ऑनलाइन दवा कारोबार के खिलाफ रामगढ़वा में मेडिकल स्टोरों पर ताले, मरीज बेहाल, दवा व्यवसायियों ने सरकार को दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

  • ऑनलाइन दवा कारोबार के खिलाफ रामगढ़वा में मेडिकल स्टोरों पर ताले, मरीज बेहाल, दवा व्यवसायियों ने सरकार को दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

रामगढ़वा/अरुण कुमार ओझा: पूर्वी चंपारण जिले के रामगढ़वा प्रखंड में बुधवार को मेडिकल कारोबार पूरी तरह ठप रहा। ऑल इंडिया केमिस्ट एसोसिएशन के देशव्यापी बंद के समर्थन में प्रखंड के सभी थोक और खुदरा मेडिकल स्टोर संचालकों ने अपनी दुकानें बंद रखकर सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। सुबह से ही बाजार में दवा दुकानों के शटर बंद दिखाई दिए, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। जरूरी दवाओं के लिए लोग बाजार में भटकते रहे, लेकिन कहीं भी दवा उपलब्ध नहीं होने से कई मरीजों को बिना इलाज के लौटना पड़ा। खासकर बुजुर्ग, गंभीर बीमार और बच्चों के परिजन दिनभर परेशान नजर आए। दवा दुकानदारों का कहना है कि सरकार की नीतियों ने पारंपरिक मेडिकल व्यवसाय को बर्बादी के कगार पर पहुंचा दिया है। दवा विक्रेता संघ के प्रखंड अध्यक्ष अभिषेक कुमार तिवारी उर्फ रिशू तिवारी ने कहा कि ऑनलाइन दवा कंपनियों को सरकार की ओर से खुली छूट दी जा रही है, जबकि छोटे दुकानदार लगातार नियमों और टैक्स के बोझ तले दब रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भारी डिस्काउंट देकर बाजार व्यवस्था को खत्म करने में जुटे हैं, जिससे वर्षों से मेहनत कर व्यवसाय चला रहे स्थानीय मेडिकल दुकानदार आर्थिक संकट में आ गए हैं। उन्होंने कहा कि मेडिकल स्टोर केवल कारोबार का माध्यम नहीं बल्कि लोगों की जिंदगी से जुड़ी सेवा है। गांव और कस्बों में जरूरत के समय यही स्थानीय दवा दुकानदार लोगों तक तुरंत दवा पहुंचाते हैं, लेकिन सरकार ई-फार्मेसी कंपनियों को बढ़ावा देकर छोटे व्यवसायियों की रोजी-रोटी छीनने का काम कर रही है। उन्होंने मांग की कि ई-फार्मेसी कंपनियों के लिए सख्त कानून बनाए जाएं, ऑनलाइन दवा बिक्री पर नियंत्रण लगाया जाए और दवाओं पर टैक्स में राहत दी जाए। थोक दवा विक्रेता विशाल कुमार ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दवाओं की कीमत इतनी कम रखी जा रही है कि स्थानीय दुकानदार प्रतिस्पर्धा ही नहीं कर पा रहे हैं। इससे छोटे दुकानदारों का व्यवसाय लगातार खत्म हो रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार ने समय रहते इस मामले में हस्तक्षेप नहीं किया तो दवा व्यवसायी चरणबद्ध तरीके से और बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। दवा दुकानदारों ने यह भी आरोप लगाया कि ऑनलाइन दवा बिक्री के कारण नकली और बिना डॉक्टर की सलाह वाली दवाओं का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। उनका कहना था कि कई वेबसाइट बिना उचित जांच के दवाइयां उपलब्ध करा रही हैं, जिससे मरीजों की जिंदगी खतरे में पड़ सकती है। स्थानीय दुकानदारों का दावा है कि मेडिकल स्टोर पर प्रशिक्षित लोग मरीजों को सही दवा और जरूरी जानकारी देते हैं, जबकि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर केवल मुनाफे का खेल चल रहा है। बंद के दौरान बाजार में सन्नाटा पसरा रहा। कई जगह मरीज और उनके परिजन बंद दुकानों के सामने खड़े होकर दवा मिलने की उम्मीद करते रहे। हालांकि इमरजेंसी जरूरतों के लिए कुछ अस्पतालों के अंदर सीमित व्यवस्था देखने को मिली, लेकिन आम लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। इस विरोध प्रदर्शन में प्रकाश गुप्ता, लालबाबू प्रसाद, मो. आरिफ, रणविजय कुमार, सुनील प्रसाद यादव, पिंटू कुमार, मो. आसिफ, गणेश गुप्ता, रंजन वर्मा और अजहर जावेद सहित बड़ी संख्या में दवा दुकानदार शामिल रहे। सभी ने एकजुट होकर सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की और कहा कि यह आंदोलन अभी शुरुआत है, जरूरत पड़ी तो इसे और उग्र बनाया जाएगा।

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