रामगढ़वा में फंदे पर लटकी मिली विवाहिता, परिजनों का आरोप— पहले हत्या, फिर आत्महत्या का खेल

  • “क्या पहले ली गई जान और फिर रचा गया आत्महत्या का खेल?” रामगढ़वा में 24 वर्षीय विवाहिता की संदिग्ध मौत से उठा तूफान, पति फरार; इंसाफ की मांग पर उबाल

रामगढ़वा (पूर्वी चंपारण)। पूर्वी चंपारण के रामगढ़वा थाना क्षेत्र से सामने आई एक दर्दनाक और रहस्यमयी घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। आर्यनगर वार्ड संख्या-7 में 24 वर्षीय विवाहिता शमसीदा खातून की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत अब महज एक पारिवारिक घटना नहीं रह गई है, बल्कि यह मामला कई गंभीर सवालों के केंद्र में आ गया है। मृतका के परिजन इसे आत्महत्या नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या बता रहे हैं। उनका आरोप है कि पहले उनकी बेटी की जान ली गई और फिर पूरे मामले को आत्महत्या साबित करने के लिए शव को फंदे से लटका दिया गया। घटना के बाद जहां एक ओर मृतका का परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है, वहीं दूसरी ओर पति के फरार होने और पुलिस द्वारा ससुराल पक्ष के लोगों को हिरासत में लिए जाने से मामला और अधिक गंभीर हो गया है। पूरे क्षेत्र में इस घटना को लेकर चर्चा, आक्रोश और बेचैनी का माहौल है।

छह साल पहले हुई थी शादी, अब मौत ने खड़े कर दिए कई सवाल

मृतका शमसीदा खातून मझौलिया थाना क्षेत्र के बहुअरवा गांव निवासी सिकंदर शेख की पुत्री थीं। वर्ष 2020 में उनकी शादी बैरिया पंचायत निवासी शेख इरशाद, पिता शेख मकबूल के साथ हुई थी। परिवार ने बेटी को खुशहाल जीवन की उम्मीद के साथ विदा किया था, लेकिन छह वर्षों बाद उसी बेटी की मौत की खबर ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया। मायके पक्ष का आरोप है कि शादी के बाद से ही शमसीदा को लगातार प्रताड़ित किया जाता था। उसे मानसिक दबाव में रखा जाता था और कई बार मारपीट भी की गई। परिजनों का कहना है कि बेटी कई बार अपनी पीड़ा बताती थी, लेकिन हर बार उसे समझाकर ससुराल भेज दिया जाता था ताकि उसका घर-परिवार बचा रहे।

रात में मौत की खबर और सुबह आरोपों का विस्फोट

परिजनों के अनुसार बीती रात अचानक फोन पर शमसीदा की मौत की सूचना मिली। खबर सुनते ही परिवार के लोग बदहवास होकर रामगढ़वा पहुंचे। वहां पहुंचने के बाद जो दृश्य उन्होंने देखा, उसने उनके मन में कई सवाल खड़े कर दिए। परिवार का आरोप है कि शमसीदा की मौत स्वाभाविक नहीं है। उनका कहना है कि बेटी की हत्या के बाद उसे फंदे से लटकाकर आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई। परिजनों ने पुलिस से मांग की है कि मामले की जांच सिर्फ औपचारिकता न बने, बल्कि हर पहलू को गंभीरता से खंगाला जाए।

पति की फरारी ने बढ़ाया रहस्य

घटना के बाद सबसे ज्यादा चर्चा मृतका के पति शेख इरशाद को लेकर हो रही है। बताया जा रहा है कि घटना के बाद से वह घर छोड़कर फरार है। पुलिस उसकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी संदिग्ध मौत के मामले में पति की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में उसका फरार होना कई नए सवालों को जन्म दे रहा है। गांव में लोग खुलकर चर्चा कर रहे हैं कि आखिर घटना के बाद पति सामने क्यों नहीं आया।

पुलिस ने दिखाई तत्परता, ससुर और भाई हिरासत में

घटना की सूचना मिलते ही रामगढ़वा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और तत्काल जांच शुरू कर दी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। साथ ही मृतका के ससुर तथा परिवार के एक अन्य सदस्य को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले साक्ष्य और पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

रोती मां का सवाल— “मेरी बेटी का कसूर क्या था?”

घटना के बाद मृतका के घर में मातम पसरा हुआ है। मां-बाप और रिश्तेदारों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों का कहना है कि जिस बेटी को उन्होंने बड़े अरमानों से विदा किया था, आज उसकी लाश मिली है। परिवार का दर्द सिर्फ बेटी को खोने का नहीं, बल्कि इस बात का भी है कि आखिर उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई। रोती-बिलखती मां बार-बार यही सवाल पूछ रही है— “मेरी बेटी का कसूर क्या था?”

न्याय की मांग तेज

घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि यह हत्या का मामला है तो दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर कड़ी सजा दी जानी चाहिए। कई सामाजिक लोगों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। मृतका के परिजनों ने पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात से मामले में विशेष हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है। फिलहाल इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच है। मौत आत्महत्या है या हत्या, इसका अंतिम सच जांच के बाद ही सामने आएगा। लेकिन इतना तय है कि रामगढ़वा की इस घटना ने एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा, वैवाहिक प्रताड़ना और संदिग्ध मौतों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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