- किसानों का हक लूट नेपाल भेजी जा रही थी 550 बैग यूरिया, ढाका में माफियाओं की बड़ी खेप जब्त
- नेपाल तस्करी के लिए भेजे जा रहे 550 बैग यूरिया की बड़ी खेप जब्त, कृषि विभाग की दबिश से कालाबाजारी का खेल बेनकाब
- ढाका में सघन जांच अभियान के दौरान पकड़ा गया ट्रक, मुजफ्फरपुर से नेपाल ले जाया जा रहा था उर्वरक; एफआईआर की तैयारी, विभाग ने कहा—कालाबाजारियों पर चलेगा कानूनी शिकंजा
मोतिहारी/ढाका। सीमावर्ती पूर्वी चंपारण जिले में किसानों के लिए आवंटित उर्वरक की कालाबाजारी और नेपाल तस्करी के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। कृषि विभाग की विशेष जांच टीम ने सोमवार को ढाका प्रखंड में सघन वाहन जांच अभियान के दौरान ट्रक संख्या BR30GA/9164 से लदे करीब 550 बैग यूरिया को जब्त कर लिया। प्रारंभिक जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि यूरिया की यह भारी खेप मुजफ्फरपुर से कालाबाजारी के उद्देश्य से नेपाल भेजी जा रही थी। कार्रवाई के बाद पूरे मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कृषि विभाग की इस कार्रवाई को सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय उर्वरक माफियाओं के खिलाफ अब तक की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि यदि यह खेप नेपाल पहुंच जाती तो जिले के हजारों किसानों को यूरिया के लिए परेशान होना पड़ सकता था। किसानों की जरूरत का उर्वरक अवैध तरीके से सीमापार भेजे जाने की कोशिश ने एक बार फिर कालाबाजारी के संगठित नेटवर्क की ओर संकेत किया है।
जानकारी के अनुसार 6 जुलाई 2026 को कृषि विभाग की विशेष जांच टीम ढाका प्रखंड में उर्वरकों की अवैध ढुलाई, कालाबाजारी और जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए सघन जांच अभियान चला रही थी। इसी दौरान संदिग्ध प्रतीत होने पर ट्रक संख्या BR30GA/9164 को रोका गया। तलाशी के दौरान ट्रक पर लगभग 550 बैग यूरिया लदा मिला। दस्तावेजों एवं परिवहन से जुड़े तथ्यों की जांच के बाद अधिकारियों ने प्रथम दृष्टया पाया कि उर्वरक को किसानों तक पहुंचाने के बजाय अधिक मुनाफे के लिए नेपाल भेजने की तैयारी थी।
कार्रवाई के बाद उर्वरक निरीक्षक-सह-कृषि समन्वयक उमेश कुमार वर्मा ने पूरे ट्रक को जब्त कर ढाका थाना के सुपुर्द कर दिया। मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई के तहत प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है। जब्त ट्रक के चालक की पहचान प्रदीप कुमार के रूप में हुई है। पुलिस अब चालक से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि इस अवैध कारोबार के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं, यूरिया किस एजेंसी या गोदाम से लोड किया गया था तथा नेपाल में इसे किसके पास पहुंचाया जाना था। कृषि विभाग को आशंका है कि यह किसी बड़े गिरोह का हिस्सा हो सकता है, जो किसानों के लिए उपलब्ध कराए जाने वाले उर्वरकों को सीमापार भेजकर मोटा मुनाफा कमाने का काम करता है। सीमावर्ती क्षेत्रों में पहले भी उर्वरक की कालाबाजारी और तस्करी की शिकायतें मिलती रही हैं, जिसके बाद विभाग ने निगरानी और जांच अभियान तेज कर दिया है। जिला कृषि पदाधिकारी मनीष कुमार सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कृषि विभाग किसानों के हितों के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेगा। उर्वरक की कालाबाजारी, अवैध भंडारण, अनियमित व्यवसाय और तस्करी में संलिप्त लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी एवं प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि विभाग पूरे जिले में लगातार निगरानी कर रहा है और जहां भी अनियमितता मिलेगी, वहां तत्काल कार्रवाई होगी। उन्होंने यह भी बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। कृषि विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त निगरानी में उर्वरक के परिवहन, गोदामों और बिक्री केंद्रों की नियमित जांच की जा रही है ताकि किसानों के हिस्से का उर्वरक किसी भी कीमत पर कालाबाजारियों के हाथों न पहुंच सके। कृषि विभाग की इस कार्रवाई के बाद उर्वरक माफियाओं में हड़कंप मच गया है। विभाग ने साफ संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में भी इस तरह के विशेष अभियान जारी रहेंगे और किसानों के अधिकारों पर डाका डालने वाले किसी भी व्यक्ति को कानून के शिकंजे से बचने नहीं दिया जाएगा। सीमावर्ती जिलों में उर्वरक की कालाबाजारी और तस्करी रोकने के लिए अब और अधिक सख्ती बरती जाएगी, ताकि खेती के मौसम में किसानों को समय पर और उचित मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध हो सके।



