प्रतिष्ठान सील, केस दर्ज

 

रक्सौल। नेपाल सीमा से सटे रक्सौल अनुमंडल में उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और किसानों के हक पर डाका डालने वाले कारोबारियों के खिलाफ प्रशासन ने अब आर-पार की लड़ाई का संकेत दे दिया है। बुधवार की देर रात अनुमंडल प्रशासन ने बड़े स्तर पर संयुक्त छापेमारी अभियान चलाकर हरैया थाना क्षेत्र के परेउवा ढाला स्थित दो उर्वरक दुकानों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से सील कर दिया। कृषि विभाग की जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद दोनों दुकानदारों के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम एवं उर्वरक (नियंत्रण) आदेश के तहत हरैया थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। देर रात हुई इस कार्रवाई से पूरे रक्सौल अनुमंडल के खाद कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। कई दुकानदार रात में ही अपने प्रतिष्ठानों पर पहुंच गए, जबकि प्रशासन की अगली कार्रवाई को लेकर पूरे क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है। जानकारी के अनुसार प्रशासन को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि खरीफ सीजन के बीच कुछ उर्वरक विक्रेता सरकारी नियमों की अनदेखी कर खाद के भंडारण, बिक्री और अभिलेखों में भारी गड़बड़ी कर रहे हैं। किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध नहीं कराया जा रहा, जबकि रिकॉर्ड में अलग स्थिति दर्शाई जा रही है। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए अनुमंडल पदाधिकारी मनीष कुमार एवं अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी मनीष आनंद के नेतृत्व में विशेष छापेमारी दल गठित किया गया। टीम में कृषि विभाग के अधिकारियों, सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और हरैया थाना पुलिस को शामिल किया गया ताकि कार्रवाई पूरी पारदर्शिता और सुरक्षा के बीच की जा सके। देर रात प्रशासनिक टीम ने परेउवा ढाला स्थित मनीष खाद एवं बीज भंडार तथा श्री राम कृषि सेवा केंद्र पर एक साथ दबिश दी। अचानक हुई इस कार्रवाई से दोनों प्रतिष्ठानों पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। अधिकारियों ने सबसे पहले दुकानों के लाइसेंस, स्टॉक रजिस्टर, खरीद-बिक्री का लेखा-जोखा, उर्वरकों की उपलब्ध मात्रा, वितरण रजिस्टर, बिल-वाउचर और अन्य आवश्यक अभिलेखों की गहन जांच शुरू की। कई घंटे तक चली जांच के दौरान उपलब्ध स्टॉक और कागजी रिकॉर्ड का मिलान किया गया। कृषि विभाग की टीम ने मौके पर ही विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार की, जिसमें विभिन्न प्रकार की गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया। रिपोर्ट मिलते ही प्रशासन ने बिना किसी देरी के दोनों दुकानों को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया। साथ ही दोनों दुकानदारों के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम एवं उर्वरक (नियंत्रण) आदेश के तहत हरैया थाना में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और यदि आगे भी किसी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता सामने आती है तो अतिरिक्त धाराओं में भी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सरकार किसानों को निर्धारित मूल्य पर समय से उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे में कोई भी दुकानदार यदि कृत्रिम संकट पैदा कर खाद की जमाखोरी करता है, अधिक कीमत वसूलता है, रिकॉर्ड में हेराफेरी करता है अथवा कालाबाजारी में शामिल पाया जाता है तो उसके विरुद्ध केवल दुकान सील करने तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी, बल्कि लाइसेंस रद्द करने, आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने और अन्य कठोर कानूनी कदम भी उठाए जाएंगे। अधिकारियों ने कहा कि खरीफ खेती के इस महत्वपूर्ण समय में उर्वरकों की उपलब्धता किसी भी कीमत पर प्रभावित नहीं होने दी जाएगी। किसानों के हित सर्वोपरि हैं और उनकी मेहनत से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन ने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में पूरे अनुमंडल के उर्वरक प्रतिष्ठानों की औचक जांच की जाएगी। जिन दुकानों पर स्टॉक में गड़बड़ी, फर्जी अभिलेख, बिना बिल बिक्री, जमाखोरी, कालाबाजारी या अन्य अनियमितताएं मिलेंगी, वहां भी इसी प्रकार की कठोर कार्रवाई होगी। प्रशासन ने सभी लाइसेंसधारी उर्वरक विक्रेताओं को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे निर्धारित नियमों का अक्षरशः पालन करें। स्टॉक एवं बिक्री से जुड़े सभी अभिलेख अद्यतन रखें और किसानों को निर्धारित दर पर ही उर्वरक उपलब्ध कराएं। वहीं किसानों से भी अपील की गई है कि यदि कोई दुकानदार निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूलता है, खाद उपलब्ध होने के बावजूद मना करता है, बिना रसीद बिक्री करता है या किसी भी प्रकार की अनियमितता करता है तो उसकी सूचना तत्काल कृषि विभाग, अनुमंडल प्रशासन अथवा स्थानीय थाना को दें। सूचना देने वालों की शिकायत पर त्वरित जांच और कार्रवाई की जाएगी। देर रात चली इस कार्रवाई में हरैया थानाध्यक्ष किशन कुमार, कृषि विभाग के पदाधिकारी, एसएसबी के अधिकारी एवं जवान तथा बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहा। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई को किसानों के हित में बड़ा कदम माना जा रहा है। साथ ही यह भी साफ संकेत है कि रक्सौल अनुमंडल में उर्वरकों की कालाबाजारी और जमाखोरी करने वालों के खिलाफ अब लगातार कार्रवाई का दौर जारी रहेगा और नियमों की अनदेखी करने वाले किसी भी कारोबारी को राहत मिलने वाली नहीं है।

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