पॉक्सो मामले में दोषी को 20 साल की सजा, मोतिहारी कोर्ट का बड़ा फैसला

पॉक्सो मामले में दोषी को 20 साल की सजा, मोतिहारी कोर्ट का बड़ा फैसला

मोतिहारी: जिला में बच्चियों के खिलाफ अपराध करने वालों पर अदालत ने ऐसा फैसला सुनाया है, जिसने पूरे जिले में सख्त संदेश दे दिया है। पॉक्सो एक्ट के एक गंभीर मामले में दोषी पाए गए भुलन सहनी को अदालत ने 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला मोतिहारी पुलिस की मजबूत जांच, पुख्ता साक्ष्य और प्रभावी पैरवी का परिणाम माना जा रहा है। मामला मुफस्सिल (लखौरा) थाना कांड संख्या 430/22 से जुड़ा है। आरोपी भुलन सहनी, पिता स्वर्गीय दसई सहनी, निवासी बहुआरी, थाना लखौरा, जिला पूर्वी चंपारण पर नाबालिग के अपहरण, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत गंभीर आरोप लगाए गए थे। घटना के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए मामले की जांच शुरू की थी। जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों को जुटाया। पीड़िता का बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज अदालत में पेश किए गए। मामले में मोतिहारी पुलिस की ओर से समय पर चार्जशीट दाखिल की गई, जिसके आधार पर अदालत में लगातार सुनवाई चलती रही। विशेष न्यायाधीश (बलात्कार एवं पॉक्सो), मोतिहारी की अदालत ने सुनवाई पूरी होने के बाद आरोपी को दोषी करार दिया। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 363 के तहत 7 वर्ष का कठोर कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माना, धारा 366(ए) के तहत 10 वर्ष का कठोर कारावास एवं 20 हजार रुपये अर्थदंड, धारा 376(2) के तहत 10 वर्ष का कठोर कारावास एवं 20 हजार रुपये जुर्माना सुनाया। वहीं पॉक्सो एक्ट की धारा 4(2) के तहत आरोपी को 20 वर्ष का कठोर कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा दी गई। इस मामले में विशेष लोक अभियोजक पुष्पा दुबे ने अदालत में प्रभावी तरीके से पक्ष रखा। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी ने नाबालिग के साथ गंभीर अपराध किया था और ऐसे मामलों में कठोर सजा जरूरी है ताकि समाज में स्पष्ट संदेश जा सके। फैसले के बाद मोतिहारी पुलिस ने कहा कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई, मजबूत अनुसंधान और सख्त पैरवी आगे भी जारी रहेगी। अदालत के इस फैसले को जिले में एक बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि बच्चियों के खिलाफ अपराध करने वालों के लिए कानून अब और ज्यादा सख्त हो चुका है और दोषियों को लंबी सजा देकर न्याय व्यवस्था ने साफ संकेत दे दिया है कि ऐसे अपराध किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।

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